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Uttarakhand: जड़ों की ओर लौटे सुबोध उनियाल: अपने पैतृक गांव पहुँच कुलदेवी के दर पर टेका माथा, पहाड़ों की ‘सेहत’ सुधारने के लिए कसी कमर

पौड़ी (उत्तराखंड): चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति जुड़ाव की एक अनुपम तस्वीर सामने आई है। उत्तराखंड सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल अपने पैतृक गांव ‘ओंणी’ पहुंचे। पौड़ी जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस शांत गांव में मंत्री उनियाल का अंदाज एक राजनेता के बजाय एक समर्पित पुत्र और ग्रामीण जैसा नजर आया। उन्होंने न केवल कुलदेवी मां राजराजेश्वरी के चरणों में शीश नवाया, बल्कि पहाड़ों की सबसे बड़ी समस्या—’स्वास्थ्य व्यवस्था’—को लेकर सरकार का संकल्प भी दोहराया।

आध्यात्मिक ऊर्जा और पैतृक जड़ों का संगम

नवरात्रि के विशेष अवसर पर अपने गांव पहुंचे सुबोध उनियाल ने परिवार के सदस्यों के साथ मां राजराजेश्वरी की विधिवत पूजा-अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और देश-प्रदेश की खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने कन्या पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया।

मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “राजनीति और कार्यक्षेत्र की व्यस्तता के बीच अपने पैतृक गांव आना हमेशा एक नई ऊर्जा देता है। कुलदेवी का आशीर्वाद लेना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं समय-समय पर यहाँ आता रहता हूँ ताकि अपनी मिट्टी से जुड़ा रह सकूँ।”

चौपाल पर सुनी जनसमस्याएं: विकास का खाका तैयार

पूजा-अर्चना के बाद मंत्री उनियाल ने ग्रामीणों के साथ समय बिताया। गांव की चौपाल पर सजे इस अनौपचारिक कार्यक्रम में उन्होंने एक-एक कर स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने सड़क, पानी और बंदरों के आतंक जैसी बुनियादी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। मंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर इन समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्वतीय क्षेत्रों का समग्र विकास तभी संभव है जब अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे।


स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा संकल्प: रेफरल सेंटर नहीं, उपचार केंद्र बनेंगे अस्पताल

हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की अहम जिम्मेदारी संभालने के बाद सुबोध उनियाल पौड़ी दौरा राज्य की स्वास्थ्य नीतियों को धार देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहाड़ों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और इसके कारण हो रहे पलायन पर उन्होंने बेबाकी से अपनी बात रखी।

1. विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और रोस्टर प्रणाली

मंत्री उनियाल ने स्वीकार किया कि पहाड़ों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी एक कड़वी सच्चाई है। उन्होंने घोषणा की कि अब राज्य के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती ‘रोस्टर प्रणाली’ के तहत की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी अस्पताल लंबे समय तक विशेषज्ञ विहीन न रहे। उनका मुख्य उद्देश्य अनावश्यक ‘रेफर’ करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा, “मरीज को स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ उपचार मिलना चाहिए, ताकि उन्हें ऋषिकेश या देहरादून के चक्कर न काटने पड़ें।”

2. 108 एम्बुलेंस सेवा का कायाकल्प

राज्य में गर्भवती महिलाओं को समय पर एम्बुलेंस न मिलने और रास्ते में प्रसव होने जैसी दुखद घटनाओं पर मंत्री ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा कि 108 आपातकालीन सेवा को और अधिक प्रभावी और समयबद्ध (Time-bound) बनाया जा रहा है। एम्बुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम को कम करने के लिए नई तकनीक और बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा।

3. बुनियादी ढांचे और उपकरणों पर निवेश

स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी कि विभाग जल्द ही दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद करने जा रहा है। इसके साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। उन्होंने कहा, “शिक्षा के लिए व्यक्ति का स्वस्थ होना अनिवार्य है। यदि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी को रोकना है, तो हमें यहाँ की स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाना ही होगा।”

चुनौतियां और भविष्य की राह

उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमेशा से एक चुनौती रही है। सुबोध उनियाल ने माना कि कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण पलायन बढ़ा है, लेकिन वे इस चुनौती को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने विभाग की समीक्षा बैठकें शुरू कर दी हैं और वे स्वयं धरातल पर जाकर अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं।

जनहित सर्वोपरि

सुबोध उनियाल पौड़ी दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि सरकार पहाड़ों की बुनियादी समस्याओं को लेकर गंभीर है। कुलदेवी के आशीर्वाद और जनता के विश्वास के साथ, स्वास्थ्य मंत्री के रूप में उनियाल की यह नई पारी उत्तराखंड के स्वास्थ्य मानचित्र को बदलने में कितनी सफल होती है, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन उनकी प्रतिबद्धता ने निश्चित रूप से पहाड़ों में उम्मीद की एक नई किरण जगाई है।

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