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ड्रैगन की ‘AI’ सेंधमारी: गूगल के पूर्व इंजीनियर लिनवेई डिंग दोषी करार, चाइना के लिए चुराए थे हजारों गोपनीय ट्रेड सीक्रेट्स

The Hill India News
Last updated: January 30, 2026 2:44 am
The Hill India News
Published: January 30, 2026
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वाशिंगटन/कैलिफोर्निया: दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन कंपनी Google के भीतर बैठकर चीन के लिए जासूसी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को घोषणा की कि गूगल के पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर लिनवेई डिंग (Linwei Ding) को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी अत्यंत गोपनीय जानकारी चुराने और उसे चीन भेजने का दोषी पाया गया है। डिंग पर लगे आर्थिक जासूसी के आरोपों ने एक बार फिर सिलिकॉन वैली में सुरक्षा प्रोटोकॉल और चीनी दखल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Contents
कौन है लिनवेई डिंग और क्या था पूरा मामला?क्या कुछ चुराया गया? गूगल के सुपरकंप्यूटिंग की खुफिया जानकारीकड़ी सजा का प्रावधान: करोड़ों का जुर्माना और दशकों की जेलबाइडेन प्रशासन की ‘स्ट्राइक फोर्स’ का एक्शनगूगल का पक्ष और सुरक्षा में सेंधचीन-अमेरिका ‘टेक-वॉर’ में नया मोड़

कौन है लिनवेई डिंग और क्या था पूरा मामला?

38 वर्षीय चीनी नागरिक लिनवेई डिंग मई 2019 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में गूगल में शामिल हुआ था। डिंग की नियुक्ति गूगल के उस विभाग में थी जहाँ भविष्य की सबसे बड़ी तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर काम चल रहा था। अभियोजकों के अनुसार, डिंग ने अपनी नियुक्ति के तीन साल बाद यानी 2022 में गूगल के क्लाउड डेटा सेंटर्स से गोपनीय फाइलों की चोरी शुरू की।

जांच में पाया गया कि डिंग गुप्त रूप से चीन की दो शुरुआती चरण (early-stage) की प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए काम कर रहा था। वह गूगल के भीतर रहकर ‘डबल गेम’ खेल रहा था—एक तरफ वह अमेरिकी टेक जायंट से वेतन ले रहा था, तो दूसरी तरफ उसी के ‘ट्रेड सीक्रेट्स’ को चीनी कंपनियों को बेच रहा था ताकि उन्हें वैश्विक बाजार में बढ़त मिल सके।

क्या कुछ चुराया गया? गूगल के सुपरकंप्यूटिंग की खुफिया जानकारी

रॉयटर्स की रिपोर्ट और अदालती दस्तावेजों के अनुसार, डिंग ने गूगल के ‘हार्डवेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर’ और ‘सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म’ से संबंधित हजारों पन्नों की गोपनीय जानकारी कॉपी की।

चुराई गई जानकारी में मुख्य रूप से शामिल थे:

  • सुपरकंप्यूटिंग डेटा सेंटर्स की रूपरेखा: वे तकनीकें जो गूगल को बड़े एआई मॉडल्स को ट्रेनिंग देने की सुविधा देती हैं।

  • कस्टम चिप ब्लूप्रिंट: डिंग ने उन चिप्स के डिजाइन चुराए जिनका उद्देश्य गूगल को उसके प्रतिद्वंद्वियों जैसे Amazon और Microsoft पर बढ़त दिलाना था।

  • Nvidia पर निर्भरता कम करने की रणनीति: गूगल अपनी खुद की चिप्स विकसित कर रहा था ताकि Nvidia पर निर्भरता कम हो सके। डिंग ने इन्हीं गुप्त प्रोजेक्ट्स की जानकारी चीन भेज दी।

कड़ी सजा का प्रावधान: करोड़ों का जुर्माना और दशकों की जेल

लिनवेई डिंग को आर्थिक जासूसी के 7 मामलों और व्यापार रहस्यों (Trade Secrets) की चोरी के 7 मामलों में दोषी पाया गया है। उस पर चली 11 दिनों की लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उसे इन संगीन अपराधों का जिम्मेदार ठहराया। यदि डिंग को सभी मामलों में अधिकतम सजा मिलती है, तो उसे अपनी बाकी की जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे बितानी पड़ सकती है।

बाइडेन प्रशासन की ‘स्ट्राइक फोर्स’ का एक्शन

डिंग की गिरफ्तारी और दोषसिद्धि को अमेरिकी सरकार की एक बड़ी जीत माना जा रहा है। यह मामला ‘डिसरप्टिव टेक्नोलॉजी स्ट्राइक फोर्स’ (Disruptive Technology Strike Force) के माध्यम से को-ऑर्डिनेट किया गया था। इस फोर्स का गठन 2023 में बाइडेन प्रशासन द्वारा विशेष रूप से उन विदेशी ताकतों को रोकने के लिए किया गया था जो अमेरिका की उन्नत तकनीकों को अवैध रूप से हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

एफबीआई और न्याय विभाग ने संयुक्त बयान में कहा, “यह मामला इस बात का प्रमाण है कि चीन किस तरह से अमेरिकी नवाचार (Innovation) को चुराने के लिए अपने नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है।”

गूगल का पक्ष और सुरक्षा में सेंध

इस पूरे मामले में Google की भूमिका एक सहयोगी की रही है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसने जांच में कानून प्रवर्तन एजेंसियों का पूरा साथ दिया। हालांकि, गूगल ने अब तक इस दोषसिद्धि पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिंग जैसे ‘इनसाइडर थ्रेट’ (अंदरूनी खतरा) से निपटना टेक कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि इन कर्मचारियों के पास सिस्टम का वैध एक्सेस होता है।

चीन-अमेरिका ‘टेक-वॉर’ में नया मोड़

लिनवेई डिंग का मामला केवल एक व्यक्ति की चोरी नहीं है, बल्कि यह चीन और अमेरिका के बीच चल रहे शीत युद्ध का एक हिस्सा है। एआई तकनीक आज के समय में सैन्य और आर्थिक शक्ति का केंद्र है। चीन का लक्ष्य 2030 तक एआई में विश्व लीडर बनना है, और इसके लिए वह अक्सर शॉर्टकट या जासूसी का रास्ता अपनाता रहा है।

लिनवेई डिंग की दोषसिद्धि ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी एजेंसियां अब चीनी जासूसी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रही हैं। आने वाले समय में सिलिकॉन वैली की कंपनियों में विदेशी नागरिकों, विशेषकर चीनी नागरिकों की भर्ती और उनके एक्सेस राइट्स को लेकर और भी कड़े नियम देखे जा सकते हैं।

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