
मुंबई/पुणे। महाराष्ट्र की राजनीति में ‘सत्ता के सेमीफाइनल’ माने जा रहे नगर निगम चुनावों के परिणामों ने राज्य की भावी सियासत की तस्वीर साफ कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ‘महायुति’ के सुशासन पर मुहर लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्यभर के शहरी निकायों में एकतरफा जीत दर्ज की है। कुल 2869 वार्डों में से 1441 पर जीत हासिल कर भाजपा सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी है। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी अपनी ताकत का लोहा मनवाया है, जो 405 सीटों के साथ राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।
महायुति का दबदबा: आंकड़ों की जुबानी
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार, भाजपा ने न केवल अपनी पुरानी सीटें बचाईं, बल्कि विपक्षी गढ़ों में भी सेंधमारी की है। 2869 सीटों के लिए हुए इस महासंग्राम में दलों की स्थिति कुछ इस प्रकार रही:
| पार्टी | कुल सीटें जीतीं |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 1441 |
| शिवसेना (एकनाथ शिंदे) | 405 |
| कांग्रेस | 318 |
| NCP (अजीत पवार गुट) | 164 |
| शिवसेना (UBT – उद्धव गुट) | 154 |
| AIMIM | 97 |
| NCP (शरद पवार गुट) | 36 |
| अन्य (निर्दलीय व छोटे दल) | 254 |
मुंबई (BMC): बहुमत से दूर BJP, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी
देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा रहा। 227 वार्डों वाली इस परिषद में भाजपा 89 सीटें जीतकर शीर्ष पर रही, हालांकि वह बहुमत के जादुई आंकड़े (114) से दूर है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने 65 सीटों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, लेकिन वह दूसरे स्थान पर खिसक गई है।
मुंबई में सत्ता का समीकरण अब रोचक हो गया है। शिंदे गुट (29) और भाजपा (89) का गठबंधन 118 तक पहुंचता है, जो बहुमत के करीब है। हालांकि, राज ठाकरे की मनसे (MNS) की 10 सीटें और अन्य 10 निर्दलीय पार्षद ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकते हैं।
ठाणे और नवी मुंबई: गढ़ बचाने में सफल रहे दिग्गज
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह क्षेत्र ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) का जादू सिर चढ़कर बोला। यहाँ 131 वार्डों में से 72 पर जीत दर्ज कर शिंदे ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया और साबित कर दिया कि ठाणे आज भी शिवसेना का अभेद्य दुर्ग है।
वहीं, नवी मुंबई में भाजपा ने 111 में से 65 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। यहाँ शिंदे गुट को 43 सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) का सूपड़ा साफ नजर आया।
पुणे-पिंपरी में भाजपा की ‘सुनामी’
पश्चिमी महाराष्ट्र के आईटी हब पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में भाजपा ने विपक्षी दलों को संभलने का मौका भी नहीं दिया।
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पुणे (165 वार्ड): भाजपा ने 123 सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया। अजीत पवार की एनसीपी यहाँ मात्र 21 सीटों पर सिमट गई।
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पिंपरी-चिंचवड़ (128 वार्ड): यहाँ भाजपा ने 84 सीटें जीतकर अपना कब्जा बरकरार रखा, जबकि अजीत पवार गुट को 37 सीटों से संतोष करना पड़ा।
नासिक और कल्याण-डोंबिवली का हाल
नासिक में भी भाजपा ने 72 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार किया। वहीं, कल्याण-डोंबिवली में मुकाबला रोमांचक रहा, जहाँ शिंदे की शिवसेना 53 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी और भाजपा 50 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। यहाँ दोनों दलों के बीच मेयर पद को लेकर खींचतान देखने को मिल सकती है।
विभाजन के बाद ‘असली’ शिवसेना का फैसला?
इन चुनाव परिणामों ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि शिवसेना के विभाजन के बाद जमीनी स्तर पर एकनाथ शिंदे का प्रभाव बढ़ा है। जहाँ शिंदे गुट ने 405 सीटें जीतीं, वहीं उद्धव ठाकरे का गुट मात्र 154 सीटों पर सिमट गया। कोंकण और ठाणे बेल्ट में उद्धव गुट को बड़ा झटका लगा है। इसी तरह एनसीपी के मामले में अजीत पवार (NCPAP) 164 सीटों के साथ शरद पवार (36 सीटें) पर भारी पड़ते दिखे हैं।
कांग्रेस और अन्य दलों का प्रदर्शन
कांग्रेस 318 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। हालांकि, पार्टी ने विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र के कुछ शहरी इलाकों में अपनी जमीन बचाए रखी है, लेकिन वह भाजपा के विजय रथ को रोकने में नाकाम रही। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने 97 सीटों के साथ मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी मजबूती दिखाई है। प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) और राज ठाकरे की मनसे का प्रदर्शन उम्मीद से काफी कम रहा।
रणनीतिक विश्लेषण: वोट-टू-सीट कन्वर्ज़न
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का वोट-टू-सीट कन्वर्ज़न इस बार राज्य में सबसे बेहतर रहा है। पार्टी ने उन वार्डों पर ध्यान केंद्रित किया जहाँ जीत का अंतर कम था। साथ ही, ‘लखपति दीदी’ और ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ जैसी योजनाओं का सीधा लाभ महायुति के उम्मीदवारों को मिलता दिखा।
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव परिणामों ने यह संकेत दे दिया है कि शहरी मतदाता ‘डबल इंजन’ सरकार और विकास के एजेंडे के साथ हैं। भाजपा ने अपनी राज्यव्यापी पकड़ मजबूत की है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एक बड़े मास लीडर के रूप में उभरे हैं। आगामी विधानसभा चुनावों के लिए यह नतीजे महायुति के लिए संजीवनी और महाविकास अघाड़ी के लिए आत्ममंथन का विषय हैं।



