सोने और चांदी की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से जारी उतार-चढ़ाव ने निवेशकों और आम खरीदारों को असमंजस में डाल दिया है। लगातार तीन दिनों तक तेजी दर्ज करने के बाद गुरुवार को दोनों कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। वहीं शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत भी कमजोरी के साथ हुई, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर बाजार का रुख बदल गया। जहां सोने की कीमतों में शुरुआती गिरावट के बाद हल्की रिकवरी जरूर देखने को मिली, वहीं चांदी ने तेज वापसी करते हुए फिर से बढ़त हासिल कर ली। इस बदलते रुझान ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम फिलहाल सोने-चांदी के बाजार को लगातार प्रभावित कर रहे हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार सुबह सोने और चांदी दोनों की शुरुआत लगभग 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ हुई। अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले बंद भाव 1,42,821 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,42,392 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव बढ़ने से सोने की कीमत और नीचे चली गई। सुबह करीब 11 बजे तक सोना लगभग 870 रुपये की गिरावट के साथ 1,41,951 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान इसने 1,41,742 रुपये का निचला स्तर भी छुआ।
हालांकि दोपहर तक बाजार में कुछ खरीदारी लौटने से सोने में हल्का सुधार देखने को मिला। इसके बावजूद यह बढ़त इतनी मजबूत नहीं रही कि सोना हरे निशान में पहुंच सके। दोपहर लगभग 12 बजे तक अगस्त डिलीवरी वाला सोना करीब 502 रुपये की गिरावट के साथ 1,42,319 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। यानी सुबह की तुलना में कुछ रिकवरी जरूर हुई, लेकिन कीमतें अब भी पिछले बंद स्तर से नीचे बनी रहीं।
दूसरी ओर चांदी ने कारोबार के दौरान कहीं अधिक मजबूत वापसी दिखाई। सुबह सितंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 2,19,375 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2,18,280 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला। शुरुआती कारोबार में इसमें भी कमजोरी बनी रही और सुबह करीब 11 बजे तक यह 884 रुपये की गिरावट के साथ 2,18,491 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। इस दौरान चांदी ने 2,17,325 रुपये का निचला स्तर भी छुआ।
लेकिन दोपहर तक बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। खरीदारी बढ़ने के कारण चांदी ने न केवल अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई की बल्कि बढ़त के साथ कारोबार करने लगी। दोपहर 12 बजे तक सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब 533 रुपये की तेजी के साथ 2,19,908 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। कुछ ही घंटों में आया यह बदलाव निवेशकों के लिए चौंकाने वाला रहा और बाजार में नई चर्चा शुरू हो गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतों में इस तरह का उतार-चढ़ाव केवल घरेलू मांग या आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। वैश्विक बाजार में भी शुक्रवार को सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर दबाव बना रहा। कॉमैक्स (COMEX) पर सोना करीब 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,030 डॉलर प्रति औंस और चांदी लगभग 0.41 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 57.80 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखाई दी।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार कीमती धातुओं में कमजोरी की प्रमुख वजह डॉलर इंडेक्स का मजबूत होना है। हाल के दिनों में डॉलर इंडेक्स फिर से 101 के स्तर के ऊपर पहुंच गया है। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग पर दबाव पड़ता है, क्योंकि अन्य देशों के निवेशकों के लिए इनकी खरीद अपेक्षाकृत महंगी हो जाती है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिलहाल सोने-चांदी पर दबाव देखने को मिल रहा है।
डॉलर इंडेक्स दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं—यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कनाडाई डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक—के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाता है। इसमें बढ़ोतरी का सीधा असर कमोडिटी बाजार, विशेष रूप से सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ता है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी बाजार की दिशा प्रभावित की है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशक लगातार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में कभी सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोने को समर्थन मिलता है, तो कभी डॉलर की मजबूती की वजह से कीमती धातुओं में गिरावट आ जाती है। यही कारण है कि बाजार में तेजी और गिरावट का सिलसिला लगातार बना हुआ है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी सोने और चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। अमेरिका की आर्थिक नीतियां, ब्याज दरों से जुड़े संकेत, डॉलर इंडेक्स की चाल और अंतरराष्ट्रीय तनाव की स्थिति इन धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि डॉलर और मजबूत होता है तो सोने पर दबाव बना रह सकता है, जबकि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की मांग फिर से तेज हो सकती है।
खरीदारों और निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि मौजूदा समय में जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचें और बाजार के रुझानों पर लगातार नजर रखें। आभूषण खरीदने वालों के लिए भी यह समय कीमतों की नियमित निगरानी करने का है, क्योंकि कुछ ही घंटों में बाजार की दिशा बदलने से खरीदारी की लागत में बड़ा अंतर आ सकता है।
कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी सत्र यह दिखाता है कि सोने में कमजोरी बरकरार रही, जबकि चांदी ने शानदार वापसी करते हुए बाजार को चौंका दिया। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ही तय करेंगे कि कीमती धातुओं की कीमतें फिर तेजी पकड़ेंगी या दबाव में बनी रहेंगी।
