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पीएम मोदी के 12 साल पर भाजपा के रिपोर्ट कार्ड को कांग्रेस ने घेरा; गणेश गोदियाल ने पूछे तीखे सवाल

देहरादून: केंद्र की सत्ता में भाजपा सरकार के 12 साल पूरे होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे लंबे समय तक गैर-कांग्रेसी निर्वाचित शासक बनने के ऐतिहासिक पड़ाव पर उत्तराखंड की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार प्रधानमंत्री के 4,399 दिनों के निर्बाध व सफल कार्यकाल का जश्न ‘घर-घर रिपोर्ट कार्ड’ अभियान के जरिए मना रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस अभियान की क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा के इस जनसंपर्क अभियान को ‘आधा सच और पूरा प्रचार’ करार देते हुए तंज कसा है। गोदियाल ने कहा कि यदि सत्ताधारी दल में सच का सामना करने का साहस है, तो उसे अपनी कथित उपलब्धियों के साथ-साथ पिछले 12 वर्षों के अधूरे वादों, विफलताओं और जनता के साथ की गई वादाखिलाफी का भी पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए।

रोजगार के मोर्चे पर गहरी विफलता: ‘सालाना 2 करोड़ नौकरियों का क्या हुआ?’

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने केंद्र की आर्थिक नीतियों और रोजगार सृजन के दावों पर सबसे कड़ा प्रहार किया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2014 में सत्ता में आने से पहले प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं से हर वर्ष 2 करोड़ रोजगार देने का भव्य वादा किया था। इस गणित के हिसाब से भाजपा सरकार के 12 साल के इस लंबे सफर में अब तक करोड़ों नौजवानों को स्थाई रोजगार मिल जाना चाहिए था।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है; आज देश और विशेषकर उत्तराखंड का युवा बेरोजगारी की विकटतम समस्या से जूझ रहा है। उत्तराखंड के संदर्भ को उठाते हुए उन्होंने कहा कि देवभूमि में एक के बाद एक हुए भर्ती घोटालों ने युवाओं के मनोबल और उनके भविष्य को गहरी ठेस पहुंचाई है। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि भाजपा नेताओं को जनता के द्वार पर जाकर यह साफ करना चाहिए कि उनके रोजगार संबंधी वादे कागजों से निकलकर धरातल पर क्यों नहीं उतर पाए?

अग्निवीर योजना और देवभूमि के सैनिकों का दर्द

उत्तराखंड की पहचान वीर सैनिकों, सैन्य परिवारों और पूर्व सैनिकों की पवित्र भूमि के रूप में रही है। यहां का लगभग हर दूसरा परिवार भारतीय सेना से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। गणेश गोदियाल ने इस संवेदनशील पहलू को छूते हुए ‘अग्निवीर योजना’ पर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि चार साल के इस संविदात्मक सैन्य मॉडल को लेकर उत्तराखंड के युवाओं और उनके अभिभावकों के मन में असुरक्षा की गहरी भावना और कई तीखे सवाल हैं।

गणेश गोदियाल का आधिकारिक बयान:

“जो प्रदेश देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने बेटों को हंसते-हंसते न्यौछावर कर देता है, वहां के युवाओं को चार साल की अस्थायी नौकरी में बांध दिया गया। भाजपा जब ‘घर-घर रिपोर्ट कार्ड’ लेकर जा रही है, तो उसे वीर माताओं और पूर्व सैनिकों की आंखों में आंखें डालकर यह बताना चाहिए कि अग्निवीर योजना के बाद उनके बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा?”

‘हवाई चप्पल’ से लेकर ‘महंगी रेल यात्रा’ का सफर: आम आदमी पर चौतरफा मार

राजनीतिक विमर्श को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार के पुराने नारों की हवा निकाली। उन्होंने कहा कि एक समय नारा दिया गया था कि ‘हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में सफर करेगा।’ परंतु आज की कड़वी सच्चाई यह है कि हवाई जहाज तो दूर, इस सरकार के कार्यकाल में आम आदमी के लिए सामान्य रेल और बस यात्रा करना भी बजट से बाहर होता जा रहा है। लगातार बढ़ते किराए और रियायतों को समाप्त किए जाने से मध्यम और निम्न आय वर्ग का नागरिक बुरी तरह त्रस्त है।

इसके साथ ही, गोदियाल ने भाजपा की दो अन्य अति-महत्वाकांक्षी योजनाओं—’सांसद आदर्श ग्राम योजना’ और ‘100 स्मार्ट सिटी मिशन’—को पूरी तरह फ्लॉप शो करार दिया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा नेता उत्तराखंड के किसी एक ऐसे गांव या शहर का नाम बता दें जो इन योजनाओं के तहत पूरी तरह आदर्श या ‘स्मार्ट’ बन चुका हो। ये योजनाएं केवल विज्ञापनों तक सीमित होकर रह गईं और धरातल पर इनका कोई वजूद नजर नहीं आता।

किसानों की आय और आर्थिक असमानता पर चुप्पी क्यों?

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए गोदियाल ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करने वाली सरकार आज इस विषय पर मौन व्रत धारण कर चुकी है। लागत दोगुनी हो गई, खाद और बीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन किसान आज भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और कर्ज माफी के लिए सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा सरकार के 12 साल का रिपोर्ट कार्ड तब तक अधूरा और अपूर्ण माना जाएगा, जब तक उसमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं का ब्योरा शामिल नहीं किया जाता:

  • बढ़ती आर्थिक असमानता: देश की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों में केंद्रित हो जाना।

  • महिला सुरक्षा की जमीनी हकीकत: अंकिता भंडारी जैसे मामलों के बाद देवभूमि की बेटियों में व्याप्त असुरक्षा का माहौल।

  • महंगाई की चौतरफा मार: घरेलू गैस, खाद्य तेल और पेट्रोल-डीजल की बेलगाम कीमतें।

  • श्रमिकों की बदहाली: असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का अभाव।

उत्तराखंड कांग्रेस के इस तीखे वैचारिक हमले ने भाजपा के ‘घर-घर रिपोर्ट कार्ड’ अभियान को बैकफुट पर धकेलने का काम किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के लंबे कार्यकाल की उपलब्धियों को भुनाने की भाजपा की रणनीति के सामने कांग्रेस ने जन-सरोकारों से जुड़े जमीनी मुद्दों की एक लंबी फेहरिस्त खड़ी कर दी है।

गणेश गोदियाल का यह साफ संदेश है कि देश और प्रदेश की जनता अब केवल ‘चयनित विवरण’ (Selective Data) और भव्य प्रचार से संतुष्ट होने वाली नहीं है। 12 साल का समय किसी भी सरकार की नीतियों के मूल्यांकन के लिए पर्याप्त होता है। अब समय आ गया है कि सरकार अपनी विफलताओं का भी पूरा हिसाब दे, क्योंकि उत्तराखंड की प्रबुद्ध जनता भी आज यह पूरी शिद्दत से जानना चाहती है कि आखिरकार उनके ‘अच्छे दिनों’ के वादों का धरातल पर क्या हश्र हुआ?

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