By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: छत्तीसगढ़ में फिर पेपर लीक का साया! IGKV के जेनेटिक्स प्रश्नपत्र के परीक्षा से 6 घंटे पहले वायरल होने का दावा, जांच पर उठे सवाल
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > छत्तीसगढ़ में फिर पेपर लीक का साया! IGKV के जेनेटिक्स प्रश्नपत्र के परीक्षा से 6 घंटे पहले वायरल होने का दावा, जांच पर उठे सवाल
देशफीचर्ड

छत्तीसगढ़ में फिर पेपर लीक का साया! IGKV के जेनेटिक्स प्रश्नपत्र के परीक्षा से 6 घंटे पहले वायरल होने का दावा, जांच पर उठे सवाल

The Hill India News
Last updated: August 26, 2026 10:31 am
The Hill India News
Published: August 26, 2026
Share
SHARE

रायपुर: छत्तीसगढ़ में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की परीक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में कीटशास्त्र यानी एंटोमोलॉजी विषय के प्रश्नपत्र लीक मामले का खुलासा होने और छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब बीएससी प्रथम वर्ष के फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स विषय के प्रश्नपत्र को लेकर भी पेपर लीक की आशंका जताई जा रही है। दावा किया जा रहा है कि 19 अगस्त को सुबह 10 बजे आयोजित होने वाली परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से करीब छह घंटे पहले, यानी तड़के लगभग 4 बजे व्हाट्सएप पर वायरल हो गया था।

Contents
परीक्षा से पहले वायरल होने का दावा, समान प्रश्नों को लेकर चर्चा तेजविश्वविद्यालय को अब तक नहीं मिली औपचारिक शिकायतएंटोमोलॉजी पेपर लीक के बाद नया मामलाप्रोफेसर पर लगा था पेपर लीक का आरोपअब वायरल मैसेज की जांच से खुल सकती है सच्चाईछात्रों में चिंता, परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल

सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर प्रसारित कथित प्रश्नपत्र को लेकर दावा किया जा रहा है कि उसमें मौजूद कई प्रश्न वास्तविक परीक्षा में पूछे गए सवालों से मिलते-जुलते हैं। हालांकि, इस मामले में अभी तक विश्वविद्यालय के पास कोई औपचारिक शिकायत पहुंचने की जानकारी नहीं है और न ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रश्नपत्र लीक होने की आधिकारिक पुष्टि की है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही चर्चाओं ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की चिंता बढ़ा दी है।

परीक्षा से पहले वायरल होने का दावा, समान प्रश्नों को लेकर चर्चा तेज

बीएससी प्रथम वर्ष के फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स विषय की परीक्षा 19 अगस्त को सुबह 10 बजे आयोजित की गई थी। दावा है कि इसी परीक्षा से संबंधित एक प्रश्नपत्र या प्रश्नों की सूची उसी दिन तड़के करीब 4 बजे व्हाट्सएप पर प्रसारित होने लगी थी। यानी परीक्षा शुरू होने से लगभग छह घंटे पहले कथित प्रश्नपत्र छात्रों और अन्य लोगों तक पहुंचने की बात सामने आई है।

वायरल सामग्री और वास्तविक परीक्षा के प्रश्नों के बीच समानता को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है। यदि जांच में यह साबित होता है कि परीक्षा से पहले वायरल हुआ प्रश्नपत्र वास्तव में असली था, तो यह विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर मामला हो सकता है। दूसरी ओर, जब तक तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रश्नपत्र लीक की बात को आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

यही कारण है कि अब इस मामले में वायरल प्रश्नपत्र की टाइमिंग, व्हाट्सएप संदेशों के स्रोत और वास्तविक प्रश्नपत्र से उसकी समानता की विस्तृत जांच की मांग उठ सकती है। डिजिटल फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि कथित प्रश्नपत्र सबसे पहले किस नंबर या डिवाइस से साझा किया गया और वह किन-किन लोगों तक पहुंचा।

विश्वविद्यालय को अब तक नहीं मिली औपचारिक शिकायत

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी स्थिति यह है कि कथित पेपर लीक को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। ऐसे में विश्वविद्यालय की ओर से मामले की पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सामग्री और परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों को लेकर चल रही चर्चाओं ने परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

