श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल): उत्तराखंड की शिक्षा और संस्कृति की राजधानी कहे जाने वाले श्रीनगर की ऐतिहासिक पहचान अब एक नए और भव्य स्वरूप में निखरने वाली है। शहर के हृदय स्थल मानी जाने वाली ‘पीपलचौरी’ को उसके मूल वैभव में लौटाने के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है। वर्षों से उपेक्षा का शिकार रही इस ऐतिहासिक जगह को न केवल संरक्षित किया जाएगा, बल्कि यहाँ एक भव्य ‘वाल्मीकि चौक’ का निर्माण कर इसे शहर के मुख्य आकर्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
श्रीनगर नगर निगम की मेयर आरती भंडारी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का खाका पेश करते हुए इसे शहर के सम्मान और अस्मिता से जोड़ दिया है।
पीपलचौरी: स्मृतियों के झरोखे से एक ऐतिहासिक पहचान
श्रीनगर की पीपलचौरी महज एक स्थान नहीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास है। बुजुर्गों और स्थानीय लोगों की मानें तो पुराने समय में यह स्थान सामाजिक मेल-मिलाप का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था। दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोग यहाँ विश्राम करते थे।
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सांस्कृतिक केंद्र: त्योहारों और विशेष अवसरों पर यहाँ भजन-कीर्तन और सामूहिक आयोजनों की गूंज सुनाई देती थी।
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सामाजिक संवाद: यह स्थान श्रीनगर के व्यापारिक और सामाजिक विमर्श का मुख्य अड्डा था।
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समय का प्रभाव: आधुनिकता की दौड़ में यह ऐतिहासिक स्थल धीरे-धीरे अपनी पहचान खोने लगा था और अतिक्रमण व अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया था।
महिलाओं की असहजता और शौचालय का विवाद
पीपलचौरी की गरिमा को धूमिल करने वाला सबसे बड़ा कारण इसके ठीक सामने तिराहे के बीचों-बीच बना सार्वजनिक शौचालय था। यह शौचालय न केवल यातायात की दृष्टि से बाधक था, बल्कि सार्वजनिक रूप से महिलाओं के लिए बड़ी असुविधा का कारण बना हुआ था।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तिराहे पर शौचालय होने के कारण महिलाओं को वहां से गुजरते समय भारी असहजता महसूस होती थी। वर्षों से जनता इसे हटाने की मांग कर रही थी, जिसे अब नगर निगम ने गंभीरता से लेते हुए ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मेयर आरती भंडारी का संकल्प: वाल्मीकि चौक का निर्माण
नगर निगम की प्रथम नागरिक और मेयर आरती भंडारी ने इस परियोजना को अपनी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रखा है। उन्होंने कहा, “शपथ ग्रहण के समय मैंने श्रीनगर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को संवारने का जो पहला संकल्प लिया था, वाल्मीकि चौक का निर्माण उसी कड़ी का हिस्सा है।”
परियोजना की मुख्य विशेषताएं:
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स्वच्छता और आधुनिकता: विवादित शौचालय को हटाकर पास ही में एक ‘हाईटेक’ और आधुनिक सुविधाओं से लैस शौचालय बनाया जाएगा, ताकि स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो।
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सौंदर्यीकरण: पीपलचौरी क्षेत्र को ओपन स्पेस के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ लोग बैठ सकें और शहर की ऐतिहासिकता को महसूस कर सकें।
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टेंडर प्रक्रिया: मेयर के अनुसार, वाल्मीकि चौक निर्माण के लिए जल्द ही निविदाएं (Tenders) आमंत्रित की जाएंगी और एक निश्चित समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
स्थानीय जनता में उत्साह की लहर
नगर निगम के इस निर्णय का श्रीनगर के व्यापारियों, छात्रों और बुजुर्गों ने स्वागत किया है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि श्रीनगर पीपलचौरी का यह कायाकल्प शहर के पुराने स्वरूप को वापस लाएगा।
“यह सिर्फ एक चौक का निर्माण नहीं है, बल्कि श्रीनगर की खोई हुई गरिमा को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है। शौचालय हटने से महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी और वाल्मीकि चौक शहर की सुंदरता में चार चांद लगा देगा।” – एक स्थानीय नागरिक
श्रीनगर की बदलती तस्वीर और भविष्य की चुनौतियां
श्रीनगर पौड़ी गढ़वाल का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहाँ एनआईटी (NIT) और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय जैसे संस्थान हैं। ऐसे में शहर के मुख्य तिराहे का सौंदर्यीकरण पर्यटन और स्थानीय गौरव, दोनों के लिए अनिवार्य है।
हालाँकि, नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण तरीके से समय पर पूरा करना और यह सुनिश्चित करना है कि नए हाईटेक शौचालय का रखरखाव बेहतर ढंग से हो। मेयर आरती भंडारी ने आश्वस्त किया है कि इस पहल से न केवल ऐतिहासिक पहचान पुनर्जीवित होगी, बल्कि शहरवासियों को एक सुरक्षित और सम्मानजनक सार्वजनिक स्थल भी प्राप्त होगा।
श्रीनगर की ऐतिहासिक धरोहर पुनरुद्धार की यह योजना इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो विकास और विरासत को साथ लेकर चला जा सकता है। पीपलचौरी का नया स्वरूप और वाल्मीकि चौक आने वाले समय में श्रीनगर की नई पहचान बनेंगे, जो स्वच्छता और संस्कृति का अद्भुत संगम होगा।



