
वाशिंगटन/न्यूयॉर्क: वैश्विक पत्रकारिता के स्तंभ माने जाने वाले अमेरिकी समाचार पत्र ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ (The Washington Post) से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया के मीडिया घरानों को स्तब्ध कर दिया है। बुधवार को संस्थान ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी छंटनी का एलान करते हुए करीब 30 प्रतिशत कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। पत्रकारों और विशेषज्ञों ने इस बड़े पैमाने की कटौती को ‘ब्लडबाथ’ (Bloodbath) करार दिया है, क्योंकि इसने न केवल न्यूजरूम बल्कि अखबार की बुनियादी पहचान पर भी चोट की है।
अचानक आए ईमेल और संक्षिप्त जूम मीटिंग्स के जरिए पत्रकारों, संपादकों और विदेशी संवाददाताओं को सूचित किया गया कि उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इस फैसले से करीब 300 से अधिक अनुभवी पत्रकारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
छंटनी का दायरा: स्पोर्ट्स डेस्क खत्म, विदेशी ब्यूरो में भारी कटौती
वाशिंगटन पोस्ट की यह छंटनी केवल संख्या बल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने अखबार के ढांचे को ही बदल दिया है। संस्थान ने अपनी प्रतिष्ठित स्पोर्ट्स टीम को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा:
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इंटरनेशनल डेस्क: विदेशी रिपोर्टिंग और अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो में भारी कटौती की गई है, जिससे वैश्विक घटनाओं पर अखबार की पकड़ कमजोर होने की आशंका है।
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डिजिटल और पॉडकास्ट: संस्थान ने अपने कई लोकप्रिय पॉडकास्ट शो रोक दिए हैं।
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बिजनेस और एडमिन: बिजनेस डेस्क और एडमिनिस्ट्रेशन विभाग से भी बड़ी संख्या में लोगों को हटाया गया है।
हटाए गए नामों में ईशान थरूर (विदेश मामलों के प्रमुख), प्रांशु वर्मा (नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख) और कैरोलिन ओ’डोनोवन (अमेजन को कवर करने वाली टेक रिपोर्टर) जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं, जो लंबे समय से अखबार की साख बने हुए थे।
‘हम सबके लिए सब कुछ नहीं हो सकते’: कार्यकारी संपादक का तर्क
वाशिंगटन पोस्ट के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस दर्दनाक फैसले का बचाव करते हुए इसे एक ‘स्ट्रैटेजिक रीसेट’ बताया। जूम मीटिंग के दौरान उन्होंने कर्मचारियों से कहा, “मीडिया की खबरों को लेकर पाठकों की रुचि में आमूलचूल बदलाव आया है। हमें एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ना होगा जो आज के डिजिटल परिवेश में प्रभावी हो।”
मरे ने स्पष्ट किया कि अब अखबार अपनी पूरी ताकत केवल उन क्षेत्रों में लगाएगा जहाँ वह सबसे मजबूत है—जैसे राजनीति (Politics), रक्षा समाचार (Defense News) और खोजी पत्रकारिता (Investigative Journalism)। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वित्तीय स्थिरता के लिए यह कड़वा घूंट पीना अनिवार्य था, क्योंकि “हम हर किसी के लिए सब कुछ नहीं हो सकते।”
जेफ बेजोस और सब्सक्रिप्शन का संकट: असली वजह क्या है?
मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट जेफ बेजोस के नेतृत्व और हालिया विवादों से जुड़ा है। वाशिंगटन पोस्ट ने पिछले अमेरिकी चुनाव में किसी भी राष्ट्रपति उम्मीदवार का समर्थन (Endorsement) न करने का फैसला लिया था, जिससे उसके उदारवादी और पुराने पाठक नाराज हो गए।
आंकड़ों की जुबानी संकट:
अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसियों के अनुसार, 2020 में वाशिंगटन पोस्ट के पास करीब 2.5 लाख डिजिटल सब्सक्रिप्शन थे, जो अब घटकर 1 लाख से भी नीचे आ गए हैं। इस भारी गिरावट ने अखबार के सामने गंभीर आर्थिक चुनौतियां पेश की हैं।
वाशिंगटन पोस्ट गिल्ड का कड़ा रुख: ‘बिना स्टाफ के अखबार नहीं बचेगा’
इस छंटनी के तुरंत बाद वाशिंगटन पोस्ट गिल्ड (Union) ने मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने इस कदम को ‘अनावश्यक’ और ‘विनाशकारी’ बताते हुए कहा कि यह अखबार के मूल मिशन—”बिना डर या पक्षपात के सत्ता पर नजर रखना”—पर हमला है।
यूनियन ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा:
“अगर वॉशिंगटन पोस्ट का स्टाफ नहीं रहा, तो वॉशिंगटन पोस्ट भी नहीं रहेगा। यह छंटनी अखबार की विश्वसनीयता और उसकी अंतरराष्ट्रीय पहुंच को अपूरणीय क्षति पहुँचाएगी।”
कर्मचारियों में इस बात को लेकर भी गहरा आक्रोश है कि इतने अनुभवी लोगों को बिना किसी ठोस भविष्य की योजना के अचानक निकाल दिया गया, जिससे रिपोर्टिंग की गुणवत्ता और स्थानीय समाचारों के कवरेज पर बुरा असर पड़ना तय है।
मीडिया जगत के लिए खतरे की घंटी
वाशिंगटन पोस्ट में हुई यह छंटनी केवल एक संस्थान की समस्या नहीं है, बल्कि यह बदलते दौर में पारंपरिक पत्रकारिता के अस्तित्व पर सवालिया निशान है। विज्ञापन के गिरते रेवेन्यू और सोशल मीडिया के दौर में पाठकों की बदलती आदतों ने न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट जैसे दिग्गजों को भी घुटनों पर ला दिया है।
पहचान खोने का डर
अनुभवी पत्रकारों का मानना है कि ‘ब्ल्डबाथ’ जैसे शब्द का इस्तेमाल यहाँ बिल्कुल सटीक है। जब किसी संस्थान से उसकी रीढ़ यानी अनुभवी रिपोर्टर्स को निकाल दिया जाता है, तो वह केवल एक ‘सूचना देने वाला प्लेटफॉर्म’ बनकर रह जाता है, ‘लोकतंत्र का प्रहरी’ नहीं। वाशिंगटन पोस्ट अब उस मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसे साबित करना होगा कि क्या वह कम संसाधनों के साथ अपनी वही पुरानी साख बचा पाएगा।



