
महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे पाकिस्तान में आखिरकार सरकार को जनता के दबाव के आगे झुकना पड़ा। देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और जनाक्रोश के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेट्रोल की कीमतों में 80 रुपये प्रति लीटर की बड़ी कटौती का ऐलान किया। यह घोषणा राष्ट्र के नाम संबोधन में की गई, जिसे तुरंत लागू करने का निर्णय लिया गया।
नई कीमतों के अनुसार अब पेट्रोल 378 रुपये प्रति लीटर मिलेगा, जिससे आम जनता को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश पहले से ही आर्थिक संकट और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता का सामना कर रहा है।
पहले बढ़ाए दाम, फिर घटाए — क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 2 अप्रैल की रात पाकिस्तान सरकार ने ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की थी। पेट्रोल की कीमत में लगभग 43 प्रतिशत और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में करीब 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी।
स्थानीय मीडिया और डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल की कीमत 321.17 रुपये से बढ़ाकर 458.41 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थी। वहीं डीजल 335.86 रुपये से बढ़कर 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था।
इस अचानक बढ़ोतरी से आम जनता में भारी नाराजगी फैल गई। ट्रांसपोर्ट सेक्टर, व्यापारी वर्ग और मध्यम वर्ग के लोगों पर इसका सीधा असर पड़ा। बढ़ती लागत के कारण खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ने लगे, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
इसी जनदबाव और लगातार हो रहे प्रदर्शनों के चलते सरकार को अपने फैसले में बदलाव करना पड़ा और पेट्रोल के दाम घटाने पड़े।
पेट्रोल सस्ता, लेकिन डीजल अब भी महंगा
सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में राहत दी है, लेकिन डीजल की कीमतें अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। वर्तमान में डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर पर ही है, जो परिवहन और माल ढुलाई के लिए बड़ा झटका है।
सरकार का तर्क है कि पेट्रोल पर लेवी (टैक्स) दरों में बदलाव करके डीजल की कीमतों के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश की गई है। पेट्रोल पर टैक्स 105 रुपये से बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर टैक्स को 55 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अस्थायी राहत तो दे सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह आर्थिक संतुलन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। क्योंकि डीजल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ाती हैं और सप्लाई चेन को प्रभावित करती हैं।
ईरान-इजरायल तनाव और आर्थिक दबाव का असर
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, खासकर ईरान-इजरायल संघर्ष का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। तेल आपूर्ति में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव ने देश की स्थिति को और कठिन बना दिया है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने पहले वर्क फ्रॉम होम और चार दिन का वर्क वीक जैसे कदम भी लागू किए थे, ताकि ईंधन की खपत कम हो सके। लेकिन इसके बावजूद हालात में ज्यादा सुधार नहीं हुआ।
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने पहले कहा था कि कीमतों में बढ़ोतरी “कठिन लेकिन जरूरी फैसला” था, जिसे देश की आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया। हालांकि, जनता के गुस्से के बाद सरकार को अपने फैसले में बदलाव करना पड़ा।
अब सवाल यह है कि क्या यह राहत स्थायी होगी या फिर आने वाले समय में कीमतों में फिर बदलाव देखने को मिलेगा। फिलहाल, सरकार के इस कदम से जनता को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन आर्थिक चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं।



