
हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शहर के प्रतिष्ठित सिटी अस्पताल के साझेदारों (पार्टनर्स) के बीच चल रहा आंतरिक कलह अब कोतवाली तक जा पहुंचा है। अस्पताल के एक सीनियर पार्टनर डॉक्टर ने अपने ही सहयोगियों पर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए बैंक खाते संचालित करने, लाखों रुपये का गबन करने और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने तहरीर के आधार पर सात नामजद आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर अपनी तफ्तीश तेज कर दी है।
क्या है पूरा विवाद? 2000 से शुरू हुई साझेदारी की कहानी
यह मामला केवल एक वित्तीय हेराफेरी का नहीं है, बल्कि दशकों पुराने भरोसे के टूटने की कहानी है। नया हरिद्वार कॉलोनी निवासी डॉ. सुमंतु विरमानी द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, वह वर्ष 2000 से सिटी अस्पताल का संचालन करने वाली फर्म में एक विधिवत साझेदार के रूप में जुड़े हुए हैं।
अस्पताल की साख को देखते हुए 1 अप्रैल 2005 को फर्म का पुनर्गठन (Reconstitution) किया गया था। इस नए स्वरूप में डॉ. विरमानी के साथ सतीश विरमानी, विक्रम विरमानी, शकुंतला देवी, अमित विरमानी, लता मेहता (उर्फ स्वर्ण लता मेहता) और ऋचा ढोडी को भी बतौर साझेदार शामिल किया गया था। कई वर्षों तक अस्पताल सुचारू रूप से चला, लेकिन अंदरूनी तौर पर रिश्तों में कड़वाहट आनी शुरू हो गई थी।
फर्जी हस्ताक्षर और ‘गुप्त’ बैंक खातों का खेल
डॉ. सुमंतु विरमानी का आरोप है कि उन्हें अंधेरे में रखकर उनके नाम का दुरुपयोग किया गया। हरिद्वार सिटी अस्पताल धोखाधड़ी मामला तब सुर्खियों में आया जब यह पता चला कि साल 2015 में उनकी जानकारी के बिना ही फर्म के नाम पर चंद्राचार्य चौक स्थित एक बैंक शाखा में खाता खोल लिया गया।
डॉक्टर का दावा है कि शिव कुमार कपूर और अन्य साझेदारों ने आपसी मिलीभगत से उनके फर्जी हस्ताक्षर (Forged Signatures) तैयार किए और बैंक अधिकारियों को गुमराह कर खाता संचालित करना शुरू कर दिया। इस खाते के माध्यम से होने वाले लेनदेन की कोई भी जानकारी डॉ. विरमानी के साथ साझा नहीं की गई और न ही कभी उनकी सहमति ली गई।
2018 में ‘अवैध’ निष्कासन और 10 लाख से अधिक का गबन
पीड़ित डॉक्टर के अनुसार, साजिश का सिलसिला यहीं नहीं रुका। साल 2018 में उन्हें कथित तौर पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से और अवैध रूप से साझेदारी फर्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने कूटरचित (Fabricated) दस्तावेज तैयार किए और एक निजी बैंक में नया खाता खुलवाया, जिसमें जानबूझकर डॉ. विरमानी का नाम शामिल नहीं किया गया।
गबन के विशिष्ट आंकड़ों का जिक्र करते हुए तहरीर में कहा गया है कि 5 जनवरी 2019 को आईडीबीआई बैंक खाते से करीब 10 लाख 81 हजार रुपये की बड़ी राशि निकालकर अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई। जब डॉ. विरमानी को इन वित्तीय अनियमितताओं की भनक लगी, तो उन्होंने बार-बार अपना हिस्सा और स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन आरोपियों ने उन्हें टालना शुरू कर दिया।
जान से मारने की धमकी और कानूनी नोटिस
न्याय की तलाश में डॉ. विरमानी ने 24 दिसंबर 2025 को सभी सात आरोपियों को कानूनी नोटिस भेजा। हालांकि, 27 दिसंबर को मिले जवाब में आरोपियों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद जब डॉक्टर व्यक्तिगत रूप से अपने साझेदारों से मिले और समझौता करने या हिसाब देने की बात कही, तो आरोप है कि उनके साथ अभद्रता की गई। डॉ. विरमानी ने आरोप लगाया कि उन्हें न केवल झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई, बल्कि जान से मारने का डर भी दिखाया गया।
पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी चंद्रभान सिंह अधिकारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित डॉक्टर की तहरीर बेहद गंभीर है। इसमें बैंकिंग जालसाजी और धोखाधड़ी के स्पष्ट साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि:
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आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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बैंक से उन दस्तावेजों की मांग की गई है, जिन पर ‘फर्जी हस्ताक्षर’ होने का दावा किया जा रहा है।
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फॉरेंसिक टीम हस्ताक्षरों का मिलान करेगी ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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सीसीटीवी और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
अस्पताल की साख पर लगा दांव
सिटी अस्पताल हरिद्वार के पुराने और भरोसेमंद चिकित्सा केंद्रों में गिना जाता है। इस तरह के हरिद्वार सिटी अस्पताल धोखाधड़ी मामला के सामने आने से न केवल अस्पताल की छवि प्रभावित हुई है, बल्कि शहर के अन्य व्यावसायिक घरानों में भी हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों और मरीजों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या आंतरिक विवाद अस्पताल की सेवाओं को भी प्रभावित करेगा।
कोतवाली प्रभारी ने स्पष्ट किया है कि “जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। दस्तावेजों के सत्यापन के उपरांत जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”



