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भारत-कनाडा संबंधों में मजबूती के संकेत: NSA अजीत डोवल की ओटावा यात्रा से निकला सुरक्षा का नया फॉर्मूला

The Hill India News
Last updated: February 9, 2026 2:47 am
The Hill India News
Published: February 9, 2026
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ओटावा/नई दिल्ली | भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहे कूटनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल ने 6-7 फरवरी 2026 के दौरान कनाडा की राजधानी ओटावा का महत्वपूर्ण दौरा किया। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच उपजे अविश्वास को खत्म करने और सुरक्षा तंत्र को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है।

Contents
चरमपंथ पर कनाडा का कड़ा रुख: एक रणनीतिक जीतसंपर्क अधिकारियों की नियुक्ति: सूचनाओं का होगा रियल-टाइम साझाकरणड्रग्स और संगठित अपराध के खिलाफ ‘साझा कार्ययोजना’सार्वजनिक सुरक्षा और आव्रजन प्रवर्तन पर चर्चाक्या संबंधों में आएगा सुधार?

डोवल की इस यात्रा का सबसे बड़ा हासिल यह रहा कि कनाडा सरकार ने स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया है कि वह किसी भी प्रकार के हिंसक चरमपंथी समूहों को समर्थन नहीं देगी। यह भारत की उन चिंताओं का सीधा जवाब है, जो लंबे समय से खालिस्तानी उग्रवाद और कनाडा की धरती से संचालित भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर उठती रही हैं।

चरमपंथ पर कनाडा का कड़ा रुख: एक रणनीतिक जीत

7 फरवरी को एनएसए अजीत डोवल ने कनाडा के प्रधानमंत्री की डिप्टी क्लर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नथाली ड्रुइन के साथ गहन चर्चा की। इस बैठक का मुख्य संदेश यह था कि कनाडा सरकार अपनी धरती का इस्तेमाल किसी भी हिंसक एजेंडे के लिए नहीं होने देगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डोवल ने भारत विरोधी तत्वों और आतंकी नेटवर्क के साक्ष्य साझा किए, जिसके बाद कनाडा की ओर से यह आश्वासन आया। यह संदेश न केवल कूटनीतिक है, बल्कि सुरक्षा के मोर्चे पर भारत की बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि अब तक कनाडा पर ‘नरम रुख’ अपनाने के आरोप लगते रहे थे।

संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति: सूचनाओं का होगा रियल-टाइम साझाकरण

इस यात्रा के दौरान एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है—दोनों देश अब एक-दूसरे के यहाँ सुरक्षा एवं कानून-प्रवर्तन संपर्क अधिकारी (Liaison Officers) नियुक्त करेंगे।

  • क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला? अब तक दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों और पुलिस के बीच संचार में काफी देरी होती थी। संपर्क अधिकारियों की तैनाती से जानकारी का आदान-प्रदान ‘रियल-टाइम’ हो सकेगा।

  • त्वरित कार्रवाई: यदि किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलती है, तो बिना किसी कूटनीतिक देरी के सीधे संबंधित एजेंसी को सूचित किया जा सकेगा।

ड्रग्स और संगठित अपराध के खिलाफ ‘साझा कार्ययोजना’

द्विपक्षीय वार्ता में केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि वैश्विक अपराधों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों देशों ने एक साझा कार्ययोजना (Common Action Plan) पर सहमति जताई है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. फेंटानिल तस्करी पर लगाम: कनाडा और भारत ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी, विशेष रूप से ‘फेंटानिल’ के प्रीकर्सर के अवैध व्यापार को रोकने के लिए हाथ मिलाया है।

  2. क्रॉस-बॉर्डर क्राइम: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय संगठित अपराध नेटवर्कों को ध्वस्त करने के लिए दोनों देशों की पुलिस एजेंसियां मिलकर काम करेंगी।

  3. साइबर सुरक्षा: डिजिटल युग में बढ़ते खतरों को देखते हुए साइबर हमलों और डेटा चोरी से जुड़ी सूचनाओं के औपचारिक आदान-प्रदान पर सहमति बनी है।

सार्वजनिक सुरक्षा और आव्रजन प्रवर्तन पर चर्चा

अपनी यात्रा के पहले दिन यानी 6 फरवरी को अजीत डोवल ने कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी अनंदासंगरी से मुलाकात की थी। इस बैठक में उन पेचीदा मामलों पर चर्चा हुई जो अक्सर दोनों देशों के रिश्तों में खटास का कारण बनते हैं, जैसे कि धोखाधड़ी और आव्रजन (Immigration) से जुड़े मुद्दे।

भारत ने कनाडा के समक्ष उन अपराधियों और जालसाजों का मुद्दा उठाया जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए कनाडा में शरण लेते हैं। दोनों पक्षों ने घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का सम्मान करते हुए इन मामलों में आपसी सहयोग जारी रखने का संकल्प दोहराया।

क्या संबंधों में आएगा सुधार?

NSA अजीत डोवल की यह ओटावा यात्रा केवल एक प्रोटोकॉल बैठक नहीं, बल्कि सुरक्षा चिंताओं पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और ‘हार्ड इंटेलिजेंस’ का प्रदर्शन है। नथाली ड्रुइन और गैरी अनंदासंगरी के साथ हुई ये मुलाकातें दर्शाती हैं कि दोनों देश अब विवादों से आगे बढ़कर व्यावहारिक सहयोग (Practical Cooperation) की ओर देख रहे हैं।

यदि यह साझा कार्ययोजना और संपर्क अधिकारियों का फॉर्मूला जमीन पर सफल होता है, तो भविष्य में भारत और कनाडा के बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंध भी फिर से मजबूती पकड़ सकते हैं। फिलहाल, दिल्ली और ओटावा की इस ‘सुरक्षा साझेदारी’ ने दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि आतंकवाद और अपराध के खिलाफ लड़ाई में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।

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