
नई दिल्ली/विशाखापत्तनम: भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए आज स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया। इस ऐतिहासिक मौके पर रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने औपचारिक रूप से इसे नौसेना के बेड़े में शामिल किया। इसके साथ ही स्वदेश निर्मित उन्नत युद्धपोत तारागिरी का भी जलावतरण किया गया, जो भारत की समुद्री ताकत को और मजबूत करेगा।
INS अरिदमन भारत की तीसरी स्वदेश में निर्मित परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बी (SSBN) है। इससे पहले इसी श्रेणी की पनडुब्बियां INS अरिहंत और INS अरिघात क्रमशः 2016 और 2024 में नौसेना में शामिल की जा चुकी हैं। अरिदमन का शामिल होना भारत के ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ को और अधिक मजबूत बनाता है, जिससे देश की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता (deterrence) में बड़ा इजाफा होगा।
महीनों के सफल ट्रायल के बाद मिली मंजूरी
INS अरिदमन को विशाखापत्तनम स्थित गुप्त शिपबिल्डिंग सेंटर में तैयार किया गया है, जिसमें निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Larsen & Toubro की अहम भूमिका रही है। इस पनडुब्बी का कई महीनों तक समुद्र में कड़े परीक्षण किए गए, जिनमें इसकी तकनीकी क्षमता, संचालन दक्षता और हथियार प्रणालियों की जांच की गई। सभी ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद इसे नौसेना में शामिल किया गया।
नौसेना में शामिल होने के बाद INS अरिदमन भारत की रणनीतिक बल कमान (Strategic Forces Command) के अधीन कार्य करेगी। यह भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का अहम हिस्सा होगी और समुद्र के भीतर रहकर लंबी दूरी तक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि यह दुश्मन की नजरों से छिपकर लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकती है, जिससे भारत की सुरक्षा रणनीति को मजबूती मिलती है।
‘शब्द नहीं, शक्ति है अरिदमन’
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “शब्द नहीं शक्ति है, ‘अरिदमन’।” उनके इस संदेश से साफ है कि सरकार इस पनडुब्बी को सिर्फ एक रक्षा उपकरण नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक ताकत के प्रतीक के रूप में देख रही है।
युद्धपोत ‘तारागिरी’ भी बना शक्ति का नया प्रतीक
इसी दिन विशाखापत्तनम में उन्नत स्टील्थ युद्धपोत तारागिरी का भी जलावतरण किया गया। यह युद्धपोत ‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत तैयार किया गया चौथा प्लेटफॉर्म है, जिसे Mazagon Dock Shipbuilders Limited, मुंबई द्वारा बनाया गया है। लगभग 6,670 टन वजनी यह युद्धपोत आधुनिक तकनीक से लैस है और इसकी डिजाइन इस तरह की गई है कि यह रडार पर कम दिखाई देता है।
तारागिरी में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां लगी हैं, जिनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और उन्नत पनडुब्बी रोधी प्रणाली शामिल हैं। इन सभी को एक आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे यह जहाज तेजी और सटीकता से दुश्मन के खतरों का जवाब दे सकता है।
75% से अधिक स्वदेशी तकनीक
तारागिरी की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने का एक बड़ा उदाहरण है। इससे न सिर्फ देश की रक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि घरेलू उद्योगों और तकनीकी विकास को भी बल मिलेगा।
पूर्वी तट की सुरक्षा को मिलेगा मजबूती
विशेषज्ञों के अनुसार, तारागिरी का विशाखापत्तनम में शामिल होना भारत के पूर्वी समुद्री तट की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जहां चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों को देखते हुए भारत अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।
भारत की नौसेना शक्ति में बड़ा उछाल
INS अरिदमन और तारागिरी का एक साथ शामिल होना भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। एक ओर जहां अरिदमन भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगी, वहीं तारागिरी समुद्री युद्ध में भारत की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताओं को बढ़ाएगा।
आत्मनिर्भर रक्षा की ओर बढ़ता भारत
इन दोनों प्लेटफॉर्म्स का स्वदेशी होना इस बात का संकेत है कि भारत अब रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी निर्भरता को कम कर रहा है। सरकार का फोकस स्वदेशी निर्माण, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रक्षा निर्यात को बढ़ाने पर है।
कुल मिलाकर, INS अरिदमन और युद्धपोत तारागिरी का नौसेना में शामिल होना भारत की समुद्री शक्ति, रणनीतिक संतुलन और वैश्विक रक्षा स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। आने वाले समय में यह भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक और मजबूत नौसैनिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।



