
देहरादून, 22 जनवरी 2026। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के ऐतिहासिक कानून को धरातल पर उतारने और इसे आमजन के लिए सरल व सुगम बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। गुरुवार को ऋषिपर्णा सभागार कलेक्टेरेट में जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में अधिवक्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों के साथ यूसीसी के प्रभावी परिपालन पर गहन चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की प्राथमिकता समान नागरिक संहिता (UCC) को एक ऐसे ढांचे के रूप में लागू करने की है, जिससे समाज के हर वर्ग को समानता और पारदर्शिता का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके।
संवाद से समाधान: अधिवक्ताओं के अनुभवों को दी प्राथमिकता
बैठक के दौरान जनपद के विभिन्न न्यायालयों से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने यूसीसी के व्यावहारिक पहलुओं, पंजीकरण प्रक्रियाओं और कानूनी बारीकियों पर अपने अनुभव साझा किए। जिलाधिकारी सविन बंसल ने अधिवक्ताओं के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि अधिवक्ता समाज और न्याय व्यवस्था के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी हैं, इसलिए उनके व्यावहारिक अनुभव यूसीसी के सफल क्रियान्वयन में नींव का पत्थर साबित होंगे।
जिलाधिकारी ने कहा, “उत्तराखंड समान नागरिक संहिता एक प्रगतिशील और सुधारात्मक कदम है। इसे लागू करने में किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा न आए, इसके लिए हम सभी हितधारकों (Stakeholders) से निरंतर संवाद कर रहे हैं।”
विस्तृत रिपोर्ट भेजेगा जिला प्रशासन: जन सेवा केंद्रों की भूमिका पर जोर
बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को एक महत्वपूर्ण टास्क सौंपा है। उन्होंने निर्देश दिए कि:
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सुझावों का संयोजन: अधिवक्ताओं, जन सेवा केंद्रों (CSCs), रजिस्ट्रियों और आम जनता से प्राप्त फीडबैक को संकलित किया जाए।
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शासन को रिपोर्ट: इन सुझावों के आधार पर एक विस्तृत और व्यावहारिक रिपोर्ट तैयार कर शासन स्तर पर प्रेषित की जाए, ताकि यदि नियमावली में किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो, तो उसे समय रहते पूरा किया जा सके।
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सुगम प्रक्रिया: यूसीसी के तहत होने वाले पंजीकरणों (विवाह, लिव-इन आदि) को जन सेवा केंद्रों के माध्यम से इतना सरल बनाया जाए कि आम नागरिक को भटकना न पड़े।
अधिवक्ताओं ने सराही संवाद की पहल
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल सहित अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया। अधिवक्ताओं का मानना है कि कानून के लागू होने के शुरुआती चरणों में कई व्यावहारिक चुनौतियां आती हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं को विश्वास में लेना और उनके कानूनी सुझावों को महत्व देना यह दर्शाता है कि सरकार इस कानून को ‘जन-मित्र’ (People-Friendly) बनाने के लिए गंभीर है।
बैठक में उपस्थित समिति के सदस्यों और कानूनी विशेषज्ञों ने उत्तराधिकार, गोद लेने की प्रक्रिया और विवाह पंजीकरण जैसे विषयों पर अपनी राय रखी।
प्रशासनिक सतर्कता और आगामी रोडमैप
जिलाधिकारी ने बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि भविष्य में भी समय-समय पर हितधारकों के साथ ऐसी बैठकें आयोजित की जाएं। प्रशासन का लक्ष्य है कि यूसीसी केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका लाभ राज्य के हर नागरिक को सुचारू रूप से प्राप्त हो।
इसके लिए रजिस्ट्री कार्यालयों और जन सेवा केंद्रों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करने और डिजिटल ढांचे को मजबूत करने पर भी चर्चा की गई।
बैठक में मौजूद प्रमुख व्यक्तित्व
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रशासन और न्याय जगत की कई हस्तियां शामिल रहीं, जिनमें प्रमुख रूप से:
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बंसीधर तिवारी: महानिदेशक सूचना
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अभिनव शाह: मुख्य विकास अधिकारी
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मनमोहन कंडवाल: अध्यक्ष बार एसोसिएशन
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समिति सदस्य: प्रेमचन्द्र शर्मा, आरएस राघव, धर्मवीर सिंह नेगी, संजय बिष्ट।
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प्रशासनिक अधिकारी: सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह, उप जिलाधिकारी हरिगिरि।
सुगम न्याय की दिशा में बढ़ते कदम
देहरादून जिला प्रशासन की यह कवायद यह सुनिश्चित करती है कि उत्तराखंड में यूसीसी का कार्यान्वयन किसी जटिल प्रक्रिया के बजाय एक सुगम व्यवस्था के रूप में स्थापित होगा। जिलाधिकारी सविन बंसल का यह दृष्टिकोण कि “सुझावों के संयोजन से ही सर्वश्रेष्ठ क्रियान्वयन संभव है”, आने वाले समय में राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।



