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अधूरी रह गई रजनीकांत और श्री देवी की लव स्टोरी, ‘लेडी सुपरस्टार’ बनने से पहले का किस्सा

दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार Rajinikanth और हिंदी सिनेमा की पहली “लेडी सुपरस्टार” कही जाने वाली Sridevi से जुड़ी एक दिलचस्प और कम सुनी गई प्रेम कहानी आज भी लोगों को हैरान कर देती है। यह कहानी उस दौर की है जब दोनों सितारे अपने करियर के शुरुआती पड़ाव पर थे और फिल्म इंडस्ट्री में तेजी से पहचान बना रहे थे।


जब दिल दे बैठे रजनीकांत, उम्र बनी चर्चा का कारण

यह बात उस समय की है जब रजनीकांत करीब 29 साल के थे और श्रीदेवी महज 16 साल की। हालांकि आज के नजरिए से यह कहानी थोड़ा असहज लग सकती है, लेकिन उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में उम्र के अंतर के बावजूद रिश्तों की चर्चा आम थी।

दिलचस्प बात यह है कि श्रीदेवी ने बहुत छोटी उम्र में ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने बाल कलाकार के रूप में कई फिल्मों में काम किया, यहां तक कि एक फिल्म में उन्होंने कम उम्र में ही रजनीकांत की मां का किरदार भी निभाया था।

फिल्मों के दौरान ही रजनीकांत, श्रीदेवी की मासूमियत, प्रतिभा और स्क्रीन प्रेजेंस से बेहद प्रभावित हो गए। धीरे-धीरे यह पसंद प्यार में बदल गई। बताया जाता है कि रजनीकांत ने मन ही मन श्रीदेवी को अपनी जीवनसाथी बनाने का फैसला कर लिया था।


प्रपोजल का प्लान और “अपशकुन” की कहानी

इस प्रेम कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह है जब रजनीकांत ने अपने प्यार का इजहार करने की ठानी। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक K. Balachander, जो रजनीकांत के मेंटर भी माने जाते हैं, उनके अनुसार रजनीकांत ने श्रीदेवी के घर जाकर उनकी मां से शादी की बात करने का फैसला किया था।

इसके लिए एक खास मौका चुना गया—श्रीदेवी के नए घर का गृह प्रवेश। यह एक ऐसा अवसर था जब परिवार के लोग मौजूद थे और बात करने का सही माहौल भी बन सकता था।

रजनीकांत अपने गुरु के. बालाचंदर के साथ वहां पहुंचे। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन तभी अचानक बिजली चली गई। उस समय रजनीकांत ने इसे एक अपशकुन (bad omen) के रूप में लिया।

उनका मानना था कि यह संकेत ठीक नहीं है, और शायद यह रिश्ता आगे नहीं बढ़ना चाहिए। यही सोचकर उन्होंने बिना किसी से अपनी दिल की बात कहे वहां से लौटने का फैसला किया।

इस घटना के बाद उन्होंने कभी भी श्रीदेवी के सामने अपने प्यार का इजहार नहीं किया। यह एक ऐसा मोड़ था जहां से यह प्रेम कहानी शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई।


अधूरी रह गई प्रेम कहानी, अलग-अलग रास्तों पर चले दोनों सितारे

इस घटना के बाद दोनों कलाकारों ने अपने-अपने करियर पर ध्यान केंद्रित किया और फिल्म इंडस्ट्री में नई ऊंचाइयों को छुआ।

रजनीकांत ने साउथ सिनेमा में सुपरस्टार का दर्जा हासिल किया और उनकी फैन फॉलोइंग देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में फैल गई। वहीं श्रीदेवी ने हिंदी सिनेमा में अपनी अदाकारी का ऐसा जादू चलाया कि उन्हें “लेडी सुपरस्टार” का खिताब मिला।

श्रीदेवी ने बाद में फिल्म निर्माता बोनी कपूर से शादी की, जबकि रजनीकांत ने लता रजनीकांत से विवाह किया। दोनों ने अपनी-अपनी जिंदगी में सफलता और खुशियां हासिल कीं, लेकिन यह अधूरी प्रेम कहानी आज भी फैंस के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है।

यह कहानी सिर्फ एक प्रेम प्रसंग नहीं, बल्कि उस दौर की सोच, विश्वास और भावनाओं को भी दर्शाती है। एक छोटी सी घटना—जैसे बिजली चले जाना—ने एक संभावित रिश्ते को जन्म लेने से पहले ही खत्म कर दिया।

आज जब लोग इस किस्से को सुनते हैं, तो यह सवाल जरूर उठता है कि अगर उस दिन बिजली न गई होती, तो शायद बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री की सबसे चर्चित जोड़ी बन सकती थी।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, और यही वजह है कि यह कहानी हमेशा “क्या होता अगर…” वाले सवाल के साथ अधूरी रह गई।

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