
रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले रामनगर कोर्ट परिसर में बुधवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब हत्या के एक मामले में पेशी पर आए एक शातिर अपराधी ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ निगल लिया। इस सूचना के बाद न्यायालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में आरोपी को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की शुरुआती जांच ने मामले में नया मोड़ दे दिया है।
कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी और पुलिस की दौड़-भाग
जानकारी के मुताबिक, 25 वर्षीय एक युवक, जिस पर हत्या (धारा 302) जैसे गंभीर आरोप हैं, उसे बुधवार को रामनगर न्यायालय में तारीख पर लाया गया था। पेशी की कार्यवाही के दौरान ही अचानक यह खबर फैली कि युवक ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया है। न्यायालय परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं और वादकारियों के बीच हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाई और युवक को एम्बुलेंस के जरिए राजकीय संयुक्त अस्पताल, रामनगर में भर्ती कराया।
डॉक्टरों की रिपोर्ट ने खोली ‘दावे’ की पोल
रामनगर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में डॉक्टरों ने तुरंत युवक का उपचार शुरू किया और प्रारंभिक जांच की। हालांकि, कुछ ही समय बाद चिकित्सा रिपोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को चौंका दिया। रामनगर सीओ सुमित पांडे ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि डॉक्टरों ने युवक की गहन जांच की और उससे पूछताछ भी की।
चिकित्सकों के अनुसार, युवक के शरीर में किसी भी प्रकार के जहरीले तत्व या पदार्थ के सेवन के लक्षण नहीं पाए गए। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि युवक ने कोई जहर नहीं खाया था। सीओ ने बताया कि स्वयं युवक ने भी बाद में किसी जहरीला पदार्थ खाने की बात से इनकार किया।
एहतियातन हल्द्वानी रेफर, पुलिस की कड़ी निगरानी
हालांकि डॉक्टरों ने जहर की पुष्टि नहीं की, लेकिन पुलिस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती थी। सीओ सुमित पांडे ने जानकारी दी कि पूरी सतर्कता बरतते हुए और किसी भी संभावित चिकित्सकीय खतरे को पूरी तरह खारिज करने के लिए आरोपी को सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी रेफर कर दिया गया है। फिलहाल आरोपी पुलिस की कड़ी निगरानी में है और उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
पुलिस का संदेह: क्या दबाव बनाने की थी साजिश?
इस पूरी घटना को पुलिस एक सोची-समझी साजिश के रूप में देख रही है। सीओ सुमित पांडे ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, “युवक की बुधवार को धारा 300/302 जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में पेशी थी। शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी ने पुलिस और न्यायालय पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाने का स्वांग रचा हो।” कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि कई बार अपराधी सजा के डर से या सुनवाई को टालने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं। फिलहाल पुलिस सभी तकनीकी और वैज्ञानिक तथ्यों की जांच कर रही है ताकि सच सामने आ सके।
शातिर अपराधी है आरोपी: 10 मुकदमे हैं दर्ज
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि उक्त युवक का आपराधिक इतिहास काफी लंबा और चौड़ा है। वह क्षेत्र का नामी बदमाश माना जाता है। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार:
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आरोपी के खिलाफ रामनगर और कालाढूंगी थानों में कुल मिलाकर 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
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इन मुकदमों में हत्या, हत्या का प्रयास और लूट जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।
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वह लंबे समय से पुलिस के रडार पर रहा है और फिलहाल जेल में निरुद्ध है।
अगली कार्रवाई: अस्पताल से छुट्टी मिलते ही बढ़ेगी मुश्किल
पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी को फिलहाल चिकित्सकीय ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। जैसे ही सुशीला तिवारी अस्पताल से उसे छुट्टी (Discharge) मिलेगी, पुलिस उसके खिलाफ न्यायालय की अवमानना और जांच को गुमराह करने के संबंध में अग्रिम कानूनी कार्रवाई करेगी।
इस घटना ने न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं, जिस पर पुलिस विभाग अब अतिरिक्त सावधानी बरतने की बात कह रहा है।
रामनगर कोर्ट परिसर में हुई इस घटना ने साफ कर दिया है कि अपराधी कानून की पकड़ से बचने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। हालांकि, पुलिस और डॉक्टरों की मुस्तैदी ने इस ‘हाई-प्रोफाइल ड्रामे’ का जल्द ही पर्दाफाश कर दिया। अब देखना यह होगा कि इस कृत्य के लिए न्यायालय आरोपी के खिलाफ क्या कड़ा रुख अपनाता है।



