
देहरादून में हुए चर्चित पुलिस एनकाउंटर में मारे गए शामली निवासी बदमाश अकरम का मामला अब केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें 1100 करोड़ रुपये की कथित जमीन का विवाद भी जुड़ गया है। अकरम के परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि यह पूरा मामला एक बड़ी जमीन डील से जुड़ा हुआ है। परिवार के आरोपों के बाद उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि एनकाउंटर पूरी तरह परिस्थितिजन्य था और इसकी मजिस्ट्रेट जांच कराई जा रही है।
देहरादून में कैसे हुआ एनकाउंटर?
बुधवार देर रात देहरादून के प्रेमनगर इलाके में पुलिस और बदमाश अकरम के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के अनुसार, अकरम एक लूट की वारदात में शामिल था। बताया गया कि पौंधा रोड पर एक कारोबारी को गोली मारकर नकदी लूटी गई थी। घायल कारोबारी ने पुलिस को घटना की सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम बदमाशों की तलाश में जुट गई।
पुलिस का दावा है कि पीछा किए जाने पर अकरम और उसके साथियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इसी दौरान थाना प्रभारी नरेश राठौड़ को गोली लग गई और वे घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में अकरम गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने इसे एक बड़ी सफलता बताया, क्योंकि अकरम पर हत्या, लूट, डकैती और गैंगवार जैसे गंभीर मामलों के कई मुकदमे दर्ज थे।
अकरम पर दर्ज थे 14 से ज्यादा मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अकरम उत्तर प्रदेश के शामली जिले के गढ़ीपुख्ता थाना क्षेत्र के गांव बुंटा का रहने वाला था। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे।
बताया जा रहा है कि अकरम पर कुल 14 मुकदमे दर्ज थे। इनमें हत्या, डकैती, लूट और रंगदारी जैसे संगीन आरोप शामिल थे। साल 2014 में देहरादून के बालावाला क्षेत्र में हुए अंकित हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया था। इसके अलावा 2015 में झिंझाना थाने में उसके खिलाफ लूट का मुकदमा दर्ज हुआ था।
पुलिस के मुताबिक, वह लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय था और कई मामलों में फरार भी चल रहा था।
परिवार ने एनकाउंटर पर उठाए सवाल
एनकाउंटर के बाद अकरम के परिवार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। परिवार का कहना है कि अकरम पिछले कुछ समय से मजदूरी कर रहा था और किसी बड़े अपराध में शामिल नहीं था।
अकरम के पिता ने बताया कि उनका बेटा करीब पांच दिन पहले गांव भाटू में एक कोल्हू पर मजदूरी कर रहा था। परिवार के अनुसार, वह पिछले कई वर्षों से सहारनपुर के गांव खाता खेड़ी में अपने परिवार के साथ रह रहा था।
अकरम के भाई मुकर्रम ने दावा किया कि अकरम किसी मुकदमे की पेशी के सिलसिले में देहरादून गया था। गुरुवार सुबह गांव वालों के फोन से उन्हें एनकाउंटर की जानकारी मिली।
1100 करोड़ की जमीन का क्या है मामला?
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब अकरम के भाई मुकर्रम ने 1100 करोड़ रुपये की जमीन को लेकर बड़ा आरोप लगाया। मुकर्रम का कहना है कि यह पूरा विवाद एक महंगी जमीन को लेकर चल रहे संघर्ष से जुड़ा हुआ है।
परिवार के अनुसार, जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है, वह उनके बहनोई के नाम पर है। हालांकि उस जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति का कब्जा बताया जा रहा है। मुकर्रम का दावा है कि वर्तमान बाजार मूल्य के हिसाब से उस जमीन की कीमत करीब 1100 करोड़ रुपये है।
उसने आरोप लगाया कि जमीन के लेनदेन की प्रक्रिया चल रही थी और एक-दो दिन में बड़ी डील होने की संभावना थी। परिवार का आरोप है कि इसी जमीन विवाद के कारण अकरम को रास्ते से हटाया गया।
हालांकि परिवार ने अभी तक जमीन के स्थान, दस्तावेजों या विवाद से जुड़े अन्य पक्षों की सार्वजनिक जानकारी नहीं दी है। पुलिस ने भी इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
शव को गांव नहीं ले जा सका परिवार
एनकाउंटर के बाद विवाद उस समय और बढ़ गया जब अकरम के परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें शव नहीं सौंपा गया। परिवार के लोग देहरादून अस्पताल पहुंचे और शव गांव ले जाने की मांग की, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी।
इसके बाद देर रात देहरादून के कब्रिस्तान में ही अकरम को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। परिवार का कहना है कि वे उसे अपने गांव में दफनाना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं होने दिया।
इस मुद्दे पर भी स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं।
पहले भी एनकाउंटर में मारा गया था भाई असलम
अकरम का परिवार पहले भी अपराध और पुलिस कार्रवाई के कारण चर्चा में रह चुका है। अकरम के बड़े भाई असलम का भी लंबा आपराधिक इतिहास था।
साल 2017 में शामली के बाबरी थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के दौरान असलम मारा गया था। उस पर भी लूट, डकैती और फिरौती जैसे गंभीर आरोप थे। पुलिस रिकॉर्ड में वह एक सक्रिय अपराधी माना जाता था।
अब लगातार दो भाइयों के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद यह मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया है।
पुलिस ने क्या कहा?
देहरादून के एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने परिवार के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष को कोई आपत्ति या शिकायत है, तो वह मजिस्ट्रेट के सामने अपना पक्ष रख सकता है या अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुठभेड़ के दौरान पुलिस टीम पर गोली चलाई गई थी और आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।
कई सवाल अभी भी बाकी
अकरम एनकाउंटर के बाद अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वास्तव में 1100 करोड़ की जमीन का कोई बड़ा विवाद था? क्या अकरम उस विवाद में सक्रिय भूमिका निभा रहा था? क्या पुलिस कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष थी या परिवार के आरोपों में कोई सच्चाई है?
इन सभी सवालों के जवाब फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएंगे। लेकिन इतना तय है कि देहरादून एनकाउंटर अब केवल अपराध की कहानी नहीं रह गया, बल्कि इसमें जमीन, प्रभाव और पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर बहस शुरू हो चुकी है।



