
चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली में अवैध रूप से संचालित हो रहे नशा मुक्ति केंद्रों के खिलाफ प्रशासन ने अब अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ताजा मामला थराली विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्वालदम क्षेत्र का है, जहाँ चमोली नशा मुक्ति केंद्र छापा की कार्रवाई के दौरान मानवता और स्वास्थ्य मानकों के साथ हो रहे खिलवाड़ की भयावह तस्वीर सामने आई है। थराली के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) पंकज भट्ट के नेतृत्व में हुई इस औचक छापेमारी ने न केवल इस केंद्र की पोल खोली, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े को भी बेनकाब कर दिया है।
औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप
रविवार को एसडीएम पंकज भट्ट के साथ चिकित्सा विभाग और समाज कल्याण विभाग की संयुक्त टीम ने ग्वालदम में स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र पर अचानक दबिश दी। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से केंद्र संचालकों और वहां मौजूद कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। जांच टीम जब केंद्र के भीतर पहुंची, तो वहां की बदहाली और नियमों की अनदेखी देख अधिकारी भी दंग रह गए। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि केंद्र पूरी तरह से अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था और संचालकों के पास संचालन हेतु कोई भी वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
फर्जी डिग्री और ‘एडिटिंग’ का खेल
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा स्टाफ की योग्यता को लेकर हुआ। केंद्र द्वारा कागजों में 15 कर्मचारियों का रजिस्ट्रेशन दिखाया गया था, जिसमें डॉक्टर, नर्स और योग प्रशिक्षक शामिल थे। हालांकि, जब टीम ने उनके शैक्षिक और अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच की, तो किसी भी कर्मचारी के पास प्रमाणित डिग्री नहीं मिली।
अधिकारियों के अनुसार, एक डॉक्टर की डिग्री आंध्र प्रदेश से रजिस्टर्ड दिखाई गई थी, लेकिन प्रथम दृष्टया वह डिग्री पूरी तरह से ‘एडिटेड’ और फर्जी प्रतीत हुई। एसडीएम पंकज भट्ट ने बताया कि डिग्री में छेड़छाड़ के स्पष्ट संकेत मिले हैं और ऐसा लगता है कि किसी अन्य के दस्तावेज पर फर्जी नाम अंकित कर इसे तैयार किया गया है।
बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर और एक्सपायरी दवाओं का जखीरा
चमोली नशा मुक्ति केंद्र छापा के दौरान एक और गंभीर मामला प्रकाश में आया। केंद्र परिसर में ही अवैध रूप से एक मेडिकल स्टोर का संचालन किया जा रहा था। संबंधित व्यक्ति के पास केवल डी-फार्मा का डिप्लोमा था, लेकिन ड्रग लाइसेंस और मेडिकल स्टोर संचालन हेतु आवश्यक रजिस्ट्रेशन नदारद मिले।
इतना ही नहीं, ओपीडी कक्ष की स्थिति नरक के समान पाई गई। मरीजों के इलाज के लिए रखे गए जीवनरक्षक उपकरण, जैसे कि ब्लड प्रेशर मापने की मशीन (स्पिग्नोमैनोमीटर) और वजन मशीन, पूरी तरह से खराब थे। केंद्र की अलमारियों में रखी अधिकांश दवाएं एक्सपायर हो चुकी थीं। दवाओं का कोई स्टॉक रजिस्टर नहीं रखा गया था, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि मरीजों को बिना किसी डॉक्टरी सलाह के प्रतिबंधित या एक्सपायरी दवाएं दी जा रही थीं।
सुरक्षा और मानकों की अनदेखी
नशा मुक्ति केंद्रों के लिए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस की यहाँ सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। केंद्र में सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े थे, जिससे वहां रहने वाले मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि दिसंबर 2025 के बाद से केंद्र में किसी भी नए रोगी का पंजीकरण नहीं किया गया था, बावजूद इसके केंद्र का संचालन जारी था।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
एसडीएम थराली पंकज भट्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे केंद्रों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर केंद्र संचालकों के खिलाफ धोखाधड़ी और अवैध संचालन की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
“यह बेहद गंभीर मामला है कि नशा मुक्ति के नाम पर लोगों को मौत के मुंह में धकेला जा रहा था। न स्टाफ योग्य है, न दवाएं सुरक्षित हैं और न ही दस्तावेज वैध हैं। जल्द ही इस केंद्र को सील करने और संचालकों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” – पंकज भट्ट, एसडीएम थराली
ग्वालदम की इस घटना ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे निजी नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की इस कार्रवाई की सराहना की है और मांग की है कि जिले के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह का अभियान चलाकर अवैध केंद्रों को बंद किया जाए।



