
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हाल ही में हुए रैगिंग के मामले की गूँज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि जूनियर छात्रों के उत्पीड़न का एक और गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस बार 2025 बैच के एमबीबीएस छात्रों ने अपने ही एक सीनियर पर डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। विशेष बात यह है कि छात्रों ने कॉलेज स्तर पर शिकायत करने के बजाय सीधे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) का दरवाजा खटखटाया है।
NMC के मेल से कॉलेज प्रशासन में हड़कंप
जानकारी के अनुसार, एमबीबीएस 2025 बैच के छात्रों ने आरोप लगाया है कि 2023 बैच का एक सीनियर छात्र उन्हें लंबे समय से धमका रहा था और परेशान कर रहा था। जब छात्रों को स्थानीय स्तर पर राहत की उम्मीद कम दिखी, तो उन्होंने मामले की ऑनलाइन शिकायत राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को भेज दी।
एनएमसी ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन को ईमेल भेजकर तत्काल जांच करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। आयोग के सख्त रुख के बाद कॉलेज प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में मामले की जांच एंटी रैगिंग सेल को सौंप दी गई।
आरोपी छात्र हॉस्टल से निष्कासित, 36 घंटे में मांगी रिपोर्ट
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने प्राथमिक कार्रवाई सुनिश्चित की है। दून मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग के प्रमुख डॉ. सुशील ओझा ने मीडिया को बताया कि 2025 बैच के छात्रों की शिकायत के आधार पर आरोपी सीनियर छात्र को तत्काल प्रभाव से हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है।
डॉ. ओझा ने स्पष्ट किया कि “छात्र को हॉस्टल से इसलिए निकाला गया है ताकि वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके और गवाहों (जूनियर छात्रों) पर दबाव न बना सके।” कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी इस मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है। माना जा रहा है कि अगले 36 घंटों के भीतर कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप देगी, जिसके आधार पर छात्र के भविष्य और उसके निलंबन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
देरी से शुरू हुई जांच पर उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक, जूनियर छात्रों के उत्पीड़न की यह घटना 12 या 13 जनवरी के आसपास की बताई जा रही है। सवाल यह उठ रहे हैं कि कॉलेज प्रशासन को इसकी भनक तब क्यों लगी जब दिल्ली स्थित एनएमसी ने हस्तक्षेप किया। एनएमसी के हस्तक्षेप के बाद ही कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने कमेटी को मामले की त्वरित जांच के आदेश दिए।
मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के खिलाफ कड़े नियम:
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यूजीसी और एनएमसी गाइडलाइंस: रैगिंग को एक दंडनीय अपराध माना गया है, जिसमें छात्र का निष्कासन और आपराधिक मामला दर्ज करने का प्रावधान है।
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एंटी रैगिंग हेल्पलाइन: प्रत्येक संस्थान में 24×7 सक्रिय एंटी रैगिंग सेल होना अनिवार्य है।
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शपथ पत्र: प्रवेश के समय छात्रों और अभिभावकों से रैगिंग न करने का कानूनी शपथ पत्र लिया जाता है।
अभिभावकों और छात्रों में चिंता का माहौल
दून मेडिकल कॉलेज में बार-बार सामने आ रहे रैगिंग और उत्पीड़न के मामलों ने दूर-दराज से आए छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल शिक्षा के दबाव के बीच इस तरह की घटनाएं छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती हैं। प्रशासन का कहना है कि वे कैंपस में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहे हैं और रिपोर्ट आने के बाद कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दून मेडिकल कॉलेज का यह प्रकरण एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और छात्रों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाता है। क्या केवल हॉस्टल से निष्कासन काफी है, या फिर ऐसे मामलों में मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई की जरूरत है? फिलहाल, सबकी नजरें एंटी रैगिंग सेल की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं जो आरोपी छात्र का भविष्य तय करेगी।



