देहरादून | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने विवादित बयानों के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गई हैं। इस बार निशाना लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी रहे। कंगना द्वारा राहुल गांधी के लिए ‘टपोरी’ जैसे शब्दों का प्रयोग किए जाने के बाद उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सियासी पारा चढ़ गया है। शनिवार को कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने इस अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और कंगना रनौत का पुतला दहन किया।
एश्ले हॉल चौक पर कांग्रेस का हल्लाबोल
शनिवार दोपहर देहरादून का एश्ले हॉल चौक कांग्रेस कार्यकर्ताओं के नारों से गूंज उठा। कांग्रेस सेवा दल के बैनर तले बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित हुए और भाजपा सांसद कंगना रनौत के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि एक संवैधानिक पद पर बैठी महिला सांसद से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कंगना रनौत का पुतला फूंका और चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अपने अमर्यादित व्यवहार में सुधार नहीं किया, तो कांग्रेस जन उन्हें सड़क से लेकर सदन तक चैन से नहीं बैठने देंगे।
“सांसद बनकर विकास की बात करें, न कि गुमराह”
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश उपाध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने कंगना रनौत पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सांसद बनने के बाद जनता को उम्मीद थी कि कंगना विकास के मुद्दों पर बात करेंगी और अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाएंगी, लेकिन इसके ठीक उलट वह केवल विवादों में बने रहने के लिए ओछी बयानबाजी कर रही हैं।
मनमोहन शर्मा ने कहा, “कंगना रनौत को यह सोचना चाहिए कि वह अब केवल एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार सांसद हैं। उन्हें इतना भी ज्ञान नहीं है कि एक सांसद को दूसरे सांसद के प्रति, जो कि देश के नेता प्रतिपक्ष भी हैं, किस तरह का भाव और शिष्टाचार रखना चाहिए। राहुल गांधी के चरित्र पर गलत बयान देकर वह जनता को गुमराह कर रही हैं।”
लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन: लालचंद शर्मा
प्रदर्शन में शामिल पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने भी कंगना के बयान को लोकतंत्र के लिए काला धब्बा करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘टपोरी’ जैसे शब्दों का प्रयोग करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह उस पद की गरिमा के भी खिलाफ है जिस पर कंगना खुद आसीन हैं।
लालचंद शर्मा ने कहा, “राहुल गांधी देश के लिए समर्पित होकर जनमानस की आवाज उठा रहे हैं। वह कन्याकुमारी से कश्मीर तक की पदयात्रा कर प्यार और सद्भाव का संदेश दे रहे हैं। ऐसे व्यक्तित्व के खिलाफ इस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल करना कंगना की अपनी सोच को दर्शाता है। यह राजनीतिक मर्यादाओं को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य है।”
क्या था कंगना रनौत का विवादित बयान?
यह पूरा विवाद कंगना रनौत के उस हालिया बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने राहुल गांधी की कार्यशैली और व्यवहार पर टिप्पणी की थी। कंगना ने कथित तौर पर कहा था, “हम महिलाओं को उनको (राहुल गांधी) देखकर असहज महसूस होता है, क्योंकि वो जैसे टपोरी की तरह आते हैं, सबसे तू-तड़ाक करते हैं।” कंगना का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कांग्रेस ने इसे आड़े हाथों लिया। कांग्रेस का तर्क है कि राहुल गांधी ने हमेशा शालीनता का परिचय दिया है और उन्हें ‘टपोरी’ कहना करोड़ों कांग्रेस समर्थकों और भारत के लोकतंत्र का अपमान है।
कांग्रेस की चेतावनी: “भविष्य में बड़ा होगा आंदोलन”
देहरादून में हुए इस प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस ने भाजपा नेतृत्व को भी संदेश देने की कोशिश की है। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी जैसे जनप्रिय नेता के खिलाफ अगर भविष्य में कंगना या किसी अन्य भाजपा नेता ने अभद्र टिप्पणी की, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
कांग्रेसियों ने चेताया कि भाजपा को अपने सांसदों को प्रशिक्षण देना चाहिए कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की शुचिता कैसे बरकरार रखी जाती है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कंगना रनौत ने मर्यादा की सभी रेखाएं लांघ दी हैं और उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
राजनीति में भाषा की गिरती गरिमा?
यह पहली बार नहीं है जब कंगना रनौत अपने बयानों के कारण विवादों में घिरी हों। हालांकि, सांसद बनने के बाद उनकी हर टिप्पणी का राजनीतिक वजन बढ़ गया है। देहरादून में हुआ यह विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ सकता है।
जहां भाजपा इसे कंगना की निजी राय बता सकती है, वहीं कांग्रेस इसे भाजपा की ‘महिला विरोधी और नफरत भरी’ राजनीति का हिस्सा बताकर घेराबंदी कर रही है। अब देखना यह होगा कि क्या कंगना अपने बयान पर कायम रहती हैं या चौतरफा दबाव के बाद कोई सफाई पेश करती हैं।



