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हरिद्वार में बच्चा चोर गिरोह का बड़ा खुलासा: 72 घंटे में दो बच्चों को सकुशल छुड़ाया, छह आरोपी गिरफ्तार, कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क

The Hill India News
Last updated: June 10, 2026 11:08 am
The Hill India News
Published: June 10, 2026
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हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस ने एक बड़े बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 72 घंटे के भीतर अपहृत तीन वर्षीय बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि यह संगठित गिरोह उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में सक्रिय था तथा बच्चों का अपहरण कर उन्हें निःसंतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेचने का धंधा करता था। पुलिस ने गिरोह के कब्जे से दिल्ली से चोरी किए गए एक अन्य मासूम बच्चे को भी सुरक्षित बरामद कर लिया है।

Contents
बिस्किट का लालच देकर किया गया था अपहरणदिल्ली से मिला अहम कनेक्शनबच्चों की लगती थी दो से पांच लाख रुपये तक कीमतपुलिस की कार्रवाई से घबराकर स्टेशन पर छोड़ गए बच्चीएक और बच्चा भी हुआ बरामदराजस्थान में बेचने की थी तैयारीगिरोह में और सदस्य होने की आशंका

मायापुर स्थित एसपी सिटी कार्यालय में मामले का खुलासा करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि 6 मई को कनखल थाना क्षेत्र के बैरागी कैंप स्थित झुग्गी बस्ती से तीन वर्षीय बच्ची का अपहरण कर लिया गया था। घटना के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मासूम की सकुशल बरामदगी थी। पुलिस ने तत्काल विशेष टीमों का गठन कर जांच शुरू की और दिन-रात मेहनत करते हुए सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले।

बिस्किट का लालच देकर किया गया था अपहरण

पुलिस जांच में सामने आया कि बच्ची को बिस्किट का लालच देकर झुग्गी बस्ती से बहला-फुसलाकर ले जाया गया था। बच्ची के गरीब परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने शुरुआत से ही यह मान लिया था कि अपहरण का उद्देश्य फिरौती नहीं हो सकता। ऐसे में जांच का फोकस बच्चा चोरी गिरोह और अन्य संभावित आपराधिक एंगल पर रखा गया।

एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने पुलिस अधिकारियों को हर घंटे प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए संदिग्ध चेहरों की पहचान के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया गया। लगातार तकनीकी और मैनुअल जांच के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिलने शुरू हुए।

दिल्ली से मिला अहम कनेक्शन

जांच के दौरान हरिद्वार पुलिस अन्य राज्यों की पुलिस के संपर्क में भी रही। इसी दौरान पता चला कि 4 मई को दिल्ली से भी एक वर्षीय बच्चे का अपहरण हुआ था। जब दिल्ली और हरिद्वार की घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज का मिलान किया गया तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। दोनों मामलों में शामिल संदिग्धों की गतिविधियां और चेहरे एक जैसे पाए गए।

इसके बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई और पुलिस को यकीन हो गया कि दोनों घटनाओं के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है। लगातार जुटाए गए साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस गिरोह के छह सदस्यों तक पहुंचने में सफल रही।

बच्चों की लगती थी दो से पांच लाख रुपये तक कीमत

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह बच्चों की उम्र, स्वास्थ्य और अन्य परिस्थितियों के आधार पर उनकी कीमत तय करता था। आमतौर पर चोरी किए गए बच्चों का सौदा दो लाख से पांच लाख रुपये तक में किया जाता था। गिरोह का मुख्य लक्ष्य ऐसे निःसंतान दंपति होते थे जो किसी भी तरह बच्चा हासिल करना चाहते थे।

गिरोह में हर सदस्य की अलग जिम्मेदारी तय थी। कुछ सदस्य बच्चों की रेकी और अपहरण करते थे, जबकि अन्य सदस्य उन्हें सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने का काम संभालते थे। वहीं कुछ आरोपी ग्राहक तलाशने और सौदा तय करने की भूमिका निभाते थे। जरूरत पड़ने पर गिरोह के सदस्य खुद को बच्चे का माता-पिता या रिश्तेदार बताकर खरीदारों को गुमराह करते थे।

पुलिस के अनुसार आरोपी आकिल और प्रीति शर्मा बच्चों के सौदे की कीमत तय करने और उन्हें बेचने में प्रमुख भूमिका निभाते थे। वे बच्चों को अपना या अनाथ बताकर खरीददारों को सौंपते थे।

पुलिस की कार्रवाई से घबराकर स्टेशन पर छोड़ गए बच्ची

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में पुलिस की लगातार छापेमारी और गिरफ्तारी अभियान से गिरोह के अन्य सदस्य घबरा गए। गिरफ्तारी के डर से वे अपहृत बच्ची को बेच नहीं सके और उसे दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में छोड़कर फरार हो गए।

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की सूचना पर हरिद्वार पुलिस की टीम तत्काल दिल्ली पहुंची और बच्ची को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया। बच्ची पूरी तरह स्वस्थ मिली, जिसके बाद पुलिस और परिजनों ने राहत की सांस ली।

एक और बच्चा भी हुआ बरामद

गिरफ्तार आरोपियों से सख्ती से पूछताछ करने पर एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ। आरोपियों ने बताया कि उन्होंने 24 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से करीब डेढ़ वर्षीय बच्चे का भी अपहरण किया था। इस बच्चे का सौदा डेढ़ लाख रुपये में तय कर उसे उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में बेच दिया गया था।

जानकारी मिलते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बदायूं पहुंचकर बच्चे कार्तिक को भी सकुशल बरामद कर लिया। इस तरह पुलिस ने दो मासूम बच्चों को गिरोह के चंगुल से मुक्त कराने में सफलता हासिल की।

राजस्थान में बेचने की थी तैयारी

जांच में यह भी सामने आया कि हरिद्वार से अपहृत तीन वर्षीय बच्ची राधिका को राजस्थान में बेचने की तैयारी चल रही थी। गिरोह उसके लिए ग्राहक तलाश चुका था और जल्द ही सौदा होने वाला था। हालांकि इससे पहले ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया और सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरोह में और सदस्य होने की आशंका

पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए जांच अभी जारी है। पुलिस विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित खरीदारों की तलाश कर रही है।

फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्हें अदालत में पेश करने की तैयारी चल रही है। वहीं दिल्ली पुलिस को भी पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है और बरामद बच्चे को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली पुलिस के माध्यम से उसके परिजनों को सौंपा जाएगा।

हरिद्वार पुलिस की इस सफलता को हाल के वर्षों में बच्चों की तस्करी और अपहरण के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की खरीद-फरोख्त जैसे जघन्य अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने तक अभियान जारी रहेगा।

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