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दिल्लीफीचर्ड

NCR में बड़ा बदलाव संभव: दिल्ली से 100 किमी तक सिमट सकता है दायरा, हरियाणा के 5 जिले हो सकते हैं बाहर

The Hill India News
Last updated: June 16, 2026 6:11 am
The Hill India News
Published: June 16, 2026
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दिल्ली में मंगलवार को आयोजित 42वीं एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक में एनसीआर के दायरे को सीमित करने का प्रस्ताव चर्चा के केंद्र में है। प्रस्ताव के अनुसार, एनसीआर की सीमा दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के हवाई दायरे तक तय की जा सकती है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो हरियाणा के पांच जिले एनसीआर क्षेत्र से बाहर हो सकते हैं और पूरे क्षेत्र का भूगोल बदल जाएगा।

Contents
ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 से जुड़ा है पूरा मामलाहरियाणा को सबसे ज्यादा असरये 5 जिले हो सकते हैं प्रभावितयूपी और राजस्थान का अलग रुख30 मिनट एनसीआर और 8 स्मार्ट शहरों पर भी चर्चाक्या होगा आगे?

विज्ञान भवन में आयोजित इस अहम बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रतिनिधियों के साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी हिस्सा ले सकते हैं। बैठक में क्षेत्रीय विकास, शहरीकरण, यातायात, स्मार्ट सिटी और भविष्य की विकास योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है।

ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 से जुड़ा है पूरा मामला

एनसीआर के दायरे को छोटा करने का प्रस्ताव ड्राफ्ट रीजनल प्लान-2041 का हिस्सा है। इस योजना का उद्देश्य राजधानी क्षेत्र के विकास को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है। वर्तमान में एनसीआर का विस्तार दिल्ली से लगभग 150 से 175 किलोमीटर दूर तक फैला हुआ है, जिसमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुल 24 जिले शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक बड़े क्षेत्र को एक समान विकास योजना के तहत संचालित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसी वजह से एनसीआर के मुख्य क्षेत्र को 100 किलोमीटर की सीमा में सीमित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग और विकास परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

हरियाणा को सबसे ज्यादा असर

यदि नया प्रस्ताव लागू होता है तो सबसे अधिक प्रभाव हरियाणा पर पड़ेगा। वर्तमान में हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में शामिल हैं और उनका कुल क्षेत्रफल लगभग 25,327 वर्ग किलोमीटर है। नए नियम के बाद यह क्षेत्र घटकर करीब 10,546 वर्ग किलोमीटर रह जाएगा। यानी हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत की कमी आ सकती है।

हरियाणा सरकार ने स्वयं यह प्रस्ताव रखा है कि केवल वही तहसीलें एनसीआर में शामिल रहें जो पूरी तरह 100 किलोमीटर के दायरे के भीतर आती हैं। इस कारण कई जिले पूरी तरह या आंशिक रूप से एनसीआर से बाहर हो सकते हैं।

ये 5 जिले हो सकते हैं प्रभावित

1. करनाल:
दिल्ली से लगभग 120 से 121 किलोमीटर दूर स्थित करनाल नए प्रस्तावित दायरे से बाहर हो सकता है। इसके अधिकांश हिस्से पर एनसीआर का दर्जा समाप्त होने की संभावना है।

2. महेंद्रगढ़:
दिल्ली से करीब 112 से 113 किलोमीटर की दूरी पर स्थित महेंद्रगढ़ भी एनसीआर से बाहर होने वाले प्रमुख जिलों में शामिल है।

3. जींद:
जींद जिले की दूरी दिल्ली से लगभग 103 से 115 किलोमीटर के बीच है। ऐसे में इसकी कई तहसीलें एनसीआर की सीमा से बाहर हो सकती हैं।

4. पानीपत:
पानीपत की स्थिति सबसे रोचक मानी जा रही है। जिले का मुख्य शहर दिल्ली से करीब 88 से 95 किलोमीटर की दूरी पर है, इसलिए शहर का हिस्सा एनसीआर में रह सकता है, लेकिन जिले का बड़ा भूभाग बाहर हो सकता है।

5. भिवानी:
भिवानी दिल्ली से लगभग 107 से 108 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में इसकी केवल कुछ नजदीकी तहसीलें ही एनसीआर में शामिल रह पाएंगी।

यूपी और राजस्थान का अलग रुख

जहां हरियाणा ने सख्त सीमा निर्धारण का समर्थन किया है, वहीं उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने अपेक्षाकृत लचीला रुख अपनाया है। मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, अलवर और भरतपुर जैसे क्षेत्रों का कहना है कि यदि किसी जिले या तहसील का कोई हिस्सा भी 100 किलोमीटर के दायरे में आता है तो उसे एनसीआर में बनाए रखा जाना चाहिए।

इस दृष्टिकोण से इन राज्यों के कई क्षेत्र एनसीआर का हिस्सा बने रह सकते हैं, जबकि हरियाणा के कई जिलों को बाहर होना पड़ सकता है।

30 मिनट एनसीआर और 8 स्मार्ट शहरों पर भी चर्चा

बैठक में केवल एनसीआर की सीमा ही नहीं बल्कि “30 मिनट एनसीआर” की महत्वाकांक्षी अवधारणा पर भी चर्चा हो सकती है। इसके तहत ऐसी परिवहन व्यवस्था विकसित करने की योजना है जिससे एनसीआर के प्रमुख शहरों तक 30 मिनट के भीतर पहुंचा जा सके। इसके अलावा क्षेत्र में आठ नए स्मार्ट शहर विकसित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाएगा।

क्या होगा आगे?

आज होने वाली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक को राजधानी क्षेत्र के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि 100 किलोमीटर वाले प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो एनसीआर का नक्शा बदल जाएगा और कई जिलों की विकास योजनाओं, निवेश संभावनाओं तथा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। अब सभी की नजरें बैठक के फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले वर्षों में दिल्ली-एनसीआर के विकास की दिशा तय करेगा।

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