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वृंदावन नाव हादसे में पीएम मोदी और सीएम योगी ने जताया गहरा शोक, मुआवजे का किया ऐलान

मथुरा (वृंदावन): कान्हा की नगरी वृंदावन में शुक्रवार का दिन अमंगल साबित हुआ। भक्ति के भाव में डूबे श्रद्धालुओं के लिए यमुना की लहरें काल बन गईं। वृंदावन के प्रसिद्ध केसी घाट के समीप एक भीषण वृंदावन नाव हादसा घटित हुआ, जिसमें 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ितों के लिए बड़ी राहत राशि का ऐलान किया है।

भक्ति का सफर, त्रासदी में बदला

जानकारी के अनुसार, पंजाब के लुधियाना से लगभग 132 श्रद्धालुओं का एक जत्था ठाकुर बांके बिहारी के दर्शन और यमुना पूजन के लिए वृंदावन आया था। शुक्रवार को जब श्रद्धालु नाव में सवार होकर यमुना की सैर कर रहे थे, तभी कुदरत का कहर टूट पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक चली तेज हवाओं के कारण नाव असंतुलित होकर डगमगाने लगी। लहरों के थपेड़ों के बीच नाविक का नियंत्रण छूटा और नाव सीधे नदी के बीच स्थित एक लोहे के पोंटून (पीपा पुल का हिस्सा) से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि नाव पल भर में पलट गई और उसमें सवार लोग गहरे पानी में समा गए।

जिंदगी और मौत के बीच का संघर्ष: वायरल वीडियो ने दहलाया दिल

हादसे का एक विचलित करने वाला वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग जान बचाने के लिए यमुना की लहरों से जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में स्थानीय गोताखोर और अन्य नाविकों को अपनी जान जोखिम में डालकर डूबते हुए लोगों को बचाते देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों की मुस्तैदी के कारण कई लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, अन्यथा मृतकों का आंकड़ा और भी भयावह हो सकता था।

पीएम मोदी ने किया मुआवजे का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वृंदावन नाव हादसे पर गहरा शोक प्रकट किया है। उन्होंने सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में केंद्र सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

प्रशासनिक मुस्तैदी और डीएम का बयान

घटना की सूचना मिलते ही मथुरा के जिलाधिकारी (डीएम) सीपी सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। राहत कार्यों की निगरानी करते हुए डीएम सीपी सिंह ने बताया, “लुधियाना से आए 132 लोगों की सूची का मिलान किया जा रहा है। दुर्भाग्यवश, अब तक 10 लोगों के शव बरामद हुए हैं। कुछ लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनके लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। सुरक्षित बचे लोग खतरे से बाहर हैं और प्रशासन मृतकों के पार्थिव शरीरों को उनके पैतृक निवास तक पहुँचाने की पूरी जिम्मेदारी उठा रहा है।”

हादसे की मुख्य वजह: पीपा पुल का अधूरा हिस्सा

प्रारंभिक जांच में हादसे का मुख्य कारण प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी चूक को माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि जलस्तर बढ़ने के कारण हाल ही में यमुना पर बने अस्थायी पीपा पुल को हटाया गया था। लेकिन प्रशासन ने पुल के कुछ भारी पोंटूनों (लोहे के ड्रम) को नदी के बीच में ही खुला छोड़ दिया था। तेज हवा के कारण नाव इन्हीं पोंटूनों से टकराई और पलट गई। विशेषज्ञ अब यह सवाल उठा रहे हैं कि जब नदी में जलस्तर बढ़ रहा था और पोंटून खुले थे, तो नौका संचालन की अनुमति क्यों दी गई?

मुख्यमंत्री योगी ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे का तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए। सीएम योगी ने कहा कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए और नियमानुसार उन्हें तत्काल अनुग्रह राशि प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने मृतकों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।

पसरा मातम: अपनों की तलाश में परिजन

हादसे की खबर मिलते ही लुधियाना और मथुरा में मृतकों के परिजनों के बीच कोहराम मच गया। केसी घाट पर चारों ओर चीख-पुकार और अपनों को खोने का गम साफ देखा जा सकता है। कई परिवारों के लिए यह तीर्थ यात्रा उम्र भर का न भूलने वाला जख्म दे गई।

वृंदावन का यह नाव हादसा सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक ज्वलंत उदाहरण है। तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए नावों की क्षमता, लाइफ जैकेट की उपलब्धता और नदी में मौजूद बाधाओं को हटाना अनिवार्य है। प्रशासन को भविष्य में ऐसे वृंदावन नाव हादसे को रोकने के लिए कड़े प्रोटोकॉल लागू करने होंगे, ताकि यमुना की लहरें फिर कभी किसी श्रद्धालु के लिए ‘काल’ न बनें।

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