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गुड न्यूज: होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़े तेल-गैस से लदे 4 बड़े जहाज

ईरान-इजरायल युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बने दबाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। तेल, एलएनजी और अन्य सामान से लदे कम से कम चार बड़े जहाज सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुके हैं। खास बात यह है कि इन जहाजों ने पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग की बजाय एक वैकल्पिक समुद्री रास्ता अपनाया, जो ओमान की समुद्री सीमा के भीतर आता है।

यह नया रास्ता अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से बचते हुए अधिक सुरक्षित माना जा रहा है, क्योंकि हालिया संघर्ष के चलते खुले समुद्री मार्गों पर हमलों का खतरा बढ़ गया था। समुद्री डेटा विश्लेषण से यह संकेत मिला है कि यह मार्ग भविष्य में व्यापारिक जहाजों के लिए एक व्यवहारिक विकल्प बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के मार्गों का उपयोग बढ़ता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, जो लंबे समय से अनिश्चितता का सामना कर रहे थे।

किन जहाजों ने किया होर्मुज पार?

डेटा के मुताबिक, इस नए रास्ते से गुजरने वाले जहाजों में कच्चे तेल और एलएनजी से लदे बड़े टैंकर शामिल हैं। इनमें मार्शल द्वीप के झंडे वाले ‘हब्रुत’ और ‘धलकुट’ नाम के जहाज शामिल हैं, जो भारी मात्रा में कच्चा तेल लेकर चल रहे थे। वहीं पनामा के ध्वज वाला एलएनजी जहाज ‘सोहार एलएनजी’ भी इसी मार्ग से गुजरते हुए देखा गया।

इन जहाजों को ओमान के तट से सैकड़ों किलोमीटर दूर ट्रैक किया गया, जहां वे सुरक्षित रूप से आगे बढ़ते नजर आए। रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘हब्रुत’ और ‘धलकुट’ में लगभग 20 लाख बैरल सऊदी और अमीराती कच्चा तेल लदा हुआ था।

हालांकि एलएनजी जहाज ‘सोहार’ में कितना माल था, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन ट्रैकिंग डेटा में उसके भरे होने के संकेत जरूर मिले हैं। इन जहाजों की सफल आवाजाही इस बात का संकेत देती है कि जोखिम के बावजूद व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं, बल्कि नए समाधान तलाशे जा रहे हैं।


भारतीय जहाज भी सुरक्षित निकला, सप्लाई को मिलेगी राहत

इस पूरे घटनाक्रम में भारत के लिए सबसे अहम खबर यह है कि एक भारतीय ध्वज वाला मालवाहक जहाज भी सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर चुका है। AIS सिग्नल के अनुसार, इस जहाज की पहचान ‘MSV कुबा MNV 2183’ के रूप में हुई है।

यह जहाज 31 मार्च को दुबई से रवाना हुआ था और फिलहाल ओमान के दिब्बा पोर्ट के पास खुले समुद्र में देखा गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जहाज में कितना माल लदा हुआ है या यह किस गंतव्य की ओर जा रहा है, लेकिन इसका सुरक्षित निकलना भारत के लिए राहत की खबर है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करती है। इस जहाज का सुरक्षित निकलना संकेत देता है कि सप्लाई लाइन पूरी तरह से बाधित नहीं हुई है और धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो सकती है।


जंग के कारण बाधित हुआ अहम वैश्विक जलमार्ग

दरअसल, हालिया संघर्ष के चलते ईरान और इजरायल के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इसके चलते Islamic Revolutionary Guard Corps द्वारा समुद्री गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और कई मामलों में जहाजों को निशाना भी बनाया गया है।

इस तनाव का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है, जहां से दुनिया की लगभग 20% ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। हमलों और सुरक्षा खतरों के कारण कई जहाज इस मार्ग पर फंस गए थे और आगे बढ़ने से बच रहे थे।

इसी स्थिति से निपटने के लिए ईरान ने अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र के भीतर एक नया, अपेक्षाकृत सुरक्षित मार्ग खोल दिया है। यह मार्ग क़ेशम और लारक द्वीपों के बीच से गुजरता है और इसका इस्तेमाल सीमित अनुमति के साथ किया जा रहा है।

हालांकि यह मार्ग लंबा और अधिक जटिल है, लेकिन मौजूदा हालात में यह व्यापारिक जहाजों के लिए एक अहम विकल्प बनकर उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग स्थिर और सुरक्षित साबित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई अनिश्चितता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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