देशफीचर्ड

बिहार चुनाव 2025: राजग की ‘ऐतिहासिक जीत’ पर नड्डा का बयान — ‘डबल इंजन सरकार की नीतियों पर जनता ने लगाई मुहर’

भाजपा अध्यक्ष बोले—‘जंगल राज और भ्रष्टाचार को जनता ने पूरी तरह नकारा’, बिहार के जनादेश को बताया विकास और स्थिरता की जीत

नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा हासिल की गई रिकॉर्ड जीत पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने शुक्रवार को इस जनादेश को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि बिहार की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की “डबल इंजन सरकार” की विकासोन्मुखी और कल्याणकारी नीतियों में अपना अटूट विश्वास जताया है।

नड्डा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि यह नतीजे साबित करते हैं कि बिहार की जनता ने महागठबंधन द्वारा फैलाए गए “जंगल राज, भ्रष्टाचार और नकारात्मक राजनीति” को निर्णायक रूप से खारिज कर दिया है। उनके अनुसार, “यह जनादेश सुशासन, स्थिरता और विकास की जीत है।”


“डबल इंजन सरकार का भरोसा और मजबूत हुआ” — नड्डा

जे. पी. नड्डा ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि चुनाव में राजग को मिला भारी जनसमर्थन सिर्फ राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य की संयुक्त विकास योजनाओं पर जनता की पूरी आस्था का प्रतीक है।

उन्होंने कहा:

“बिहार की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी जी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी की डबल इंजन सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, गरीब कल्याण कार्यक्रमों और विकास की गति पर विश्वास जताया है। यह जीत अभूतपूर्व है और हम जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगे।”

बीते कुछ वर्षों में केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, सड़क व बिजली विस्तार और महिलाओं के लिए चलाई गई कई योजनाओं ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव छोड़ा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यही योजनाएँ इस बार राजग की जीत की मजबूत नींव बनीं।


महागठबंधन पर बड़ा हमला — “जंगल राज की सोच को जनता ने नकारा”

नड्डा ने अपनी पोस्ट में महागठबंधन की राजनीति पर भी सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग अब अतीत के “अस्थिरता और भय के दौर” में वापस लौटने को तैयार नहीं थे।

“यह जनादेश साफ संकेत देता है कि बिहार विकास चाहता है, न कि महागठबंधन की नकारात्मक, भ्रम फैलाने वाली और पिछली गलतियों से भरी राजनीति। जंगल राज और भ्रष्टाचार को जनता ने ठुकरा दिया है।”

इस चुनाव में महागठबंधन का सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था रहा, लेकिन नतीजों ने दिखाया कि यह रणनीति मतदाताओं को प्रभावित करने में विफल रही।


राजग की जीत क्यों ‘ऐतिहासिक’? जानें प्रमुख कारण

नड्डा द्वारा इस जीत को “ऐतिहासिक” बताए जाने के पीछे कई विश्लेषण सामने आ रहे हैं:

1. रिकॉर्ड सीटों पर बढ़त

राजग ने चुनाव में जिस पैमाने पर बढ़त हासिल की, वह पिछली कई विधानसभा लड़ाइयों की तुलना में अभूतपूर्व मानी जा रही है। भाजपा और जदयू दोनों ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए गठबंधन को दो-तिहाई से अधिक बहुमत की ओर पहुंचा दिया।

2. शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में प्रभाव

पहले माना जाता था कि राजग का मजबूत असर शहरी क्षेत्रों तक सीमित है, लेकिन इस बार ग्रामीण इलाकों में भी भारी समर्थन मिला। खासकर महिलाओं का वोट निर्णायक रहा।

3. नीतीश–मोदी फैक्टर का दोहरा असर

प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता और नीतीश कुमार की क्षेत्रीय साख, दोनों ने मिलकर यह चुनाव राजग के पक्ष में मोड़ दिया।

4. कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच

बिहार में पिछले वर्षों में हुए सामाजिक-आर्थिक सुधारों का लाभ सीधे गरीब और मध्यम वर्ग तक पहुंचा, जिससे राजग के प्रति एक स्थायी विश्वास बना।


भाजपा का अगला एजेंडा — ‘विकास की गति तेज करने का वादा’

ऐतिहासिक जीत को लेकर उत्साहित भाजपा अब अगले पांच वर्षों की रणनीति पर भी काम शुरू कर चुकी है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि बिहार को “नए विकास मॉडल” का उदाहरण बनाना अब प्राथमिकता होगी। बीजेपी सूत्रों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार मिलकर अब इन क्षेत्रों पर अधिक फोकस करेंगी:

  • रोजगार सृजन
  • औद्योगिक निवेश
  • कृषि आधारित उद्योग
  • महिला सुरक्षा और शिक्षा
  • स्वास्थ्य अवसंरचना
  • डिजिटल और सड़क कनेक्टिविटी

नड्डा ने कहा कि पार्टी “बिहार को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और विकासशील राज्य” बनाने की दिशा में तेज़ी से काम करेगी।


राजनीतिक संदेश: राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा संकेत

बिहार के नतीजों को सिर्फ राज्य की राजनीति तक सीमित न मानकर राष्ट्रीय दृष्टि से भी देखा जा रहा है। 2026 के राज्य चुनावों और 2029 के आम चुनाव से पहले यह परिणाम भाजपा के लिए मनोबल बढ़ाने वाले हैं, वहीं विपक्षी गठबंधन को गंभीर समीक्षा का संकेत देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • बिहार के नतीजे 2024 के बाद भाजपा के राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत करते हैं
  • महागठबंधन जैसे मॉडल पर सवाल खड़े होते हैं
  • क्षेत्रीय दलों की भूमिका और सीमाएं फिर सामने आई हैं

बिहार ने विकास बनाम नकारात्मक राजनीति के बीच स्पष्ट चुनाव किया

जे. पी. नड्डा का बयान इस बात का दर्पण है कि भाजपा इस जीत को सिर्फ राजनीतिक समर्थन नहीं, बल्कि जनता द्वारा दी गई एक “नीति–मूल्य आधारित स्वीकृति” के रूप में देख रही है।
बिहार के परिणाम यह दर्शाते हैं कि मतदाता अब लंबी अवधि के विकास, सुशासन और स्थिर सरकार को तवज्जो दे रहे हैं। राजग की जीत न केवल बिहार की राजनीति को पुनः परिभाषित करती है, बल्कि भारतीय राजनीति के व्यापक परिदृश्य पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button