
पटना: बिहार सरकार ने चुनाव के बाद शुक्रवार से मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की पहली किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार 10 लाख जीविका दीदियों के खातों में 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि ट्रांसफर करेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं इस पहल की शुरुआत करेंगे।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि इस चरण में ग्रामीण क्षेत्रों की 9.5 लाख और शहरी क्षेत्रों की 50 हजार महिलाओं को सहायता प्रदान की जाएगी। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक सभी पात्र लाभार्थियों के खातों में राशि पहुंचाने का है, जिससे महिला स्वरोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण को गति मिल सके।
पहली किस्त चुनाव के बाद—राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के बाद यह पहली बार है जब सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सीधी आर्थिक सहायता जारी की जा रही है।
चुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं को 10 हजार रुपये की यह सहायता एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनी रही थी। माना जा रहा है कि इस वित्तीय मदद ने ग्रामीण परिवेश में बड़ा जनसमर्थन जुटाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
‘इसी 10 हजार से बनी है नीतीश सरकार’: प्रशांत किशोर का हमला
जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने चुनावी नतीजों के बाद सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया था कि 10 हजार रुपये की यह राशि ही नीतीश सरकार की वापसी का मुख्य कारण बनी।
PK ने कहा था:
“हर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 62 हजार महिलाओं को सीधे 10 हजार रुपये दिए गए। सरकार ने वायदा किया कि स्वरोजगार के लिए 2-2 लाख रुपये दिए जाएंगे। यह 10 हजार तो केवल बयाना था। अब सरकार को छह महीने में शेष सहायता भी देनी चाहिए।”
उन्होंने सरकार से दो टूक आग्रह किया कि चुनाव के दौरान किए गए वादे—विशेषकर 2 लाख रुपये तक की सहायता—को जल्द अमल में लाया जाए ताकि महिला स्वरोजगार के लिए ठोस व्यवस्था बन सके।
जीविका समूह, आंगनबाड़ी कर्मियों और अन्य महिला समूहों को जोड़ने की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में जीविका समूह, आंगनबाड़ी सेविकाएँ, और अन्य महिला स्वयं सहायता समूहों को योजनाओं से जोड़कर एक सशक्त सामाजिक-आर्थिक नेटवर्क तैयार किया है।
इन्हीं समूहों को योजना की पहली किस्त का सबसे अधिक प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
सरकार के अनुसार, महिला रोजगार योजना का व्यापक उद्देश्य निम्नलिखित है:
- ग्रामीण महिलाओं को आय का स्थायी स्रोत उपलब्ध कराना
- छोटे व्यवसायों एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देना
- महिला स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक क्षमता बढ़ाना
- बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से महिलाओं की कनेक्टिविटी मजबूत करना
अधिकारियों का दावा है कि यह योजना न सिर्फ तात्कालिक राहत प्रदान करेगी बल्कि आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाएगी।
दिसंबर तक लक्ष्य पूरा करने का दावा — निगाहें अगली किस्त पर
सरकार अब दिसंबर तक 100% पात्र महिलाओं तक पहली किस्त पहुँचाने की तैयारी में है।
हालांकि दूसरी और तीसरी किस्त—जो कुल मिलाकर 2 लाख रुपये की सहायता के वादे को पूरा करती है—उस पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर निगाहें टिकी हुई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार इस समयसीमा पर खरी उतरती है, तो यह बिहार में महिला आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा।



