
देहरादून (सचिवालय): उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ मानी जाने वाली कृषि और बागवानी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। शुक्रवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ (RKVY) के अंतर्गत वार्षिक कार्य योजना 2026-27 के लिए राज्य स्तरीय संस्तुति समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में न केवल आगामी वित्तीय वर्ष का रोडमैप तैयार किया गया, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में कई नीतिगत फैसले भी लिए गए।
समिति ने गहन विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्रस्तावित वार्षिक कार्य योजना को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि योजनाओं का लाभ सीधे खेत और खलिहान तक पहुंचना चाहिए।
क्लस्टर आधारित खेती और FPO: लघु किसानों की ताकत
बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश में ‘क्लस्टर आधारित खेती’ को प्राथमिकता दी जाए।
क्लस्टर खेती के लाभ:
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छोटे और सीमांत किसानों को एक साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर उत्पादन।
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बीज, खाद और तकनीक की लागत में कमी।
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बाजार में मोलभाव करने की बेहतर शक्ति (Bargaining Power)।
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स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग में सुगमता।
मुख्य सचिव ने कहा कि जब किसान समूहों (FPO) के माध्यम से खेती करेंगे, तो उन्हें आधुनिक फार्म मशीनरी और बेहतर बाजार सुविधाएं उपलब्ध कराना आसान होगा। उन्होंने प्रदेश में अधिक से अधिक फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के भी निर्देश दिए, ताकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों को भी आधुनिक कृषि यंत्रों का लाभ मिल सके।
पीएम किसान योजना: 100% संतृप्तिकरण का लक्ष्य
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ को लेकर मुख्य सचिव ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य में इस योजना का 100 प्रतिशत संतृप्तिकरण (Saturation) सुनिश्चित किया जाए। कोई भी पात्र किसान इस लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
इसके लिए मुख्य सचिव ने विशेष कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि:
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आधार आधारित भुगतान: सभी पात्र किसानों का भुगतान आधार से लिंक होना अनिवार्य है।
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ई-केवाईसी (e-KYC): लंबित ई-केवाईसी के मामलों को मिशन मोड में पूरा किया जाए।
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किसान मानधन योजना: इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि वृद्धावस्था में किसानों को पेंशन का सुरक्षा कवच मिल सके।
जैविक और प्राकृतिक खेती: उत्तराखंड की वैश्विक पहचान
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मुख्य सचिव ने जैविक (Organic) और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की दिशा में प्रयासों को तेज करने की बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पास ‘हिमालयन ब्रांड’ की वैश्विक साख है। अगर हम अपनी पारंपरिक फसलों को वैज्ञानिक और प्राकृतिक तरीके से उगाते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हमारे किसानों को बेहतरीन दाम मिल सकते हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने स्थानीय उत्पादों और फसलों के लिए बाजार सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के निर्देश दिए। सरकार का लक्ष्य है कि ‘खेत से बाजार तक’ की दूरी को कम किया जाए और बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर किसानों को सीधे लाभ पहुंचाया जाए।
समयबद्ध कार्यान्वयन और आगामी लक्ष्य
प्रशासनिक चुस्ती दिखाते हुए मुख्य सचिव ने वार्षिक कार्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अगली राज्य स्तरीय संस्तुति समिति की बैठक दिसंबर-जनवरी माह में ही आयोजित करने के निर्देश दिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजनाओं का बजट समय पर जारी हो और कृषि सीजन शुरू होने से पहले ही सारी तैयारियां पूरी हों।
बैठक में सचिव दिलीप जावलकर एवं एस.एन. पाण्डेय सहित कृषि, उद्यान और पशुपालन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सचिव दिलीप जावलकर ने आश्वस्त किया कि मुख्य सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप विभागीय स्तर पर माइक्रो-प्लानिंग शुरू कर दी गई है।
सुदृढ़ होगी ग्रामीण आर्थिकी
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 2026-27 के तहत लिए गए ये निर्णय उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि के नए द्वार खोलेंगे। एफपीओ, क्लस्टर फार्मिंग और डिजिटल भुगतान जैसी पहलें न केवल कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाएंगी, बल्कि युवाओं को भी खेती की ओर आकर्षित करने में मदद करेंगी।



