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उत्तराखण्ड: डोईवाला में भूमि विवाद पर सियासी घमासान, विधायक की भूमिका पर उठे सवाल, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को लेकर बढ़ा विवाद

देहरादून : डोईवाला क्षेत्र में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर सियासत तेज हो गई है। परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने डोईवाला विधायक बृज भूषण गैरोला पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी कार्यशैली और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जब एक विधायक को अपने ही क्षेत्र में विश्वविद्यालय के लिए आवंटित भूमि की जानकारी नहीं है, तो यह उनके कर्तव्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।

मोहित उनियाल ने हाल ही में हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताया कि विधायक बृज भूषण गैरोला स्वयं मौके पर पहुंचे और ऋषिकेश के उपजिलाधिकारी से जमीन से संबंधित जानकारी मांगते नजर आए। इस पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि एक जनप्रतिनिधि को अपने क्षेत्र में होने वाले महत्वपूर्ण फैसलों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि फरवरी माह में ही रेशम विभाग की भूमि का आवंटन सिंचाई विभाग को किया जा चुका था। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या विधायक इस फैसले से पूरी तरह अनजान थे या फिर उन्होंने जानबूझकर इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। अगर वे अनजान थे, तो यह उनकी निष्क्रियता को दर्शाता है, और यदि जानकारी होने के बावजूद उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया, तो यह जनता के हितों के साथ अन्याय है।

कांग्रेस नेता ने प्रदेश की भाजपा सरकार को भी इस मुद्दे पर घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, और यदि किसी महत्वपूर्ण परियोजना पर निर्णय लेते समय क्षेत्रीय विधायक की सहमति या जानकारी नहीं ली जाती, तो यह सरकार और विधायक दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि विधायक की भूमिका कमजोर और प्रभावहीन है।

मोहित उनियाल ने विधायक द्वारा हाल ही में मुख्यमंत्री से की गई मुलाकात को भी महज दिखावा बताया। उन्होंने कहा कि यदि यह कदम दो महीने पहले उठाया गया होता, तो आज क्षेत्र को इस विवाद का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जब मामला तूल पकड़ चुका है, तब विधायक सक्रियता दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, जो केवल राजनीतिक दिखावा है।

इस पूरे मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को पहले से निर्धारित स्थान—भट्ट नगरी, लिस्ट्राबाद और रानीपोखरी—में ही स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि यही वह स्थान हैं जहां पहले भूमि आवंटित की गई थी और वहां विश्वविद्यालय स्थापित करने से क्षेत्रीय जनता को वास्तविक लाभ मिलेगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाते हैं, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी।

डोईवाला में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को लेकर चल रहा यह विवाद अब केवल भूमि आवंटन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी बड़ा सवाल बन चुका है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप निर्णय लिया जाता है।

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