उत्तराखंडफीचर्ड

धामी कैबिनेट का ‘महा-विस्तार’: 5 नए चेहरों की एंट्री, जानें कौन बना मंत्री और किसे मिली जगह?

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में शुक्रवार का दिन बेहद निर्णायक साबित हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सरकार के चार साल पूरे होने से ठीक तीन दिन पहले बहुप्रतीक्षित धामी मंत्रिमंडल विस्तार को अंजाम दे दिया है। राजधानी देहरादून के राजभवन (लोक भवन) में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने पांच नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इस विस्तार के साथ ही अब धामी कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जो कि संवैधानिक रूप से राज्य की अधिकतम सीमा है। नए मंत्रियों के आने से शासन की गति तेज होने और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए क्षेत्रीय व जातीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है।

इन 5 दिग्गजों को मिली धामी कैबिनेट में जगह

मंत्रिमंडल में शामिल किए गए चेहरों में अनुभव और युवा ऊर्जा का बेहतरीन तालमेल देखने को मिला है। शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची इस प्रकार है:

  1. मदन कौशिक (हरिद्वार): पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर नेता मदन कौशिक की कैबिनेट में वापसी हुई है। हरिद्वार और मैदानी जिलों में उनकी मजबूत पकड़ का लाभ सरकार को मिलना तय है।

  2. भरत चौधरी (रुद्रप्रयाग): केदारघाटी का प्रतिनिधित्व करने वाले भरत चौधरी को मंत्री बनाकर सरकार ने युवाओं और पहाड़ी क्षेत्र को एक बड़ा संदेश दिया है।

  3. प्रदीप बत्रा (रुड़की): रुड़की विधानसभा सीट से विधायक प्रदीप बत्रा के आने से पश्चिमी उत्तराखंड और व्यापारिक वर्ग में बीजेपी की पकड़ और मजबूत होगी।

  4. खजान दास (राजपुर रोड): राजधानी देहरादून की सुरक्षित सीट से विधायक खजान दास को शामिल कर सरकार ने दलित समुदाय और राजधानी के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया है।

  5. राम सिंह कैड़ा (भीमताल): कुमाऊं मंडल के भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा को मंत्री बनाकर नैनीताल जिले और कुमाऊं की राजनीति को संतुलित किया गया है।


खाली पदों को भरने की चुनौती और सियासी मजबूरी

गौरतलब है कि साल 2022 में सरकार गठन के समय मुख्यमंत्री समेत 9 मंत्रियों ने शपथ ली थी। उस वक्त भी तीन पद खाली रखे गए थे। हालांकि, समय बीतने के साथ चुनौतियां बढ़ती गईं। 26 अप्रैल 2023 को वरिष्ठ मंत्री चंदन रामदास के आकस्मिक निधन ने एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया था। इसके बाद 16 मार्च 2025 को तत्कालीन वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के विवादित बयान के बाद हुए इस्तीफे ने खाली पदों की संख्या पांच तक पहुंचा दी थी।

लंबे समय से विपक्ष इन खाली पदों को लेकर सरकार पर हमलावर था और प्रशासनिक कामकाज पर भी इसका असर दिख रहा था। अब इस धामी मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए मुख्यमंत्री ने न केवल विपक्ष का मुंह बंद किया है, बल्कि अपनी टीम को फुल फॉर्म में लाकर विकास कार्यों में तेजी लाने का संकेत भी दिया है।

2027 का रोडमैप: क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर जोर

उत्तराखंड में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस लिहाज से यह विस्तार केवल पदों को भरना नहीं, बल्कि चुनावी बिसात बिछाना है। बीजेपी ने इस विस्तार में सूक्ष्म प्रबंधन (Micro-Management) का परिचय दिया है:

  • मैदान और पहाड़ का संतुलन: हरिद्वार (मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा) और देहरादून (खजान दास) से तीन मंत्रियों को लेकर मैदानी बेल्ट को साधा गया है, जहाँ सीटों का घनत्व अधिक है। वहीं रुद्रप्रयाग (भरत चौधरी) और भीमताल (राम सिंह कैड़ा) के जरिए पहाड़ की आवाज को कैबिनेट में जगह दी गई है।

  • सोशल इंजीनियरिंग: दलित चेहरे के रूप में खजान दास और ब्राह्मण-ठाकुर समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अन्य नामों का चयन किया गया है।

  • अनुभव का तड़का: मदन कौशिक जैसे पुराने चेहरों को लाकर सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अनुभवहीनता के जोखिम से बचना चाहती है।

क्या होगा सरकार के कामकाज पर असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस विस्तार से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर कार्यभार का बोझ कम होगा। अब तक कई महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री के पास ही थे, जिन्हें अब नए मंत्रियों के बीच बांटा जाएगा। इससे लंबित फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी और जिलों के प्रभारी मंत्रियों की कमी भी दूर होगी।

सचिवालय में अब नए मंत्रियों के बैठने के लिए कमरों की साफ-सफाई और स्टाफ की तैनाती की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 24 घंटों में मंत्रियों के विभागों का बंटवारा भी कर दिया जाएगा।

एक नई शुरुआत

धामी मंत्रिमंडल विस्तार राज्य की राजनीति के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। जहां एक तरफ नए मंत्रियों के समर्थकों में उत्साह की लहर है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री धामी के सामने अब इन सभी को एकजुट लेकर चलने और 2027 के लक्ष्य को हासिल करने की बड़ी चुनौती होगी।

उत्तराखंड की जनता अब यह देख रही है कि ये नए ‘सारथी’ धामी की विकास यात्रा को कितनी रफ्तार दे पाते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button