
शुक्रवार, 27 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों को गहरी चिंता में डाल दिया। बाजार खुलते ही बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 900 अंकों तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 50 भी 1% से ज्यादा टूटकर नीचे आ गया। इस अचानक आई गिरावट ने कुछ ही मिनटों में निवेशकों की करीब ₹6 लाख करोड़ की संपत्ति को साफ कर दिया।
सुबह 9:16 बजे के आसपास सेंसेक्स 835 अंक यानी 1.13% गिरकर 74,425.95 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी 217 अंक यानी 0.93% की गिरावट के साथ 23,089.05 पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट का असर सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
चौतरफा बिकवाली से बाजार में हड़कंप
ट्रेडिंग शुरू होते ही लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स 74,347 के निचले स्तर तक फिसल गया, वहीं निफ्टी 50 भी करीब 300 अंक गिरकर 23,026 तक पहुंच गया। इस गिरावट के चलते BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹431 लाख करोड़ से घटकर ₹425 लाख करोड़ रह गया।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो पीएसयू बैंक और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। हालांकि, आईटी सेक्टर ने थोड़ी मजबूती दिखाई और हरे निशान में बना रहा। इससे यह साफ है कि बाजार में निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है और वे जोखिम से बचने के लिए तेजी से अपने निवेश निकाल रहे हैं।
टॉप गेनर्स और लूजर्स का हाल
गिरते बाजार में भी कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई। आईटी सेक्टर की कंपनियां जैसे एचसीएल टेक, टीसीएस, इंफोसिस और टेक महिंद्रा ने अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं, सन फार्मा और ट्रेंट भी गेनर्स की सूची में शामिल रहे।
दूसरी ओर, वित्तीय और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े नाम लूजर्स में रहे। इसके अलावा ऑटो और इंफ्रा कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी असर
बाजार की इस गिरावट का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी साफ दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1% से ज्यादा गिरकर 54,769 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी करीब 0.82% गिरकर 15,766 पर आ गया। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली हो रही है और निवेशक जोखिम से बचने के लिए हर तरह के शेयर बेच रहे हैं।
गिरावट की 5 बड़ी वजहें
- ग्लोबल मार्केट से खराब संकेत
अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। S&P 500 और Nasdaq में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। - मिडिल-ईस्ट में बढ़ता तनाव
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और अमेरिका के बयानों ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। युद्ध की आशंका और विरोधाभासी खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है। - रुपये की रिकॉर्ड गिरावट
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ₹94.15 के स्तर तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन रहा है। - कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। भारत की आयात निर्भरता ज्यादा होने के कारण इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ता है। - विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने मार्च में ₹1.23 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी की है, जो बाजार में गिरावट का बड़ा कारण बनी।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार में आई यह गिरावट बताती है कि वैश्विक घटनाओं का असर भारतीय बाजार पर कितना गहरा पड़ता है। फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रहने का समय है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितता कम नहीं होती, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में समझदारी से निवेश करना और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।



