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जनजाति समागम 2026: सीमांत प्रहरी हैं हमारे जनजातीय भाई, उनके जीवन स्तर को सुधारना सरकार का संकल्प – CM धामी

चमोली (बेडूबगड़) | 21 फरवरी, 2026: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को जनपद चमोली के बिरही (बेडूबगड़) में ‘नीति-माणा जनजाति कल्याण समिति’ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय जनजाति समागम 2026 के भव्य समापन समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति को राज्य की अनमोल धरोहर बताते हुए सीमांत क्षेत्रों के निवासियों को ‘देश का प्रथम प्रहरी’ करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार जनजाति समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

चमोली के लिए मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणाएं

समागम के दौरान मुख्यमंत्री ने नीति घाटी और भोटिया जनजाति के कल्याण हेतु कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जो क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होंगी:

  • भूमि विवादों का समाधान: नीति घाटी भोटिया जनजाति के शीतकालीन प्रवास और अन्य लंबित भूमि संबंधी मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा।

  • बुनियादी ढांचा: बेडूबगड़ भोटिया पड़ाव में एक अत्याधुनिक सामुदायिक भवन का निर्माण और इस भूमि को सुरक्षित करने के लिए सुरक्षा कार्य किए जाएंगे।

  • विरासत को सम्मान: चिपको आंदोलन की जननी स्व. श्रीमती गौरा देवी जी की भव्य प्रतिमा की स्थापना और एक समर्पित पार्क का निर्माण किया जाएगा।

  • धार्मिक पर्यटन: बैरासकुंड मंदिर का सौंदर्यीकरण कर इसे पर्यटन मानचित्र पर उभारा जाएगा।


“देश का अंतिम नहीं, प्रथम गांव है माणा”

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन को दोहराया जिसमें उन्होंने ‘माणा’ को देश के अंतिम गांव के बजाय ‘देश का प्रथम गांव’ की संज्ञा दी थी। उन्होंने कहा, “हमारे सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय भाई-बहन न केवल अपनी संस्कृति को सहेज रहे हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा भी कर रहे हैं।”

जनजातीय शिक्षा और स्वरोजगार पर केंद्रित सरकारी योजनाएं

मुख्यमंत्री ने जनजाति समुदाय के उत्थान के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रमुख योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया:

योजना का नाम मुख्य लाभ / प्रावधान
प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान प्रदेश के 128 गांवों का चयन, जहाँ बुनियादी सुविधाएं और रोजगार पर विशेष ध्यान।
कन्या विवाह सहायता जनजाति समुदाय की बेटियों की शादी के लिए ₹50,000 की आर्थिक मदद।
शिक्षा और छात्रवृत्ति प्राइमरी से स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति और 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय कालसी, बाजपुर और खटीमा में निशुल्क शिक्षा व आवास; चकराता में निर्माण जारी।
कौशल विकास शिक्षित बेरोजगारों के लिए 3 समर्पित ITI संस्थान और प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु निशुल्क कोचिंग।

होम-स्टे: पलायन रोकने का सशक्त हथियार

मुख्यमंत्री ने बताया कि चमोली जनपद में 800 से अधिक होम-स्टे संचालित हो रहे हैं, जिससे 4 हजार से अधिक स्थानीय लोग सीधे तौर पर स्वरोजगार से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति अपने आप में पर्यटन का एक बड़ा केंद्र है। साहसिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के जरिए स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के नए द्वार खोले जा रहे हैं, ताकि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के ही काम आए।

ऐतिहासिक निर्णय और भविष्य की राह

अपने संबोधन में श्री धामी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने और राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जनजातीय समाज देश का नेतृत्व करने में सक्षम है। उन्होंने बताया कि जनजातीय संस्कृति के संरक्षण हेतु टिम्मरसैंण महादेव के सौंदर्यीकरण के लिए ₹26 करोड़ और हीरामणि मंदिर के लिए ₹75 लाख की राशि जारी की जा चुकी है।

समापन कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि

कार्यक्रम में थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी समेत शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और नीति-माणा घाटी के सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।


चमोली का यह जनजाति समागम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के सशक्तिकरण का एक घोषणापत्र बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री की इन घोषणाओं से न केवल स्थानीय समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि जनजातीय विरासत को भी वैश्विक पहचान मिलेगी।

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