
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने सांगठनिक ढांचे में एक बड़े पीढ़ीगत बदलाव का संकेत देते हुए नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली है। सोमवार को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित इस शक्ति प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के दिग्गज—गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे।
निर्वाचन अधिकारी के. लक्ष्मण के अनुसार, नबीन के समर्थन में कुल 37 नामांकन पत्र दाखिल किए गए हैं, जिससे अब यह साफ हो गया है कि 45 वर्षीय नितिन नबीन निर्विरोध भाजपा के 12वें और सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाएंगे।
नितिन नबीन: एक ‘सरप्राइज’ से ‘शीर्ष’ तक का सफर
नितिन नबीन को अध्यक्ष बनाना भाजपा आलाकमान का एक ऐसा चौंकाने वाला फैसला है, जिसने पार्टी के भीतर और बाहर सबको हैरान कर दिया। बिहार से आने वाले नबीन भाजपा के पहले कायस्थ अध्यक्ष होंगे। पांच बार के विधायक रहे नबीन की कार्यक्षमता का लोहा पार्टी ने तब माना जब उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में संगठन को नई ऊर्जा दी।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में दिखी, जहां उन्हें सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। नबीन के सटीक चुनाव प्रबंधन और जमीनी रणनीति की बदौलत ही भाजपा वहां कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में कामयाब रही। इसी ‘रिवॉर्ड’ के तौर पर उन्हें दिसंबर में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया और अब वे पूर्णकालिक कमान संभालने के लिए तैयार हैं।
मिशन 2026: पांच राज्यों की परीक्षा
नितिन नबीन का पदभार संभालते ही पहला इम्तिहान पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम के आगामी विधानसभा चुनावों में होगा।
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बंगाल और दक्षिण की चुनौती: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा आज तक अपनी सरकार नहीं बना सकी है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के विजय रथ को रोकना और तमिलनाडु में द्रमुक-अन्नाद्रमुक के बीच अपनी जगह बनाना नबीन के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ जैसा होगा।
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असम में सत्ता बरकरार रखना: असम में कांग्रेस ने आठ दलों का गठबंधन बनाकर भाजपा के लिए तीसरी पारी की राह मुश्किल कर दी है। यहां नबीन का लक्ष्य 126 में से 100 सीटें जीतने का है।
महिला आरक्षण और परिसीमन: बदली हुई राजनीति का नया चेहरा
नबीन का कार्यकाल इसलिए भी ऐतिहासिक होगा क्योंकि उनके नेतृत्व में ही देश नए परिसीमन और महिला आरक्षण (33%) के दौर में प्रवेश करेगा। जनगणना के बाद जब लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बदलेगी, तो टिकट वितरण से लेकर सोशल इंजीनियरिंग तक भाजपा को बिल्कुल नई रणनीति अपनानी होगी। महिलाओं की राजनीति में बढ़ती भागीदारी को भाजपा के पक्ष में मोडना नबीन के लिए अनिवार्य होगा।
2029 की तैयारी और ‘यूपी’ का कांटा
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के ‘400 पार’ के नारे को उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले ने तगड़ा झटका दिया था। नबीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूपी में खोई हुई जमीन वापस पाना और सपा के इस जातीय समीकरण की काट ढूंढना है। 2029 का लोकसभा चुनाव नए परिसीमन और महिला आरक्षण के साथ होगा, ऐसे में नबीन को पार्टी को गठबंधन की मजबूरियों से बाहर निकाल कर फिर से पूर्ण बहुमत के ‘मैजिक फिगर’ तक ले जाने का रोडमैप तैयार करना होगा।
जाति जनगणना की काट तलाशना
विपक्ष द्वारा लगातार उठाई जा रही जाति जनगणना की मांग भाजपा के हिंदुत्व कार्ड के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बिहार से ताल्लुक रखने वाले नितिन नबीन इस मुद्दे की गंभीरता को बखूबी समझते हैं। उन्हें पार्टी के भीतर पिछड़ों, अति-पिछड़ों और सवर्णों के बीच ऐसा संतुलन बनाना होगा कि विपक्ष का यह दांव कुंद हो जाए।



