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इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच ‘महा-संवाद’ शुरू, क्या शांति की राह पर लौटेंगे दुश्मन देश?

इस्लामाबाद: मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और तीसरे विश्व युद्ध की आहट के बीच आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गई है। शनिवार सुबह से ही इस्लामाबाद के अति-सुरक्षित सेरेना होटल में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह बातचीत न केवल दो कट्टर दुश्मन देशों के बीच भविष्य के रिश्तों को तय करेगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा माने जाने वाले ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) के भाग्य का भी फैसला करेगी।

पाकिस्तान इस ऐतिहासिक वार्ता में मेजबान और मध्यस्थ की दोहरी भूमिका निभा रहा है। लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद बिगड़े हालात के बीच ईरान का इस वार्ता के लिए मेज पर आना अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी और होर्मुज का सवाल

इस अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के आधिकारिक आगाज से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में तेवर दिखाए हैं। ट्रंप ने दो-टूक शब्दों में दावा किया है कि “होर्मुज स्ट्रेट जल्द ही फिर से खुल जाएगा, चाहे इसमें ईरान का सहयोग मिले या न मिले।”

ट्रंप की यह चेतावनी वैश्विक व्यापार के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने शुक्रवार को यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि इस्लामाबाद में कोई ठोस शांति समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा। ऐसे में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पर जहाँ समझौते का दबाव है, वहीं सैन्य विकल्प की धमकी ने ईरान को रक्षात्मक और आक्रामक दोनों रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।

प्रॉक्सिमिटी टॉक्स: एक छत, दो कमरे और बीच में पाकिस्तान

इस्लामाबाद में हो रही यह बातचीत किसी सामान्य कूटनीतिक मुलाकात जैसी नहीं है। कूटनीतिक भाषा में इसे ‘प्रॉक्सिमिटी टॉक्स’ (Proximity Talks) कहा जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि एक ही होटल (सेरेना होटल) की छत के नीचे मौजूद हैं, लेकिन वे एक-दूसरे के आमने-सामने बैठकर मेज साझा नहीं करेंगे।

दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को अलग-अलग कमरों में बैठाया गया है। पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी संदेशों के वाहक के रूप में एक कमरे से दूसरे कमरे तक प्रस्ताव और आपत्तियां पहुँचा रहे हैं। यह अप्रत्यक्ष संवाद दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी है, जिसे पाटने की जिम्मेदारी पाकिस्तान के कंधों पर है।

प्रतिनिधिमंडल: कौन हैं कूटनीति के खिलाड़ी?

इस अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में शामिल होने वाले चेहरों से ही इसकी गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है:

  • अमेरिका की ओर से: व्हाइट हाउस ने अपनी ए-टीम मैदान में उतारी है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस दल की अगुवाई कर रहे हैं। उनके साथ डोनाल्ड ट्रंप के भरोसेमंद दामाद जेरेड कुशनर, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर शामिल हैं।

  • ईरान की ओर से: तेहरान ने भी अपने अनुभवी रणनीतिकारों को भेजा है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, उप विदेश मंत्री माजिद तख्त रावंची और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाकिर जोलगादर बातचीत का हिस्सा हैं।

  • मेजबान पाकिस्तान: पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री इसहाक डार, और सबसे महत्वपूर्ण, आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर खुद इस कूटनीतिक घेराबंदी की निगरानी कर रहे हैं।

मुख्य एजेंडा: सीजफायर और सुरक्षा की गारंटी

इस वार्ता के केंद्र में तीन प्रमुख मुद्दे हैं:

  1. लेबनान में सीजफायर: ईरान की पहली शर्त यह है कि किसी भी समझौते में लेबनान को शामिल किया जाए और इजरायली हमलों पर तत्काल रोक लगे।

  2. होर्मुज स्ट्रेट: अमेरिका चाहता है कि तेल की आपूर्ति के लिए यह मार्ग बिना किसी बाधा के खुला रहे।

  3. भविष्य की गारंटी: ईरान को अमेरिका से यह ठोस आश्वासन चाहिए कि भविष्य में उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी।

दुनिया की नजरें पाकिस्तान पर

अंतरराष्ट्रीय मीडिया और रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह अमेरिका-ईरान शांति वार्ता सफल रहती है, तो यह वैश्विक तेल की कीमतों में स्थिरता लाएगी और युद्ध की विभीषिका को टाल देगी। हालांकि, ट्रंप का आक्रामक रुख और ईरान की सीजफायर को लेकर अड़िग शर्तें इस राह में बड़े रोड़े हैं।

सुबह 9 बजे से शुरू हुई यह बातचीत देर रात तक चलने की उम्मीद है। क्या इस्लामाबाद का सेरेना होटल विश्व शांति के नए अध्याय का गवाह बनेगा या फिर मध्य पूर्व की आग और भड़केगी? इसका जवाब आने वाले कुछ घंटों में मिल जाएगा।

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