
देहरादून/हरिद्वार: उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में साल 2027 में होने जा रहे अर्धकुंभ मेले को लेकर राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार के ‘मिशन मोड’ को केंद्र से बड़ी संजीवनी मिली है। केंद्र सरकार ने हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 के सफल और भव्य आयोजन के लिए 500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि स्वीकृत कर दी है। गौर करने वाली बात यह है कि यह बजट साल 2021 में हुए पूर्ण महाकुंभ के लिए मिली राशि (375 करोड़ रुपये) से भी कहीं अधिक है, जो मुख्यमंत्री धामी की केंद्र में बढ़ती धमक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड प्रेम को दर्शाता है।
महाकुंभ की तर्ज पर अर्धकुंभ: धामी सरकार का मास्टर प्लान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बजट की स्वीकृति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इसे ‘सनातन संस्कृति’ की जीत बताया है। सीएम धामी ने कहा, “कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक समरसता का विश्वविख्यात महापर्व है। केंद्र द्वारा स्वीकृत यह 500 करोड़ रुपये की धनराशि कुंभ मेला 2027 को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगी।“
राज्य सरकार का लक्ष्य इस बार अर्धकुंभ को ‘महाकुंभ’ के स्तर पर आयोजित करना है। इसके पीछे सरकार की मंशा हरिद्वार के बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर अपग्रेड करने की है।
बजट का गणित: 2021 के महाकुंभ से भी बड़ा ‘तोहफा’
बजट के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह किसी भी अर्धकुंभ के लिए अब तक की सबसे बड़ी राशि है:
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कुंभ 2021 (महाकुंभ): केंद्र से प्राप्त बजट ₹375 करोड़।
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अर्धकुंभ 2027: केंद्र से स्वीकृत बजट ₹500 करोड़।
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वृद्धि: पिछले पूर्ण कुंभ की तुलना में लगभग 33% अधिक बजट केवल अर्धकुंभ के लिए दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट में यह भारी बढ़ोतरी हरिद्वार के कायाकल्प, यातायात प्रबंधन, हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार के लिए की गई है।
बुनियादी ढांचे और सुरक्षा पर होगा फोकस
इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाएगा:
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यातायात और पार्किंग: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए नए पुलों, सड़कों और पार्किंग स्थलों का निर्माण।
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पेयजल और स्वच्छता: घाटों की सफाई और 24 घंटे स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
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सुरक्षा व्यवस्था: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सीसीटीवी निगरानी और आधुनिक नियंत्रण कक्ष।
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डिजिटल कुंभ: श्रद्धालुओं के लिए रियल-टाइम इंफॉर्मेशन ऐप और डिजिटल साइनेज।
2027: परीक्षा और पर्व का ‘त्रिकोणीय’ संगम
साल 2027 उत्तराखंड के लिए केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। इस साल राज्य में तीन बड़ी घटनाएं एक साथ होंगी:
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हरिद्वार अर्धकुंभ: करोड़ों श्रद्धालुओं का आगमन।
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नंदा राज जात यात्रा: जिसे उत्तराखंड का ‘हिमालयी कुंभ’ कहा जाता है, यह भी 2027 में आयोजित होनी है।
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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: 2027 की शुरुआत में ही राज्य में सत्ता की जंग छिड़ेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी सरकार इन दोनों धार्मिक आयोजनों (अर्धकुंभ और नंदा राज जात) के जरिए राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर रखकर ‘सॉफ्ट पावर’ का प्रदर्शन करना चाहती है, जिसका सीधा लाभ आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिल सकता है।
विशेषज्ञों की राय: “ऐतिहासिक है यह बजट”
गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने कहा, “आमतौर पर महाकुंभ में बड़ा बजट आता है, लेकिन अर्धकुंभ के लिए 500 करोड़ रुपये की राशि मिलना ऐतिहासिक है। यह हरिद्वार के विकास के लिए स्वर्ण अवसर है।”
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार सुनील दत्त पांडेय का मानना है कि यह बजट मुख्यमंत्री धामी के विजन और पीएम मोदी के भरोसे का परिणाम है। उनके अनुसार, “चुनावी साल में इतना बड़ा आयोजन और इतना भारी बजट भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से फायदे का सौदा साबित होगा। हरिद्वार शहर के लिए यह अच्छी बात है कि ढांचागत विकास के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है।”
देवभूमि की नई तस्वीर
मुख्यमंत्री धामी ने आश्वस्त किया है कि सरकार समयबद्धता और पारदर्शिता के साथ इन कार्यों को पूरा करेगी। ‘ऑल वेदर रोड’ और ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना’ के बाद अब अर्धकुंभ 2027 के लिए मिला यह मेगा बजट उत्तराखंड को पर्यटन और आध्यात्मिकता के ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।



