देहरादून/गाजियाबाद: डिजिटल युग में तकनीक जितनी सुलभ हुई है, साइबर अपराधियों ने उसे उतनी ही चालाकी से ठगी का हथियार बना लिया है। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की साइबर क्राइम टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए गाजियाबाद से एक शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह “हाई रिटर्न इन्वेस्टमेंट” के नाम पर मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहा था। ताजा मामले में, उत्तराखंड के एक निवासी से करीब 1.31 करोड़ रुपये की उत्तराखंड साइबर ठगी को अंजाम दिया गया, जिसके तार अब देश के कई राज्यों से जुड़ते नजर आ रहे हैं।
मुनाफे का लालच और करोड़ों का ‘खेल’
इस पूरे खेल की शुरुआत पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर निवासी एक व्यक्ति की शिकायत से हुई। पीड़ित के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया। इस ग्रुप में खुद को वित्तीय विशेषज्ञ बताने वाले ‘रजत वर्मा’ और ‘मीना भट्ट’ जैसे काल्पनिक नामों वाले किरदारों ने उसे स्टॉक मार्केट और अन्य निवेशों में प्रतिदिन 5 प्रतिशत से अधिक का मुनाफा कमाने का सपना दिखाया।
शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए कुछ फर्जी आंकड़े दिखाए गए, जिसके बाद पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई (UPI) के माध्यम से कुल 1,31,76,000 रुपये निवेश कर दिए। जब पीड़ित ने अपना पैसा वापस निकालना चाहा, तो उसे तकनीकी दिक्कतों का बहाना बनाया गया और अंततः संपर्क काट दिया गया। इसी बिंदु पर पीड़ित को आभास हुआ कि वह एक भयानक उत्तराखंड साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
गाजियाबाद से अरवाज सैफी की गिरफ्तारी: STF की सटीक सर्जिकल स्ट्राइक
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के नेतृत्व में गठित साइबर टीम ने जब तकनीकी जांच शुरू की, तो डिजिटल फुटप्रिंट्स गाजियाबाद की ओर इशारा करने लगे। पुलिस ने घेराबंदी करते हुए आरोपी अरवाज सैफी को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि अरवाज कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि वह इस पूरे सिंडिकेट की एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो बैंक खातों और फर्जी सिम कार्डों का प्रबंधन करता था।
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि “आरोपी के खाते में केवल दो महीनों के भीतर 2 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन पाया गया है। वर्तमान में जिस मामले की जांच चल रही है, उससे संबंधित 10 लाख रुपये सीधे तौर पर आरोपी के खाते में जमा किए गए थे।”
पंजाब के अधिकारी की आत्महत्या: इस गिरोह का खूनी इतिहास
यह मामला केवल पैसों की हेराफेरी तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और दुखद तथ्य सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इस व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से पहले भी कई बड़े लोगों को निशाना बनाया गया था। इसमें पंजाब पुलिस के एक सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल थे, जिनसे इसी गिरोह ने 8 करोड़ रुपये की ठगी की थी। इतनी बड़ी राशि गंवाने के बाद गहरे सदमे और सामाजिक लोकलाज के कारण उस अधिकारी ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। यह खुलासा दर्शाता है कि यह गिरोह कितना खतरनाक और संगठित है।
देश के 9 राज्यों में फैला है जाल
STF की जांच में यह भी पता चला है कि अरवाज सैफी और उसके साथियों के खिलाफ उत्तराखंड के अलावा देश के 9 अन्य राज्यों में साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हैं। साइबर पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, फर्जी ईमेल आईडी और सिम कार्ड बरामद किए हैं।
इन राज्यों की पुलिस से किया जा रहा संपर्क:
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उत्तर प्रदेश
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दिल्ली
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हरियाणा
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पंजाब
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राजस्थान
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महाराष्ट्र (सहित अन्य)
वर्तमान में उत्तराखंड पुलिस अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ डेटा साझा कर रही है ताकि इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सके, जो संभवतः सीमा पार या किसी अन्य बड़े महानगर से इस पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित कर रहा है।
सावधानी ही बचाव है: विशेषज्ञों की राय
इस उत्तराखंड साइबर ठगी के मामले ने एक बार फिर निवेश के नाम पर होने वाले फ्रॉड को लेकर खतरे की घंटी बजा दी है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि:
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किसी भी अनजान व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप पर मिलने वाली ‘इन्वेस्टमेंट टिप्स’ पर भरोसा न करें।
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SEBI द्वारा पंजीकृत संस्थानों के माध्यम से ही निवेश करें।
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यदि कोई प्रतिदिन 1% या 5% जैसे अवास्तविक मुनाफे का वादा करता है, तो वह निश्चित रूप से एक घोटाला है।
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किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की स्थिति में तुरंत ‘1930’ हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
उत्तराखंड एसटीएफ की यह कामयाबी साइबर अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है। हालांकि, अरवाज सैफी की गिरफ्तारी केवल एक शुरुआत है। पुलिस अब उन “सफेदपोश” चेहरों की तलाश में है जो इन फर्जी खातों को संचालित करने के लिए सिम कार्ड और बैंक खाते उपलब्ध कराते हैं। जब तक आम नागरिक जागरूक नहीं होंगे, तब तक उत्तराखंड साइबर ठगी जैसे मामलों को पूरी तरह रोकना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।



