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मुंबई में बड़ा मेट्रो हादसा: मुलुंड में निर्माणाधीन पिलर का स्लैब गिरने से एक की मौत, ऑटोरिक्शा के उड़े परखच्चे; CM ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश

मुंबई | देश की आर्थिक राजधानी मुंबई एक बार फिर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) में सुरक्षा मानकों पर उठ रहे सवालों के घेरे में है। शनिवार दोपहर मुंबई के मुलुंड (वेस्ट) इलाके में एक निर्माणाधीन मेट्रो पुल का कंक्रीट स्लैब गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी किए हैं।

दोपहर 12:20 बजे एलबीएस रोड पर मचा कोहराम

हादसा शनिवार दोपहर करीब 12:20 बजे मुलुंड वेस्ट स्थित एलबीएस (LBS) रोड पर जॉनसन एंड जॉनसन फैक्ट्री के पास हुआ। यहाँ मेट्रो लाइन-4 (वडाला से ठाणे) का निर्माण कार्य चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मेट्रो पिलर संख्या 196 के पास गर्डर पुल की पैरापेट दीवार का एक विशालकाय कंक्रीट हिस्सा अचानक नीचे से गुजर रहे एक ऑटोरिक्शा और स्कोडा कार पर आ गिरा।

हादसा इतना भीषण था कि ऑटोरिक्शा पूरी तरह चकनाचूर हो गया, वहीं स्कोडा कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े और पुलिस व दमकल विभाग को सूचित किया।

हताहतों की पहचान: एक की मौत, एक की हालत नाजुक

सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड (MFB), स्थानीय पुलिस और बीएमसी (BMC) के आपदा प्रबंधन अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायलों को तुरंत 108 एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल प्रशासन और पुलिस के अनुसार:

  • मृतक की पहचान: रामधन यादव (निवासी मुंबई) के रूप में हुई है।

  • गंभीर घायल: राजकुमार इंद्रजीत यादव (45), जिनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बताई जा रही है और वे आईसीयू में भर्ती हैं।

  • अन्य घायल: महेंद्र प्रताप यादव (52) और दीपा रूहिया (40), जिनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कड़ा रुख और मुआवजे का ऐलान

हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुख व्यक्त किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि घायलों के उपचार में कोई कमी न छोड़ी जाए। महाराष्ट्र सीएमओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सरकार मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। साथ ही, सभी घायलों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों के नाम पर सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि तकनीकी खामी या मानवीय लापरवाही का पता लगाया जा सके।

पुलिस की कार्रवाई: जिम्मेदार लोगों पर कसेगा शिकंजा

डीसीपी मुंबई हेमराज सिंह राजपूत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पुलिस ने घटना का संज्ञान लिया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया, “निर्माणाधीन ब्रिज का कंक्रीट पार्ट गिरने से यह जनहानि हुई है। हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा जाली (Safety Nets) या अन्य एहतियाती कदम उठाए गए थे या नहीं।”


“मेट्रो परियोजनाओं में सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य है। मुलुंड की घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी पर जवाबदेही तय की जाएगी।”हेमराज सिंह राजपूत, डीसीपी मुंबई


MMRDA और मेट्रो लाइन-4 पर उठते सवाल

मुंबई महानगर क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने बताया कि पियर-196 के पास दीवार का हिस्सा गिरने के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एक तकनीकी टीम नियुक्त की गई है। मेट्रो लाइन-4 एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है जो वडाला को ठाणे से जोड़ता है। इसका एक बड़ा हिस्सा भीड़भाड़ वाले एलबीएस रोड के ऊपर से गुजरता है। इस हादसे ने व्यस्त सड़कों पर चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्ष हमलावर: आदित्य ठाकरे ने घेरी सरकार

हादसे के बाद राजनीति भी गरमा गई है। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने राज्य सरकार और मेट्रो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। उन्होंने पिछली घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि पिछले साल भारी बारिश के दौरान भी मेट्रो लाइन-3 में पानी भरने और दीवार गिरने की घटनाएं सामने आई थीं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बुनियादी ढांचे के उद्घाटन की जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर रही है।

बुनियादी ढांचे के विकास की भारी कीमत?

मुंबई में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार शहर की लाइफलाइन को सुधारने के लिए जरूरी है, लेकिन मुलुंड जैसे हादसे यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हम विकास की बहुत भारी कीमत चुका रहे हैं? एलबीएस रोड जैसे व्यस्त इलाके में बिना पर्याप्त सुरक्षा घेरे के भारी निर्माण कार्य करना आम नागरिकों की जान को जोखिम में डालना है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर हैं कि क्या वाकई दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या यह महज एक ‘हादसा’ बनकर फाइलों में दब जाएगा।

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