उत्तराखंडफीचर्ड

नैनीताल प्रशासन का कड़ा रुख: रामनगर में अवैध भूमि का सौदा निरस्त, 1.17 हेक्टेयर जमीन अब ‘सरकार’ की

नैनीताल/रामनगर। उत्तराखंड के नैनीताल जिले से भू-कानून और अवैध भूमि हस्तांतरण को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रामनगर स्थित ढेला बंदोबस्ती गांव में तीन दशक पहले हुए एक भूमि सौदे पर नैनीताल कलेक्टर की अदालत ने ‘वज्रपात’ करते हुए उसे अवैध घोषित कर दिया है। प्रशासन ने न केवल इस सौदे को रद्द किया है, बल्कि विवादित 1.170 हेक्टेयर भूमि को तत्काल प्रभाव से राज्य सरकार की संपत्ति (नजूल/सरकारी भूमि) घोषित करने के आदेश जारी किए हैं।

क्या है पूरा मामला? (1993 की वो भूल जो अब बनी मुसीबत)

मामले की जड़ें साल 1993 में जमी हुई हैं। ढेला बंदोबस्ती गांव में एक भूमि का विक्रय विलेख (बैनामा) निष्पादित किया गया था। इस सौदे में विक्रेताओं ने अपनी जाति का उल्लेख किए बिना सामान्य वर्ग के एक व्यक्ति को जमीन बेच दी थी। उस समय दस्तावेजों में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं किया गया कि विक्रेता अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से संबंध रखते हैं।

कानून के मुताबिक, अनुसूचित जाति की कृषि भूमि को किसी गैर-अनुसूचित जाति के व्यक्ति को बेचने के लिए उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम (UPZALR Act) के तहत जिलाधिकारी या सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य होती है। इस मामले में उत्तराखंड भूमि घोटाला रामनगर की परतों को खोलते हुए पाया गया कि किसी भी प्रकार की वैधानिक अनुमति नहीं ली गई थी।

जांच में खुला ‘जाति’ का रहस्य

प्रकरण ‘सरकार बनाम सीताराम आदि’ की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विस्तृत जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए। साल 2013 में, विक्रेताओं में से एक का आधिकारिक ‘अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र’ जारी हुआ था। इसके अलावा, जब ‘परिवार रजिस्टर’ की गहनता से पड़ताल की गई, तो संबंधित परिवार स्पष्ट रूप से अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज पाया गया।

कलेक्टर नैनीताल की अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि:

“किसी भी व्यक्ति की जाति उसके जन्म से निर्धारित होती है, जो कि उसके पिता की जाति के आधार पर तय होती है। दस्तावेजी साक्ष्य (परिवार रजिस्टर और जाति प्रमाण पत्र) यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं कि विक्रेता अनुसूचित जाति के थे और उन्होंने नियम विरुद्ध तरीके से भूमि का हस्तांतरण किया।”

UPZALR अधिनियम की धारा 157 का चाबुक

नैनीताल के जिलाधिकारी (DM) ललित मोहन रयाल ने इस प्रकरण को कानून का खुला उल्लंघन माना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विक्रेताओं ने जानबूझकर अपनी पहचान छिपाई ताकि वे अनुमति की जटिल प्रक्रिया से बच सकें। यह सीधे तौर पर UPZALR अधिनियम की धारा 157 का उल्लंघन है।

इस अधिनियम के तहत, यदि कोई व्यक्ति जाति छिपाकर या बिना प्रशासनिक अनुमति के आरक्षित वर्ग की भूमि का हस्तांतरण करता है, तो वह सौदा स्वतः शून्य माना जाता है और प्रशासन को अधिकार है कि वह उस भूमि को सरकार के नाम पर जब्त कर ले। इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए डीएम ने 1.170 हेक्टेयर जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट के नजीरों का दिया हवाला

अदालत ने अपने फैसले को कानूनी रूप से पुख्ता करने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के विभिन्न ऐतिहासिक फैसलों का संदर्भ दिया। कोर्ट ने रेखांकित किया कि संवैधानिक अधिकारों के तहत आरक्षित वर्ग की भूमि का संरक्षण राज्य का दायित्व है, और ‘जाति छिपाना’ किसी भी सूरत में जमीन के मालिकाना हक को वैध नहीं बना सकता।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई: कब्जे की तैयारी

डीएम नैनीताल ने उपजिलाधिकारी (SDM) रामनगर को इस आदेश के त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। आदेश के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

  1. राजस्व अभिलेखों में दर्ज: संबंधित 1.170 हेक्टेयर भूमि का नाम तत्काल खतौनी में बदलकर ‘राज्य सरकार’ किया जाए।

  2. भौतिक कब्जा: राजस्व विभाग की टीम मौके पर जाकर भूमि का भौतिक कब्जा सुनिश्चित करेगी।

  3. चेतावनी: भविष्य में ऐसे किसी भी अवैध हस्तांतरण पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

भू-कानून की बहस के बीच बड़ा संदेश

उत्तराखंड में इन दिनों ‘सख्त भू-कानून’ और मूल निवास को लेकर व्यापक जन-आंदोलन और राजनीतिक बहस छिड़ी हुई है। ऐसे परिवेश में उत्तराखंड भूमि घोटाला रामनगर पर प्रशासन की यह कार्रवाई भू-माफियाओं और अवैध तरीके से जमीन हड़पने वालों के लिए एक चेतावनी की तरह है।

अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के कठोर फैसलों से न केवल सरकारी जमीनों की रक्षा होगी, बल्कि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के भोले-भाले लोगों को गुमराह कर उनकी जमीनें हथियाने की प्रवृत्ति पर भी लगाम लगेगी। यह फैसला नजीर पेश करेगा कि कानून की नजर से दशकों पुरानी अनियमितताएं भी छिप नहीं सकतीं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button