
इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान की राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित एक शिया मस्जिद में हुए भीषण आत्मघाती बम हमले ने पूरे देश को दहला दिया है। इस घातक हमले में अब तक 31 बेगुनाह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 169 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, खूंखार आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े एक क्षेत्रीय संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की है।
शनिवार को भारी सुरक्षा घेरे के बीच उसी मस्जिद परिसर में मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया, जहाँ अपनों को खोने वाले सैकड़ों शोक संतप्त लोग गम और गुस्से में डूबे नजर आए। अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने हमलावर और उसके सहयोगियों की पहचान कर ली है, साथ ही हमले के मास्टरमाइंड को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
क्यों हुआ हमला? IS ने उजागर किया अपना खतरनाक एजेंडा
इस्लामिक स्टेट से संबद्ध संगठन ने अपनी मुखपत्र ‘अमाक न्यूज एजेंसी’ पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इस कत्लेआम की जिम्मेदारी ली। बयान के मुताबिक, हमलावर ने सबसे पहले मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की और सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए मस्जिद के भीतरी हिस्से में प्रवेश कर गया। वहाँ पहुंचकर उसने अपनी विस्फोटक जैकेट में विस्फोट कर दिया।
आतंकवादी समूह ने स्पष्ट किया कि वह पाकिस्तान के शिया समुदाय को इसलिए निशाना बना रहा है क्योंकि उसके अनुसार, ये लोग सीरिया में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहे शिया मिलिशिया को सहायता प्रदान कर रहे हैं। यह हमला पाकिस्तान में बढ़ते सांप्रदायिक विभाजन को और गहरा करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा नजर आता है।
हमलावर पाकिस्तानी नागरिक, जांच में चौंकाने वाले खुलासे
पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने खुलासा किया है कि मस्जिद को निशाना बनाने वाला आत्मघाती हमलावर एक पाकिस्तानी नागरिक ही था। जांच में यह बात सामने आई है कि उसने हाल ही में अफगानिस्तान की यात्रा की थी, जहाँ उसे संभवतः ट्रेनिंग या निर्देश दिए गए थे।
हमले के बाद इस्लामाबाद और उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में रात भर छापेमारी की कार्रवाई की गई। इस ऑपरेशन के दौरान हमलावर के भाई, माँ और अन्य रिश्तेदारों सहित कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। हालांकि, इस धरपकड़ अभियान के दौरान एक पुलिस अधिकारी के शहीद होने की भी खबर है।
पाकिस्तान का पुराना खेल: विफलता अपनी, दोष दूसरों पर
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने इस हमले को लेकर एक बार फिर अपनी सरकार की विफलता स्वीकार करने के बजाय पड़ोसी देशों पर उंगली उठाना शुरू कर दिया है। आसिफ ने दावा किया कि यह हमला दर्शाता है कि अफगानिस्तान से संचालित होने वाले आतंकवादी अब राजधानी इस्लामाबाद तक पहुंच चुके हैं।
उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए बिना किसी सबूत के ‘भारत-तालिबान गठजोड़’ का एक नया शिगूफा छेड़ दिया। हालांकि, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को “गैरजिम्मेदाराना” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। काबुल का कहना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र की खामियों का दोष अफगानिस्तान पर मढ़ने का आदी हो चुका है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया: “पाकिस्तान खुद को भ्रमित न करे”
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस्लामाबाद में हुए इस आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और निर्दोष नागरिकों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। लेकिन, पाकिस्तान द्वारा भारत को इस घटना से जोड़ने की कोशिशों पर नई दिल्ली ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा:
“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान अपनी उन बुनियादी समस्याओं से निपटने के बजाय, जो उसके सामाजिक ढांचे को अंदर से खोखला कर रही हैं, दूसरों को दोष देकर खुद को भ्रमित करने की कोशिश करता है।”
भारत ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के ‘भारत-तालिबान गठजोड़’ वाले दावों को पूरी तरह आधारहीन और मनगढ़ंत करार दिया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी ‘ग्रे लिस्ट’ वाली छवि और आंतरिक आतंकी खतरों से ध्यान भटकाने के लिए हमेशा भारत के खिलाफ दुष्प्रचार का सहारा लेता है।
इस्लामिक स्टेट और पाकिस्तान में बढ़ता सांप्रदायिक तनाव
यह पहली बार नहीं है जब आईएस ने पाकिस्तान में शिया समुदाय को निशाना बनाया है। यह सुन्नी कट्टरपंथी समूह सुन्नी बहुल पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा भड़काना चाहता है।
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2022 का पेशावर हमला: इसी संगठन ने पेशावर की एक शिया मस्जिद में आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 56 लोग मारे गए थे।
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रणनीति: आईएस अक्सर उन जगहों को चुनता है जहाँ सुरक्षा की दृष्टि से ढील हो और जहाँ अधिक से अधिक संख्या में लोग एकत्रित हों।
इस्लामाबाद में हुआ यह हमला पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद की ‘गुड तालिबान और बैड तालिबान’ वाली नीति को नहीं त्यागता और अपनी धरती पर पल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं करता, तब तक उसकी अपनी राजधानी भी सुरक्षित नहीं रहेगी। भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाने से पाकिस्तान को वैश्विक सहानुभूति नहीं, बल्कि केवल तिरस्कार ही मिलेगा।



