
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में करीब 25 वर्षों के अंतराल के बाद फिर से लॉटरी शुरू करने का फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल की लगातार चौथे दिन हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार का तर्क है कि यह निर्णय राज्य के राजस्व संसाधनों को बढ़ाने और आर्थिक संकट से उबरने के लिए लिया गया है।
जय राम ठाकुर का सरकार पर तीखा हमला
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा,
“लॉटरी की वजह से पहले भी कई परिवार तबाह हो चुके हैं। लोगों के घर नीलाम हुए, आत्महत्याएं हुईं। अब वही दौर दोहराने की तैयारी है। सुखविंदर सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर सामाजिक विनाश की राह पर चल रही है।”
जय राम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार एक के बाद एक विवादित नीतिगत फैसले ले रही है— पहले भांग की खेती को वैधता दी, फिर शराब की खुलेआम बिक्री को प्रोत्साहन दिया और अब लॉटरी जैसे सामाजिक नुकसानदायक तंत्र को दोबारा लागू किया जा रहा है।
“जनता की जमा पूंजी लूटी जा रही है”
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ‘आत्मनिर्भर हिमाचल’ के नाम पर लोगों की जमा पूंजी पर हाथ साफ करने की तैयारी में है। भाजपा ने इसे प्रदेश के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ बताते हुए सार्वजनिक रूप से इस योजना का विरोध करने की घोषणा की है।
सरकार की दलील: आय के स्रोत बढ़ाना अनिवार्य
सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार का मानना है कि बढ़ते वित्तीय घाटे को कम करने और सामाजिक योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने हेतु लॉटरी एक संभावित विकल्प हो सकती है। इस व्यवस्था को पारदर्शी और विनियमित ढंग से लागू किए जाने की योजना है।
राजनीतिक संग्राम के केंद्र में लॉटरी वापसी का फैसला
सरकार और विपक्ष के बीच अब यह फैसला नया राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। जहां एक ओर सरकार इसे राजस्व सुधार की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सामाजिक और नैतिक पतन की शुरुआत मान रहा है।



