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रामनगर: रिहाइशी इलाकों में रेंगता काल! वन विभाग ने तीन विशालकाय अजगर और कोबरा का किया सफल रेस्क्यू

मेटा टाइटल: रामनगर में वन विभाग का बड़ा रेस्क्यू: 50 किलो के अजगर और जहरीले कोबरा से मिली मुक्ति मेटा डिस्क्रिप्शन: नैनीताल के रामनगर और बाजपुर में वन विभाग ने भारी भरकम अजगरों और जहरीले कोबरा का सफल रेस्क्यू किया। स्नेक कैचर तालिब हुसैन की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा। पढ़ें पूरी खबर। फोकस कीवर्ड: रामनगर स्नेक रेस्क्यू, वन विभाग रामनगर, अजगर का रेस्क्यू, कोबरा सांप, तालिब हुसैन स्नेक कैचर।


रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले रामनगर वन प्रभाग में पिछले कुछ घंटों से दहशत का माहौल बना हुआ था, जिसे वन विभाग की त्वरित कार्रवाई ने राहत में बदल दिया। तराई पश्चिमी रेंज के बाजपुर और टांडा क्षेत्र में वन्य जीवों की सक्रियता ने ग्रामीणों की नींद उड़ा रखी थी। सोमवार को वन विभाग की टीम ने विशेष अभियान चलाते हुए तीन विशालकाय अजगर (पाइथन) और एक अत्यधिक जहरीले कोबरा सांप को सुरक्षित रेस्क्यू किया है।

आबादी क्षेत्र में ‘शिकारी’ की दस्तक से दहशत

तराई पश्चिमी वन क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ दिनों से सांपों की आवाजाही देखी जा रही थी। विशेष रूप से टांडा और बाजपुर के रिहाइशी इलाकों में विशालकाय सांपों के घुस आने से ग्रामीणों में जान-माल का खतरा बना हुआ था। जैसे ही स्थानीय लोगों ने इन भारी-भरकम अजगरों को देखा, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी गई।

स्नेक कैचर तालिब हुसैन का हैरतअंगेज ऑपरेशन

सूचना मिलते ही विभाग के अनुभवी स्नेक कैचर तालिब हुसैन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। तालिब हुसैन ने अपनी पेशेवर कुशलता का परिचय देते हुए घंटों की मशक्कत के बाद एक-एक कर चारों सांपों को काबू में किया।

पकड़े गए सांपों का विवरण चौंकाने वाला है:

  1. पहला अजगर: वजन लगभग 50 किलोग्राम (अत्यंत विशालकाय)।

  2. दूसरा अजगर: वजन लगभग 40 किलोग्राम।

  3. तीसरा अजगर: वजन लगभग 35 से 40 किलोग्राम के बीच।

  4. कोबरा: एक घातक और जहरीला काला कोबरा।

तालिब हुसैन ने बताया कि तीनों अजगर काफी वजनी और शक्तिशाली थे, जिन्हें काबू करना चुनौतीपूर्ण था। वहीं, कोबरा सांप अपनी फुर्ती और जहर के कारण बेहद खतरनाक साबित हो सकता था। उन्होंने कहा, “ये सभी सांप भोजन की तलाश में भटकते हुए आबादी वाले इलाकों में आ गए थे। समय रहते रेस्क्यू होने से किसी भी अप्रिय घटना को टाल दिया गया।”

प्राकृतिक आवास में मिली सुरक्षित विदाई

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देशों के अनुसार, रेस्क्यू किए गए सभी सांपों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद, इन तीनों अजगरों और कोबरा को उनके प्राकृतिक आवास (घने जंगल) में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। सांपों के पकड़े जाने और जंगल में छोड़े जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है और वन विभाग की मुस्तैदी की सराहना की है।


विशेषज्ञ की राय: क्यों आ रहे हैं सांप आबादी के करीब? वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में बदलाव और शहरीकरण के कारण वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास सिमट रहे हैं। चूहों और छोटे जानवरों के शिकार की तलाश में अक्सर सांप खेतों के रास्ते रिहाइशी बस्तियों तक पहुंच जाते हैं।


वन विभाग की अपील: सतर्क रहें, डरे नहीं

इस घटना के बाद वन विभाग ने आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्य जीव पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें नुकसान न पहुंचाएं।

  • घबराएं नहीं: सांप दिखने पर शोर न मचाएं और न ही उसे पत्थर मारें।

  • दूरी बनाए रखें: सांप से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उसकी निगरानी करें ताकि वह नजरों से ओझल न हो।

  • तत्काल सूचना दें: वन्य जीव दिखने पर तुरंत नजदीकी वन चौकी या अधिकृत रेस्क्यू कर्मियों को फोन करें।

  • स्वयं न पकड़ें: बिना प्रशिक्षण के सांप पकड़ने की कोशिश जानलेवा हो सकती है।

रामनगर और आसपास के क्षेत्र वन संपदा और वन्य जीवों से समृद्ध हैं। ऐसे में इंसानों और वन्य जीवों के बीच संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की खबरें अक्सर आती रहती हैं। लेकिन रामनगर स्नेक रेस्क्यू की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि यदि जनता और प्रशासन के बीच समन्वय हो, तो वन्य जीवों और मानव जीवन दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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