देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सोमवार को सियासी अखाड़े में तब्दील हो गई। विभिन्न जनमुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ हल्ला बोलने सड़कों पर उतरी कांग्रेस और पुलिस के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला। ‘लोक भवन’ (राजभवन) घेराव करने जा रहे हजारों कांग्रेसियों को पुलिस ने हाथीबड़कला के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा समेत करीब 500 नेताओं को हिरासत में ले लिया।
परेड ग्राउंड से शुरू हुआ ‘परिवर्तन’ का संकल्प
प्रदर्शन की शुरुआत देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड से हुई, जहां सुबह से ही प्रदेश भर के कोने-कोने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया था। रैली में कांग्रेस की एकजुटता की तस्वीर भी साफ दिखाई दी। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य एक ही मंच पर नजर आए।
परेड ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। इसके बाद हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं का हुजूम ‘राजभवन कूच’ के लिए आगे बढ़ा।
हाथीबड़कला में ‘युद्ध’ जैसे हालात, बैरिकेडिंग पर चढ़े कार्यकर्ता
जैसे ही कांग्रेस का विशाल जुलूस हाथीबड़कला पहुंचा, वहां पहले से मौजूद भारी पुलिस बल ने उन्हें रोकने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग कर रखी थी। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने पर अड़े रहे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
देखते ही देखते पुलिस और कांग्रेसियों के बीच जबरदस्त गहमागहमी शुरू हो गई। कई युवा कार्यकर्ता पुलिस के घेरे को चकमा देते हुए बैरिकेडिंग के ऊपर चढ़ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। काफी देर तक चले इस ड्रामे के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए दिग्गज नेताओं को बस में भरना शुरू किया।
दिग्गज नेता हिरासत में, पुलिस लाइन भेजे गए
हंगामे और टकराव के बाद पुलिस ने लगभग 500 कांग्रेसियों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए प्रमुख नेताओं में शामिल हैं:
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कुमारी शैलजा (प्रदेश प्रभारी)
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गणेश गोदियाल (प्रदेश अध्यक्ष)
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हरीश रावत (पूर्व मुख्यमंत्री)
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यशपाल आर्य (नेता प्रतिपक्ष)
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हरक सिंह रावत (चुनाव प्रबंधन समिति अध्यक्ष)
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प्रीतम सिंह (कैंपेन कमेटी अध्यक्ष)
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करन माहरा (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष)
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ज्योति रौतेला (महिला कांग्रेस अध्यक्ष)
सभी नेताओं को बसों में भरकर देहरादून पुलिस लाइन ले जाया गया, जहाँ घंटों तक उन्हें हिरासत में रखा गया।
“भाजपा को सत्ता से बेदखल कर ही रुकेंगे”: कांग्रेस का हुंकार
पुलिस हिरासत के दौरान नेताओं के तेवर ढीले नहीं पड़े। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा ने पुलिस के दम पर लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, “यह जन भावनाओं का सैलाब है जिसे पुलिस की लाठियों से नहीं रोका जा सकता। हमारा यह प्रतिरोध तब तक जारी रहेगा जब तक भाजपा को राज्य की सत्ता से अपदस्थ नहीं कर दिया जाता।”
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस प्रदर्शन को ‘परिवर्तन का जन सैलाब’ करार दिया। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों लोग देहरादून की सड़कों पर उतरे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की जनता भाजपा सरकार से त्रस्त हो चुकी है और बदलाव चाहती है।
सत्ता के गलियारों में हलचल
इस घेराव ने प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की यह एकजुटता और आक्रामक तेवर आने वाले चुनावों के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं। जिस तरह से कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक के कार्यकर्ता इस प्रदर्शन में शामिल हुए, उसने कांग्रेस की संगठन शक्ति का भी परिचय दिया है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा व्यवस्था
देहरादून पुलिस ने इस प्रदर्शन को देखते हुए शहर भर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। राजभवन जाने वाले सभी रास्तों पर अतिरिक्त पीएसी (PAC) तैनात की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन गिरफ्तारियां की गई थीं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
देहरादून की सड़कों पर आज जो नजारा दिखा, उसने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले दिन काफी गर्माहट भरे होने वाले हैं। कांग्रेस ने ‘लोक भवन’ का घेराव कर यह जता दिया है कि वह सड़क से सदन तक सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।



