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हरिद्वार में ऊर्जा निगम का ‘करंट’: 37 लाख के बकाये पर महिला अस्पताल की बिजली गुल, नगर निगम पर भी चला हंटर

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में ऊर्जा निगम ने बकाया बिजली बिलों की वसूली को लेकर अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शासन के सख्त निर्देशों के बाद विभाग ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला महिला अस्पताल और नगर निगम की स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन काट दिए हैं। अकेले महिला अस्पताल पर पिछले कई वर्षों से लगभग 37 लाख रुपये का बिल लंबित है। इस कार्रवाई से न केवल प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, बल्कि सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

बकायेदारों की सूची में बड़े नाम शामिल

ऊर्जा निगम की इस विशेष मुहिम के तहत उन उपभोक्ताओं और विभागों को निशाना बनाया जा रहा है, जिन्होंने बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद बिल जमा नहीं किया। शनिवार को अधिशासी अभियंता दीपक सैनी और रवि कुमार के नेतृत्व में विभागीय टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों का औचक निरीक्षण किया।

हरिद्वार उपकेंद्र क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जिला महिला अस्पताल पर हरिद्वार बिजली कनेक्शन काटा जाने की कार्रवाई सबसे प्रमुख रही। अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन को कई बार सूचित किया गया था, लेकिन 37 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि जमा नहीं की गई। इसी तरह, नगर निगम हरिद्वार पर भी 23 लाख रुपये का बकाया है, जिसके चलते शहर की लगभग 100 स्ट्रीट लाइटों के कनेक्शन काट दिए गए हैं।

ज्वालापुर में भी कड़ा एक्शन, लाखों की वसूली

ऊर्जा निगम की टीम केवल सरकारी विभागों तक ही सीमित नहीं रही। ज्वालापुर क्षेत्र में भी सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। यहाँ 110 ऐसे निजी बकायेदारों के कनेक्शन काटे गए, जिन्होंने लंबे समय से भुगतान नहीं किया था। विभाग की इस सख्ती का असर यह हुआ कि टीम ने मौके पर ही 14.5 लाख रुपये की बकाया राशि वसूल की।

मुख्य अभियंता शेखर त्रिपाठी ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि शासन का रुख बेहद सख्त है। उन्होंने कहा, “कई सरकारी विभागों के पास बजट उपलब्ध होने के बावजूद वे बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर रहे हैं। रुड़की नगर निगम ने अपनी सक्रियता दिखाते हुए बकाया जमा कर दिया है, लेकिन हरिद्वार नगर निगम के साथ तब तक कोई समझौता नहीं होगा, जब तक वे भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं करते।”

अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था, पर संकट बरकरार

जिला महिला अस्पताल की बिजली कटने के बाद आनन-फानन में जनरेटर के जरिए विद्युत आपूर्ति बहाल की गई है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का दावा है कि फिलहाल कामकाज प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन 24 घंटे जनरेटर पर निर्भर रहना न केवल खर्चीला है बल्कि आपातकालीन सेवाओं के लिए जोखिम भरा भी हो सकता है। यदि जल्द ही हरिद्वार बिजली कनेक्शन काटा जाने का यह मुद्दा हल नहीं हुआ, तो मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

सख्त निर्देश: बिना भुगतान नहीं जुड़ेंगे कनेक्शन

अधीक्षण अभियंता प्रदीप चौधरी के निर्देशन में चल रही इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि विभाग अब किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है। विभाग की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि बिजली का उपयोग करने के बाद उसका भुगतान करना अनिवार्य है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई बड़ा सरकारी संस्थान।

नगर निगम की स्ट्रीट लाइटें कटने से शहर के कई हिस्सों में शाम ढलते ही अंधेरा पसरने की आशंका बढ़ गई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस वित्तीय संकट से उबरने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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