हरिद्वार: उत्तराखंड के तीर्थनगरी हरिद्वार में प्रशासनिक महकमे और सियासी गलियारों के बीच एक नया विवाद गहरा गया है। शिवालिक नगर स्थित औषधि विभाग की सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर अनिता भारती ने यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कैश खुराना के खिलाफ रानीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। यह विवाद सोशल मीडिया पर पांच लाख रुपये की कथित रिश्वत मांगने के आरोपों के बाद शुरू हुआ, जिसने अब कानूनी रूप ले लिया है।
क्या है पूरा मामला? (Background)
मामले की शुरुआत 26 फरवरी को हुई, जब हरिद्वार यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कैश खुराना ने अपने फेसबुक हैंडल से एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में सीधे तौर पर सीनियर ड्रग इंस्पेक्टर अनिता भारती पर निशाना साधते हुए पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और कमेंट सेक्शन में ड्रग इंस्पेक्टर को टैग कर सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू हो गया।
प्रशासनिक अधिकारी अनिता भारती ने इसे अपनी छवि खराब करने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने रानीपुर कोतवाली में लिखित शिकायत देकर साइबर सेल के माध्यम से तकनीकी जांच और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ड्रग इंस्पेक्टर अनिता भारती के गंभीर आरोप
पुलिस को दी गई अपनी तहरीर में अनिता भारती ने स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठे हैं। उन्होंने शिकायत में कहा:
“सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से मेरे खिलाफ पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने संबंधी पोस्ट साझा की गई। इस कृत्य से न केवल मेरी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है, बल्कि मेरी शासकीय और सामाजिक छवि भी धूमिल हुई है। यह सब कुछ एक सुनियोजित तरीके से अफवाह फैलाने के उद्देश्य से किया गया है।”
ड्रग इंस्पेक्टर ने पुलिस से मांग की है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने साक्ष्य के तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी पुलिस को सौंपे हैं।
यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैश खुराना का पलटवार
दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैश खुराना अपने रुख पर कायम हैं। ईटीवी भारत से विशेष बातचीत के दौरान खुराना ने पुलिस की कार्रवाई और ड्रग इंस्पेक्टर के आरोपों को ‘निराधार’ बताया। उन्होंने कहा:
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“मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं।”
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“मैंने किसी भी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से टारगेट नहीं किया है, बल्कि जनहित के मुद्दों को उठाया है।”
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“अब जब मुकदमा दर्ज हो गया है, तो यह लड़ाई कोर्ट में लड़ी जाएगी। हमारे पास कहने के लिए बहुत कुछ है और हम न्यायालय के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखेंगे।”
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं रहा, बल्कि इसमें सत्ता और विपक्ष के बीच की खींचतान भी नजर आने लगी है।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और साइबर सेल की भूमिका
हरिद्वार पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को गंभीरता से लिया है। एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी कैश खुराना के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है।
पुलिस की रणनीति अब दोतरफा है:
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तकनीकी जांच: साइबर सेल की मदद से उस फेसबुक पोस्ट की ओरिजिन और उससे जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट्स की पड़ताल की जा रही है।
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तथ्यात्मक जांच: क्या रिश्वत के आरोपों में कोई सच्चाई है या यह केवल छवि खराब करने का प्रयास है, इसकी गहराई से जांच की जा रही है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय
उत्तराखंड के स्वास्थ्य और औषधि विभाग में इस घटना के बाद हड़कंप मचा हुआ है। एक महिला अधिकारी द्वारा सीधे तौर पर एक राजनीतिक संगठन के पदाधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलने को साहसिक कदम माना जा रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय है कि क्या सोशल मीडिया पर बिना ठोस प्रमाण के किसी अधिकारी पर आरोप लगाना अभिव्यक्ति की आजादी के दायरे में आता है या यह मानहानि का स्पष्ट मामला है।
भविष्य की राह
हरिद्वार का यह ‘ड्रग इंस्पेक्टर बनाम यूथ कांग्रेस’ विवाद अब पूरी तरह से कानूनी पेचीदगियों में उलझ चुका है। जहां एक ओर पुलिस साक्ष्य जुटा रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक खेमों में हलचल तेज है। आने वाले दिनों में कोर्ट की कार्यवाही यह तय करेगी कि क्या सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों में कोई दम था या यह केवल एक प्रशासनिक अधिकारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास था।