छात्रों का कहना है कि यदि किसी प्रश्नपत्र के परीक्षा से पहले वायरल होने की आशंका सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। केवल शिकायत का इंतजार करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन वायरल सामग्री की स्वतः जांच कर सकता है। इससे छात्रों के बीच पैदा हो रही आशंकाओं को दूर करने में मदद मिलेगी और परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास भी बना रहेगा।

एंटोमोलॉजी पेपर लीक के बाद नया मामला

जेनेटिक्स प्रश्नपत्र को लेकर उठे सवाल इसलिए भी ज्यादा गंभीर माने जा रहे हैं क्योंकि इससे पहले IGKV की एंटोमोलॉजी परीक्षा के पेपर लीक मामले ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी थी। उस मामले की पुलिस जांच के बाद छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच में सामने आए तथ्यों ने परीक्षा प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

एंटोमोलॉजी पेपर लीक मामले की जांच के लिए पुलिस ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया था। रायपुर, दुर्ग, कबीरधाम, बिलासपुर और आसपास के अन्य क्षेत्रों में अलग-अलग पुलिस टीमें गठित की गई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को जांच में लगाया गया। पुलिस टीमों ने करीब 36 घंटे तक लगातार तकनीकी और मैदानी स्तर पर जांच की।

मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, संदिग्ध संपर्कों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद पुलिस ने कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा, लेकिन अब जेनेटिक्स प्रश्नपत्र को लेकर सामने आए नए दावों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।

प्रोफेसर पर लगा था पेपर लीक का आरोप

एंटोमोलॉजी पेपर लीक मामले में पुलिस जांच के दौरान योगेश सोनकेसरिया को मुख्य आरोपी बताया गया था। वह वर्ष 2019 से दुर्ग स्थित भारती एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत बताया गया। पुलिस जांच में आरोप था कि परीक्षा प्रश्नपत्रों के सीलबंद पैकेट कॉलेज पहुंचने के बाद कथित तौर पर प्रश्नपत्र की जानकारी हासिल की गई।

पुलिस के अनुसार, सीलबंद लिफाफे की सुरक्षा को प्रभावित किए बिना उसमें मौजूद प्रश्नपत्र की जानकारी लेने का कथित तरीका अपनाया गया था। जांच में यह आरोप सामने आया कि सुई या किसी नुकीले उपकरण की सहायता से लिफाफे में बेहद छोटा छेद किया गया। इसके बाद मोबाइल कैमरे के जरिए प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने और उससे प्रश्नों की जानकारी तैयार कर कुछ छात्रों तक पहुंचाने का आरोप लगा।

इस घटना के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठा था कि केवल सीलबंद लिफाफे या पैकेट पर निर्भर रहना परीक्षा सुरक्षा के लिए पर्याप्त है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्रों की छपाई, पैकिंग, परिवहन, भंडारण और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में डिजिटल और भौतिक सुरक्षा के कई स्तर होने चाहिए।

अब वायरल मैसेज की जांच से खुल सकती है सच्चाई

जेनेटिक्स प्रश्नपत्र के कथित वायरल होने के मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसकी टाइमिंग है। यदि व्हाट्सएप पर प्रसारित सामग्री वास्तव में परीक्षा से कई घंटे पहले भेजी गई थी और उसमें वास्तविक प्रश्नपत्र के प्रश्न मौजूद थे, तो संदेशों के डिजिटल रिकॉर्ड जांच के लिए अहम साक्ष्य बन सकते हैं।

व्हाट्सएप संदेशों के टाइम स्टैम्प, मूल स्रोत, फॉरवर्ड किए गए संदेशों की श्रृंखला और संबंधित मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि सामग्री सबसे पहले कहां से आई। साथ ही वायरल प्रश्नपत्र और परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों की विशेषज्ञ स्तर पर तुलना भी आवश्यक होगी।

जांच एजेंसियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने यह भी चुनौती होगी कि वायरल सामग्री वास्तविक प्रश्नपत्र थी, प्रश्नों का अनुमान था या पहले से तैयार किसी अन्य सामग्री का हिस्सा थी। इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा।

छात्रों में चिंता, परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल

लगातार पेपर लीक की खबरों और आशंकाओं का सबसे ज्यादा असर छात्रों पर पड़ता है। हजारों छात्र लंबे समय तक परीक्षा की तैयारी करते हैं और उम्मीद करते हैं कि सभी अभ्यर्थियों को समान और निष्पक्ष अवसर मिलेगा। जब परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र वायरल होने की खबर सामने आती है तो मेहनत से तैयारी करने वाले छात्रों में निराशा और असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।

ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। जांच से यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो छात्रों की शंकाएं दूर होंगी, जबकि किसी गड़बड़ी की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत होगी।

IGKV के सामने अब परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। एंटोमोलॉजी पेपर लीक मामले के बाद जेनेटिक्स प्रश्नपत्र को लेकर उठे नए सवालों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है कि वायरल सामग्री की गंभीरता से जांच की जाए और वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।

फिलहाल जेनेटिक्स पेपर लीक की आशंका को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन परीक्षा से छह घंटे पहले कथित प्रश्नपत्र वायरल होने के दावे और वास्तविक परीक्षा से उसकी समानता की चर्चा ने इस मामले को गंभीर बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि विश्वविद्यालय या जांच एजेंसियां वायरल सामग्री की जांच कराती हैं या नहीं और जांच में इस कथित पेपर लीक से जुड़ा कोई ठोस सबूत सामने आता है या नहीं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला IGKV की परीक्षा व्यवस्था में एक और बड़ी सेंध साबित हो सकता है।

You Might Also Like

कर्नाटक : अमित शाह बेंगलुरु में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2021 के समापन समारोह में शामिल हुए
वैवाहिक बलात्कार पर गुजरात हाई कोर्ट का अहम फैसला, कोर्ट ने कहा ‘रेप तो रेप है…चाहे पति ने… ’
दिल्ली के मॉडल टाउन में भरभराकर गिरी बिल्डिंग, हादसे में कई लोग दबे
कूटनीति का नया अध्याय: भारत-इजराइल के बीच ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ पर मुहर, रक्षा से लेकर AI तक दिखेगा ‘दोस्ती’ का दम
उत्तराखण्ड : सुशासन दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को किया सम्मानित।
TAGGED:ChhattisgarhIGKVpaper leakRaipur
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड को मिला नया राज्यपाल! डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ली पद एवं गोपनीयता की शपथ, बोले—संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और विकास योजनाओं को गति देना प्राथमिकता

The Hill India News
The Hill India News
October 19, 2026
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा! जयपुर से दिल्ली और फिर नेपाल भागने की थी प्लानिंग, कोटा पुलिस ने 15 मिनट में ट्रेन खंगालकर 3 आरोपियों को दबोचा
गैरसैंण के विकास पर बीजेपी में घमासान! पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी बोले—‘कुंभकर्ण 6 महीने में जागता था, विधायक 5 साल से सोए हैं’; अनिल नौटियाल ने आरोपों पर दिया जवाब
जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को लेकर देश की सियासत गरम, CJP के दो नेता तिहाड़ जेल पहुंचे; राहुल गांधी से केजरीवाल तक ने उठाए सवाल
मध्य प्रदेश के किसान से उत्तराखंड के राजभवन तक! कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन, जानिए विधायक से सांसद और राज्यपाल बनने तक का पूरा सफर
उत्तराखंड में ई-चालान काटना आसान, वसूली बनी बड़ी चुनौती! अब बकाया जुर्माना नहीं भरने वालों की RC, फिटनेस और वाहन ट्रांसफर सेवाओं पर लग सकती है रोक
हरिद्वार में धामी कैबिनेट की ऐतिहासिक बैठक से पहले मां गंगा की शरण में पहुंचे CM धामी और मंत्री, प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना
दिल्ली में INDIA गठबंधन के मार्च से हाई अलर्ट! राजीव चौक समेत 6 मेट्रो स्टेशन बंद, घर से निकलने से पहले जान लें पूरा अपडेट
‘हनुमान अंश’ के बाद कैंची धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब! वीकेंड पर 11 अक्टूबर तक ट्रैफिक प्लान लागू, भारी वाहनों की एंट्री बंद; जानें कहां होगी पार्किंग और किन रास्तों से गुजरेंगे वाहन
कैंसर से जंग लड़ रही महिला पर दोहरी मार! तिलवाड़ा में खुदाई से चार मंजिला मकान पर मंडराया खतरा, बेबस प्रभा सकलानी ने CM धामी से लगाई न्याय की गुहार
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?