नई दिल्ली | संसद के बजट सत्र का आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। कई दिनों से जारी गतिरोध और तीखी नोकझोंक के बाद आज लोकसभा में माहौल न केवल अहम है, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील भी है। विपक्षी खेमे से आ रही खबरों के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज दोपहर करीब 12 बजे बजट 2026-27 पर सामान्य चर्चा के दौरान अपना पक्ष रखेंगे। लेकिन यह केवल एक सामान्य भाषण नहीं होगा; इसके पीछे छिपी है सरकार को अंतरराष्ट्रीय संधियों और संसदीय गरिमा के मुद्दे पर घेरने की एक सोची-समझी रणनीति।
राहुल गांधी का प्रहार: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर टिकी निगाहें
सूत्रों का दावा है कि राहुल गांधी के आज के संबोधन का मुख्य केंद्र ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील’ होने वाला है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस डील की बारीकियों को देश से साझा करने में हिचकिचा रही है। राहुल गांधी अपने भाषण में इस व्यापारिक समझौते के आर्थिक और रणनीतिक पहलुओं पर सवाल उठा सकते हैं।
याद रहे कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी के भाषण ने जो सियासी बवंडर पैदा किया था, उसका असर कल जाकर शांत हुआ है। अब जबकि सदन में बोलने का रास्ता साफ हो गया है, राहुल गांधी बजट चर्चा के माध्यम से मध्यम वर्ग, किसानों और डेटा सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में हैं।
स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: एक बड़ी चाल
संसदीय इतिहास में ऐसा कम ही देखने को मिलता है जब विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दे। कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर अपनी आक्रामक रणनीति का परिचय दिया है।
इस नोटिस के पीछे की कहानी भी काफी दिलचस्प रही। बताया जा रहा है कि जयराम रमेश द्वारा तैयार किए गए मूल ड्राफ्ट में कुछ तकनीकी और तारीख की गलतियां थीं, जिन्हें सुधारने के बाद दोबारा पेश किया गया। हालांकि, यहाँ कांग्रेस ने एक गहरी ‘संसदीय मर्यादा’ का परिचय दिया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। यह ठीक वैसा ही है जैसा राज्यसभा में जगदीप धनखड़ के खिलाफ प्रस्ताव के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी ने किया था।
महाराष्ट्र की सियासत का दिल्ली कनेक्शन: सुनेत्रा पवार का इस्तीफा
संसद की सरगर्मी के बीच महाराष्ट्र की राजनीति से भी एक बड़ी खबर आ रही है। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार आज अपने पद से इस्तीफा दे सकती हैं। इस्तीफे से पहले उनका दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का कार्यक्रम है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह इस्तीफा राज्य की राजनीति में किसी बड़े फेरबदल या भविष्य की नई भूमिका की ओर इशारा कर रहा है।
आज का संसदीय एजेंडा: क्या होगा खास?
लोकसभा की आज की कार्यसूची में सबसे ऊपर बजट 2026-27 पर सामान्य चर्चा है।
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दोपहर 12:00 बजे: राहुल गांधी के संबोधन की संभावना।
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शून्यकाल: विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा।
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सरकारी विधेयक: कुछ महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को भी सूचीबद्ध किया गया है।
संसद में गतिरोध के अंत और नई चुनौती का संकेत
पिछले कई दिनों से सदन की कार्यवाही बाधित हो रही थी। कल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक मौन सहमति बनने के बाद गतिरोध खत्म हुआ। लेकिन ‘अविश्वास प्रस्ताव’ के नोटिस ने फिर से तलवारें खींच दी हैं। विपक्ष का तर्क है कि सदन में उनकी आवाज को दबाया जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे संसदीय प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश बता रहा है।
आज की कार्यवाही क्यों है निर्णायक?
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बजट की धार: क्या विपक्ष बजट के आंकड़ों में सरकार को उलझा पाएगा?
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ट्रेड डील का रहस्य: क्या राहुल गांधी भारत-अमेरिका डील पर कोई बड़ा खुलासा करेंगे?
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स्पीकर की कुर्सी: अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर सदन का अगला कदम क्या होगा?
लोकतंत्र के मंदिर में महामंथन
बजट सत्र 2026 केवल अंकों और आवंटन का खेल नहीं रह गया है, बल्कि यह 2029 की ओर बढ़ती राजनीति का एक लिटमस टेस्ट भी है। राहुल गांधी के नेतृत्व में एकजुट होता विपक्ष और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास का रोडमैप पेश करती सरकार—आज इन दोनों का टकराव देश के सामने होगा।
दोपहर 12 बजे का वक्त केवल संसद के लिए ही नहीं, बल्कि टीवी स्क्रीन पर नजरें गड़ाए आम आदमी के लिए भी अहम है, जो यह जानना चाहता है कि उसके भविष्य के बजट पर देश के सबसे बड़े नेता क्या राय रखते हैं।



