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हिमाचल प्रदेश में पहली बार बजट के आकार में कटौती, सीएम और विधायकों की सैलरी पर भी चली कैंची

शिमला | ब्यूरो हिमाचल प्रदेश के वित्तीय इतिहास में शनिवार का दिन एक बड़े मोड़ के रूप में दर्ज हो गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब बजट के कुल आकार में पिछले वर्ष की तुलना में कमी की गई है। चालू वित्त वर्ष (2025-26) का बजट 58,514 करोड़ रुपये था, जिसमें अब 3,586 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।

बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की माली हालत का हवाला देते हुए कड़े फैसलों का ऐलान किया। सबसे चौंकाने वाला निर्णय मुख्यमंत्री और विधायकों के वेतन को लेकर रहा। प्रदेश के खराब वित्तीय हालातों को देखते हुए अगले छह महीने तक मुख्यमंत्री के वेतन में 50 फीसदी और अन्य विधायकों के वेतन में 30 फीसदी की कटौती की जाएगी।


राजस्व घाटा अनुदान (RDG) पर केंद्र से तकरार और सदन में हंगामा

मुख्यमंत्री सुक्खू ने बजट पेश करते हुए सीधा निशाना केंद्र सरकार और विपक्षी भाजपा पर साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा राज्य को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को बंद करने से हिमाचल को सालाना 8,000 करोड़ रुपये से अधिक (सटीक आंकड़ा 8,105 करोड़ रुपये) का भारी नुकसान होगा।

जैसे ही मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे इस मुद्दे पर राज्य के हितों के साथ नहीं खड़े हैं, सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया। भाजपा विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाला। मुख्यमंत्री ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, इतिहास उन्हें (विपक्ष को) कभी माफ नहीं करेगा जिन्होंने हिमाचल के हक की लड़ाई में चुप्पी साधे रखी।”


“हिमाचल उत्तर भारत का फेफड़ा है”: सुक्खू की ‘हरित बोनस’ की मांग

अपने चौथे बजट भाषण में सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल की भौगोलिक और पर्यावरणीय स्थिति का मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि हिमाचल की तुलना उत्तराखंड या असम जैसे राज्यों से करना तकनीकी रूप से गलत है। उनके अनुसार, हिमाचल एक ऐसा पहाड़ी राज्य है जिसके पास जल और वन जैसे सीमित संसाधन हैं लेकिन वह पूरे उत्तर भारत को पर्यावरण सुरक्षा प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री ने पुरजोर तरीके से ‘हरित बोनस’ (Green Bonus) की मांग करते हुए कहा, हिमाचल उत्तर भारत का फेफड़ा है। हमें संरक्षण के बदले प्रोत्साहन मिलना चाहिए था, लेकिन इसके उलट हमारा राजस्व घाटा अनुदान ही बंद कर दिया गया।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर मध्य-पूर्व के युद्ध (इजरायल-ईरान-अमेरिका संघर्ष) को भी एलपीजी की बढ़ती कीमतों और राज्य की आर्थिक चुनौतियों के लिए जिम्मेदार ठहराया।


आर्थिक विकास के आंकड़े: प्रति व्यक्ति आय में उछाल

तमाम चुनौतियों के बावजूद मुख्यमंत्री ने राज्य की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक आंकड़े भी साझा किए।

  • विकास दर: चालू वित्त वर्ष के लिए राज्य में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है।

  • प्रति व्यक्ति आय: हिमाचल में प्रति व्यक्ति आय 9.8 प्रतिशत बढ़कर 2,83,626 रुपये तक पहुँच गई है, जो राज्य के नागरिकों की आर्थिक सक्रियता को दर्शाता है।


किसानों और पशुपालकों के लिए ‘नंदा-सुनंदा’ जैसी बड़ी सौगातें

बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ने कई लोकलुभावन और सुधारात्मक घोषणाएं की हैं:

1. दूध और मछली पर MSP का बड़ा फैसला

राज्य सरकार ने दूध खरीद मूल्य में 10 रुपये प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी की है।

  • गाय का दूध: अब 61 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जाएगा।

  • भैंस का दूध: अब 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जाएगा। इसके अलावा, मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया गया है, जिससे सीधे तौर पर 6,000 से अधिक मछुआरों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

2. किसान आयोग और पर्यटन कोष

कृषि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और नीति निर्धारण के लिए राज्य में एक ‘किसान आयोग’ का गठन किया जाएगा। साथ ही, महिलाओं को पर्यटन क्षेत्र में उद्यमी बनाने के लिए एक विशेष ‘महिला पर्यटन कोष’ की स्थापना की घोषणा की गई है।


कांगड़ा बनेगा ‘एयरोसिटी’: बुनियादी ढांचे पर जोर

मुख्यमंत्री ने जिला कांगड़ा को राज्य की ‘पर्यटन राजधानी’ बनाने के अपने विजन को दोहराया। इसके तहत कांगड़ा में एक आधुनिक एयरोसिटी विकसित करने की योजना है। साथ ही, कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार और भूमि अधिग्रहण के लिए 3,300 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है। यह कदम राज्य में हवाई कनेक्टिविटी को सुधारने और हाई-एंड टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में निर्णायक माना जा रहा है।


एक ‘संकटकालीन’ लेकिन ‘संतुलित’ बजट

हिमाचल प्रदेश का यह बजट स्पष्ट रूप से वित्तीय संकट और भविष्य की संभावनाओं के बीच एक संतुलन साधने की कोशिश है। एक तरफ जहां वेतन कटौती और बजट के आकार को छोटा करना सरकार की मजबूरी को दर्शाता है, वहीं दूसरी तरफ दूध और मछली पर MSP बढ़ाना ग्रामीण वोट बैंक और आत्मनिर्भरता की ओर कदम है।

विपक्ष के हंगामे और केंद्र से RDG के मुद्दे पर जारी तकरार यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में हिमाचल की राजनीति में ‘वित्तीय स्वायत्तता’ और ‘केंद्रीय सहायता’ सबसे बड़े चुनावी मुद्दे बनने वाले हैं।

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