
जयपुर: राजस्थान की राजधानी और ‘गुलाबी नगरी’ जयपुर आज सैन्य पराक्रम और राष्ट्रवाद के रंग में सराबोर रही। आमी डे (थल सेना दिवस) के उपलक्ष्य में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की परेड और शाम को सवाई मानसिंह (SMS) स्टेडियम में आयोजित ‘शौर्य संध्या’ कार्यक्रम ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस गरिमामय अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने न केवल सेना के शौर्य को नमन किया, बल्कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और भारतीय सेना के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ: राजनाथ सिंह
सवाई मानसिंह स्टेडियम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने सीमा पार आतंकवाद और भारत की जवाबी कार्रवाई पर कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि भारत की शांति की खोज को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा:
“मैं राजस्थान की इस वीर प्रसूता धरती से यह घोषणा कर रहा हूं कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। जब तक आतंकवाद की जड़ें और उसे पालने वाली सोच पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, तब तक शांति के लिए हमारे प्रयास और आतंकियों के विरुद्ध हमारा प्रहार लगातार जारी रहेगा।”
रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि इस ऑपरेशन में भारत ने न केवल अपनी सैन्य श्रेष्ठता सिद्ध की, बल्कि अपने राष्ट्रीय चरित्र का भी परिचय दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना ने आतंकियों के विरुद्ध कार्रवाई करते समय मानवीय मूल्यों और संतुलन का ध्यान रखा, जो वैश्विक सैन्य इतिहास में साहस और नैतिकता का एक अनूठा प्रतीक बनेगा।
2047 तक ‘विश्व की सबसे सशक्त सेना’ का लक्ष्य
वैश्विक अस्थिरता और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने सेना के आधुनिकीकरण को अस्तित्व की रक्षा के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि आज पुरानी धारणाएं टूट रही हैं और दुनिया एक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भारत को अपनी रक्षा प्रणालियों को ‘फ्यूचर रेडी’ (भविष्य के लिए तैयार) बनाना होगा।
रक्षा मंत्री ने एक बड़ा विजन साझा करते हुए ऐलान किया कि भारत सरकार 2047 तक भारतीय सेना को दुनिया की सबसे सशक्त और आधुनिक सेना बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। उन्होंने भारतीय सेना को ‘शांति दूत’ बताते हुए कहा कि हमारी शक्ति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को पोषित करती है, किसी को डराने के लिए नहीं।
सेना में नारी शक्ति: बाधाएं और बढ़ते कदम
रक्षा मंत्री ने सेना में लैंगिक समानता और महिलाओं की भागीदारी के संवेदनशील विषय पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि आज भी सेना में महिलाओं को पूर्ण अवसर प्रदान करने में कई पारंपरिक और सांस्कृतिक चुनौतियां मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार इन बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने मील का पत्थर साबित हुए निर्णयों का जिक्र करते हुए कहा कि 2021 से नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के द्वार महिलाओं के लिए खोल दिए गए हैं, जो इस दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत है। भविष्य में कॉम्बैट भूमिकाओं और नेतृत्व के पदों पर महिलाओं की उपस्थिति भारतीय सेना के स्वरूप को और अधिक समावेशी बनाएगी।
जयपुर में शौर्य का प्रदर्शन: सेना और जनता का संगम
आर्मी डे परेड का आयोजन इस बार दिल्ली से बाहर जयपुर में किया गया, जो केंद्र सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों को देश के विभिन्न हिस्सों में ले जाया जा रहा है। परेड के दौरान भारतीय सेना के अत्याधुनिक टैंकों, मिसाइल प्रणालियों और जांबाज सैनिकों के मार्च पास्ट ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शाम को ‘शौर्य संध्या’ के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और युद्ध कौशल के प्रदर्शन ने राजस्थान के नागरिकों में गौरव का संचार किया। इस अवसर पर थल सेना प्रमुख, राज्य के मुख्यमंत्री और सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
संदेश स्पष्ट है
राजनाथ सिंह का जयपुर संबोधन पड़ोसी देशों और वैश्विक मंच के लिए एक स्पष्ट संदेश है—भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। ऑपरेशन सिंदूर की निरंतरता और 2047 का विजन यह दर्शाता है कि भारत अब रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) और आक्रामक रक्षा (Proactive Defense) की नीति पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।



