अंकिता भंडारी केस में ‘VIP’ के नाम पर आर-पार की जंग, अंकिता के माता-पिता ने CM धामी से की ये मांग
Ankita Bhandari Case 2026: उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के हत्यारों को सजा और उस रहस्यमयी 'VIP' के नाम के खुलासे की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। मुख्यमंत्री धामी से मुलाकात के बाद अब सामाजिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एक बार फिर देवभूमि की सियासत और सामाजिक गलियारों में उबाल ला दिया है। मामला उस ‘VIP’ (वीआईपी) के इर्द-गिर्द सिमट गया है, जिसके नाम का खुलासा पिछले तीन वर्षों से अधर में लटका है। गुरुवार को राज्य आंदोलनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। मुख्य मांग एक ही है— उस वीआईपी का नाम सार्वजनिक हो जिसके लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया था।
मुख्यमंत्री से मिले माता-पिता, सौंपी मांगों की सूची
बुधवार को अंकिता के शोकाकुल माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनकी बेटी की हत्या महज एक अपराध नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश थी।
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कड़ी सजा की मांग: अंकिता के परिजनों ने हत्यारों के लिए उम्रकैद से भी सख्त सजा की मांग की है।
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VIP का सच: पत्र में जिक्र है कि अंकिता की हत्या के पीछे वही ‘वीआईपी’ गेस्ट था, जिसे खुश करने के लिए अंकिता पर अनैतिक दबाव डाला गया था।
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न्यायिक निगरानी में जांच: परिवार अब स्थानीय जांच एजेंसियों के बजाय सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज की निगरानी में CBI (सीबीआई) जांच चाहता है।
मुख्यमंत्री धामी ने इस पर आश्वासन देते हुए कहा है कि सरकार परिजनों की मंशा के अनुरूप जल्द ही उचित निर्णय लेगी।

सामाजिक संगठनों का हल्ला बोल: “SIT की जांच अधूरी”
गुरुवार को राज्य आंदोलनकारी एवं उत्तराखंड महिला मंच की अध्यक्ष कमला पंत और भाकपा माले के प्रदेश सचिव इंद्रेश मैखुरी ने अंकिता के गांव पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए गए।
कमला पंत ने दोटूक कहा, “तीन साल बीत गए, लेकिन सरकार आज तक यह नहीं बता पाई कि वो वीआईपी कौन है? आखिर किसे बचाने की कोशिश की जा रही है? जब तक नाम सार्वजनिक नहीं होता, उत्तराखंड की हर बेटी असुरक्षित है।”
मुख्य आरोप और अनसुलझे सवाल:
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साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़: रिसॉर्ट के उस हिस्से को आनन-फानन में क्यों तोड़ा गया जहाँ सबूत मिल सकते थे? इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
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SIT पर अविश्वास: सामाजिक संगठनों का आरोप है कि एसआईटी (SIT) ने जांच को भटकाने का काम किया है और मुख्य साजिशकर्ता को बचाने का प्रयास किया है।
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वायरल ऑडियो की हकीकत: वीआईपी के संबंध में जो ऑडियो वायरल हुए थे, उनकी फॉरेंसिक जांच और पुष्टि सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
विपक्ष और जन-आंदोलन की नई लहर
अंकिता भंडारी केस अब केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तराखंड की अस्मिता का प्रतीक बन चुका है। कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) और आम आदमी पार्टी जैसे दल लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति यहाँ आकर क्यों थम जाती है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार जल्द ही सीबीआई जांच और वीआईपी के नाम पर स्थिति स्पष्ट नहीं करती, तो यह मामला आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
संघर्ष की थकान, लेकिन न्याय की उम्मीद कायम
अंकिता के माता-पिता पिछले तीन वर्षों से इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं। लगातार भागदौड़ और मानसिक दबाव ने उन्हें शारीरिक रूप से कमजोर कर दिया है, लेकिन उनकी आंखों में न्याय की लौ अभी भी जल रही है। उन्होंने साफ कर दिया है कि “जब तक उस चेहरे से नकाब नहीं हटता जिसके लिए हमारी बेटी की बलि चढ़ाई गई, तब तक हमारा संघर्ष थमेगा नहीं।”
आर्टिकल के मुख्य बिंदु (Match Summary):
| विवरण | वर्तमान स्थिति |
| मुख्य मुद्दा | अज्ञात ‘VIP’ का नाम सार्वजनिक करना |
| जांच की मांग | सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच |
| सरकार का रुख | परिजनों की मांग पर विचार करने का आश्वासन |
| विरोध का स्वर | कांग्रेस, यूकेडी और महिला मंच का प्रदर्शन |



