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पाकिस्तान तेल और गैस संकट: पेट्रोल ₹458 और डीजल ₹520 के पार, युद्ध के साये में महंगाई की मार

इस्लामाबाद/नई दिल्ली। कंगाली की कगार पर खड़े पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की अवाम के लिए गुरुवार की रात किसी कयामत से कम नहीं रही। अमेरिका-ईरान के बीच छिड़ी जंग की तपिश अब पाकिस्तान के चूल्हों तक पहुँच गई है। वैश्विक तेल संकट और चरमराती अर्थव्यवस्था के बीच शहबाज शरीफ सरकार ने जनता को अब तक का सबसे बड़ा ‘झटका’ देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि कर दी है। इस घोषणा के साथ ही पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें उस स्तर पर पहुँच गई हैं, जिसकी कल्पना करना भी आम नागरिक के लिए डरावना है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ‘महा-विस्फोट’

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने गुरुवार, 2 अप्रैल को एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में नई कीमतों का ऐलान किया। सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, पेट्रोल की कीमतों में 137.24 रुपए की भारी भरकम बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 458.4 रुपये हो गई है।

लेकिन असली चोट हाई-स्पीड डीजल (HSD) पर पड़ी है। डीजल की कीमतों में 184.49 रुपये का इजाफा किया गया है, जिससे इसकी नई कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गई है। इतना ही नहीं, गरीब तबके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले केरोसीन (मिट्टी का तेल) को भी नहीं बख्शा गया है और इसकी कीमत अब 457.80 रुपये प्रति लीटर होगी।

Pakistan Petrol Price Hike: बेबस हुई शहबाज सरकार, वादों से पलटे पीएम

हैरानी की बात यह है कि महज एक सप्ताह पहले तक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जनता को यह भरोसा दिला रहे थे कि वे महंगाई का बोझ अवाम पर नहीं डालेंगे। डॉन (Dawn) की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम शरीफ ने पिछले दिनों तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की तीन अलग-अलग सिफारिशों को खारिज करने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि वे जनता की तकलीफों को समझते हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उछाल के बावजूद देश के भीतर दाम नहीं बढ़ने देंगे।

लेकिन 2 अप्रैल की रात आते-आते शहबाज सरकार के सारे दावे और वादे ‘कागजी’ साबित हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध (जो 28 फरवरी से शुरू हुआ) ने वैश्विक तेल सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। पाकिस्तान, जो पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आईएमएफ (IMF) की कड़ी शर्तों से जूझ रहा है, अब इस वैश्विक संकट के सामने पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है।

युद्ध का असर: 6 मार्च से अब तक कीमतों का सफर

यह पहली बार नहीं है जब युद्ध के बाद पाकिस्तान में तेल के दाम बढ़े हैं। 28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद से ही पाकिस्तान में ईंधन का अकाल पड़ा हुआ है।

  • 6 मार्च: सरकार ने शुरुआती झटके के तौर पर पेट्रोल-डीजल में 55 रुपये की बढ़ोतरी की थी।

  • मार्च का मध्य: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद पाकिस्तान में हाहाकार मच गया।

  • 2 अप्रैल: अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि कर सरकार ने जनता की कमर तोड़ दी है।

महंगाई की ‘चेन रिएक्शन’ से कांपेगा पाकिस्तान

Pakistan Petrol Price Hike का असर केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। पाकिस्तान जैसे देश में, जहाँ कृषि और माल ढुलाई पूरी तरह डीजल पर निर्भर है, वहां डीजल का 520 रुपये के पार जाना तबाही का संकेत है।

  1. खाद्य संकट: डीजल महंगा होने से ट्रैक्टरों का खर्च और ट्रकों का किराया दोगुना हो जाएगा, जिससे आटा, दाल और सब्जियों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।

  2. बिजली का संकट: पाकिस्तान में बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा तेल से चलने वाले पावर प्लांटों पर निर्भर है, जिससे अब बिजली के बिलों में भी भारी बढ़ोतरी तय है।

  3. सार्वजनिक परिवहन: बसों और टैक्सियों का किराया बढ़ने से आम आदमी का घर से निकलना मुहाल हो जाएगा।

जनता में भारी आक्रोश, सड़कों पर उतरने की तैयारी

इस्लामाबाद, कराची और लाहौर जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर रात से ही भारी भीड़ देखी गई। लोग नई कीमतें लागू होने से पहले अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने की जद्दोजहद में जुटे रहे। सोशल मीडिया पर लोग शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को भुनाने में जुट गए हैं और देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि अमेरिका-ईरान युद्ध लंबा खिंचता है, तो पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें 600 रुपये प्रति लीटर तक भी जा सकती हैं। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण पाकिस्तान तेल के आयात का भुगतान नहीं कर पा रहा है और मित्र देशों से मिलने वाली मदद भी अब ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। Pakistan Petrol Price Hike केवल एक आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा है। अब देखना यह होगा कि पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता झेल रहा यह मुल्क इस ‘आर्थिक सुनामी’ का सामना कैसे करता है।

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