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वैश्विक संकट के बीच मोदी कैबिनेट का मेगा प्लान: 2028 तक बढ़ा ‘जल जीवन मिशन’, ₹8.7 लाख करोड़ की भारी-भरकम राशि मंजूर

The Hill India News
Last updated: March 10, 2026 2:58 pm
The Hill India News
Published: March 10, 2026
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नई दिल्ली: एक ओर जहाँ खाड़ी देशों में छिड़ी भीषण जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मचा रखी है, वहीं भारत सरकार ने घरेलू मोर्चे पर ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) की बैठक में ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) को दिसंबर 2028 तक विस्तार देने की बड़ी मंजूरी दी गई है।

Contents
1. जल जीवन मिशन 2.0: सेवा वितरण पर रहेगा फोकस2. ‘सुजलाम भारत’: जल आपूर्ति का होगा डिजिटल कायाकल्प3. खाड़ी युद्ध और कच्चे तेल का संकट: पीएम मोदी की दो-टूक4. ग्रामीण भारत के लिए 2019 से अब तक का सफर5. सुशासन और आत्मनिर्भरता की ओर कदमक्या होगा जनता पर असर?कैबिनेट बैठक के मुख्य बिंदु:

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कैबिनेट ने कुल 8.69 लाख करोड़ रुपये के संशोधित बजट को हरी झंडी दिखाई है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आ रहे उछाल और युद्ध के हालातों का असर भारत की आम जनता और विकास परियोजनाओं पर नहीं पड़ना चाहिए।


1. जल जीवन मिशन 2.0: सेवा वितरण पर रहेगा फोकस

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि जल जीवन मिशन अब अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। सरकार का लक्ष्य अब केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि ‘सेवा की निरंतरता’ सुनिश्चित करना है।

  • बजट में भारी बढ़ोतरी: मिशन की कुल लागत अब 8.69 लाख करोड़ रुपये होगी। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 3.59 लाख करोड़ रुपये तय की गई है, जो 2019 के शुरुआती आवंटन (2.08 लाख करोड़) से कहीं अधिक है।

  • 2028 तक का लक्ष्य: ग्रामीण भारत के हर घर तक नल से जल पहुँचाने की समय सीमा को बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया गया है, ताकि छूटे हुए क्षेत्रों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले गाँवों को कवर किया जा सके।


2. ‘सुजलाम भारत’: जल आपूर्ति का होगा डिजिटल कायाकल्प

कैबिनेट ने जल क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए ‘सुजलाम भारत’ नामक एक एकीकृत राष्ट्रीय डिजिटल ढांचे (National Digital Framework) की स्थापना को मंजूरी दी है।

इस डिजिटल क्रांति के तहत:

  • यूनिक विलेज आईडी: देश के प्रत्येक गाँव को एक विशिष्ट ‘सुजल गाँव’ या ‘सेवा क्षेत्र आईडी’ आवंटित की जाएगी।

  • डिजिटल मैपिंग: जल के मुख्य स्रोत से लेकर उपभोक्ता के नल तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला की डिजिटल मैपिंग की जाएगी। इससे पानी की बर्बादी रोकने और आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को रियल-टाइम में ट्रैक करने में मदद मिलेगी।

  • जवाबदेही: डिजिटल ढांचे के माध्यम से ग्राम पंचायतों और जल समितियों की जवाबदेही तय की जाएगी।


3. खाड़ी युद्ध और कच्चे तेल का संकट: पीएम मोदी की दो-टूक

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी देशों (Middle East) में चल रहे युद्ध और उससे उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं।

युद्ध का असर और भारत की रणनीति:

  • कीमतों में उछाल: युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें लगभग 24 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, जो वर्तमान में 90 से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच झूल रही हैं।

  • पीएम का निर्देश: प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों को ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ एप्रोच के साथ काम करने को कहा है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में आवश्यक वस्तुओं और ऊर्जा की आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। सरकार तेल आयात के विकल्पों और रणनीतिक भंडार के उपयोग पर भी विचार कर रही है।


4. ग्रामीण भारत के लिए 2019 से अब तक का सफर

प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2019 को लाल किले की प्राचीर से जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। उस समय देश के केवल 16 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल का कनेक्शन था। आज यह आंकड़ा कई गुना बढ़ चुका है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति और रखरखाव अभी भी एक चुनौती है।

कैबिनेट के आज के फैसले से उन राज्यों को बड़ी राहत मिलेगी जहाँ कठिन भू-भाग के कारण काम की गति धीमी थी। ₹8.7 लाख करोड़ का यह निवेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।


5. सुशासन और आत्मनिर्भरता की ओर कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सुजलाम भारत’ और जेजेएम का विस्तार केवल पानी पहुँचाने की योजना नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को कम करने और ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने का एक बड़ा सामाजिक निवेश है।

अश्विनी वैष्णव का बयान:

“कैबिनेट का यह निर्णय प्रधानमंत्री के उस विजन को दर्शाता है जिसमें विकास की गति वैश्विक बाधाओं के बावजूद नहीं रुकती। सुजलाम भारत के जरिए हम जल प्रबंधन में दुनिया के लिए एक उदाहरण पेश करेंगे।”


क्या होगा जनता पर असर?

मोदी कैबिनेट के इन फैसलों से यह साफ है कि सरकार रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक तरीके से विकास को आगे बढ़ा रही है। जहाँ एक ओर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जरिए ऊर्जा संकट को मैनेज किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के लिए फंड की कमी नहीं होने दी जा रही है। 2028 तक जल जीवन मिशन का पूरा होना ग्रामीण भारत के कायाकल्प की दिशा में अंतिम प्रहार साबित होगा।


कैबिनेट बैठक के मुख्य बिंदु:

निर्णय विवरण
परियोजना जल जीवन मिशन (JJM)
नई समय सीमा दिसंबर 2028
कुल बजट ₹8,69,000 करोड़
नया पोर्टल ‘सुजलाम भारत’ डिजिटल फ्रेमवर्क
रणनीतिक निर्देश खाड़ी युद्ध का असर घरेलू आपूर्ति पर न पड़े

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