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महाराष्ट्र: गैस सिलेंडर की कतार बनी ‘डेथ वारंट’, 5 घंटे लाइन में खड़े पूर्व सरपंच की मौत; व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

अकोला: महाराष्ट्र के अकोला शहर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि प्रशासन और गैस वितरण कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ई-केवाईसी (e-KYC) और गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए घंटों कतार में खड़े रहने की मजबूरी एक पूर्व सरपंच के लिए जानलेवा साबित हुई। भीषण गर्मी और अव्यवस्था के बीच दम तोड़ने वाली इस घटना ने स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, अन्वी मिर्जापुर गांव के पूर्व सरपंच शंकर फपूर्डाजी शिरसाट बुधवार को अकोला स्थित ‘यदुराज एचपी गैस एजेंसी’ (Yaduraj HP Gas Agency) पर अपनी गैस बुकिंग और अनिवार्य केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने पहुंचे थे। चश्मदीदों के मुताबिक, शिरसाट सुबह से ही लंबी कतार में लगे थे। करीब 4 से 5 घंटे तक चिलचिलाती धूप और उमस भरी गर्मी में खड़े रहने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।

दोपहर करीब 1 बजे के आसपास, जब धूप अपने चरम पर थी, शिरसाट को अचानक चक्कर आया और वे जमीन पर गिर पड़े। वहां मौजूद अन्य उपभोक्ताओं ने उन्हें संभालने और प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल ले जाने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। एक जनसेवक की इस तरह असमय मृत्यु से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।

अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ी जिंदगी

इस दुखद घटना ने गैस एजेंसियों पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव को उजागर कर दिया है। ‘यदुराज गैस एजेंसी’ पर लगे आरोपों के अनुसार, वहां उपभोक्ताओं के लिए न तो बैठने की कोई व्यवस्था थी और न ही धूप से बचने के लिए शेड (छाया) का इंतजाम था। भीषण गर्मी के बावजूद पीने के पानी तक की सुविधा मुहैया नहीं कराई गई थी।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार द्वारा केवाईसी अनिवार्य किए जाने के बाद से ही गैस एजेंसियों पर भारी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन एजेंसियां अतिरिक्त काउंटर खोलने या टोकन सिस्टम लागू करने के बजाय लोगों को घंटों धूप में खड़ा रहने पर मजबूर कर रही हैं। शंकर शिरसाट की मौत इसी प्रशासनिक लापरवाही का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है।

राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश: ‘सदोष मनुष्य वध’ का मामला दर्ज करने की मांग

घटना की सूचना मिलते ही सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। वंचित बहुजन आघाड़ी के सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और मनपा नगरसेवक पराग गवई ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सीधे तौर पर गैस एजेंसी प्रबंधन को इस मौत का जिम्मेदार ठहराया है।

गवई ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित गैस एजेंसी के खिलाफ ‘सदोष मनुष्य वध’ (Culpable Homicide) का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “एक तरफ डिजिटल इंडिया की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ बुजुर्गों को एक छोटे से काम के लिए घंटों लाइन में लगकर जान गंवानी पड़ रही है। यह व्यवस्था की विफलता है।” उन्होंने सरकार से मांग की है कि गैस वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह घर-पहुंच (Home Delivery) स्तर पर सुधारा जाए ताकि भविष्य में किसी और ‘शंकर शिरसाट’ को अपनी जान न गंवानी पड़े।

गांव में मातम, प्रशासन मौन

गुरुवार को पूर्व सरपंच शंकर शिरसाट का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव अन्वी मिर्जापुर लाया गया, जहां गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया। गांव की श्मशान भूमि में जुटे सैकड़ों लोगों की आंखों में आंसू और व्यवस्था के प्रति गुस्सा साफ देखा जा सकता था। ग्रामीणों का कहना है कि शिरसाट हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते थे, लेकिन जब उन्हें मदद की जरूरत थी, तो सिस्टम ने उन्हें अकेला छोड़ दिया।

फिलहाल, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक एजेंसी मालिक या संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या आम आदमी की सुविधा से ज्यादा सरकारी प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है?

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