देशफीचर्ड

बिहार विधानसभा चुनाव: सियासी तापमान चढ़ा, महागठबंधन, एनडीए और जनसुराज उतरे मैदान में

महागठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा, एनडीए के कार्यकर्ता सम्मेलन और प्रशांत किशोर की बदलाव यात्रा से बढ़ी चुनावी हलचल

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही अभी बाकी हो, लेकिन राज्य की राजनीति चुनावी रंगत में पूरी तरह रंग चुकी है। महागठबंधन, एनडीए और जनसुराज पार्टी — तीनों ही ध्रुव अपने-अपने अभियान और कार्यक्रमों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने में जुट गए हैं।

महागठबंधन: वोटर अधिकार यात्रा

महागठबंधन ने अपने अभियान को “वोटर अधिकार यात्रा” का नाम दिया है। इस यात्रा के जरिए वह जनता के बीच सरकार की नाकामियों को मुद्दा बनाकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
आरा में आयोजित सभा में आरजेडी नेता और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा,
मोदी जी और नीतीश जी का वादा बच्चे की नाव जैसा होता है, जिसे वे फूंककर उड़ा देते हैं। इसलिए आप सब लोग एकजुट होकर महागठबंधन की सरकार बनाइए। पढ़ाई, दवाई, कमाई, सिंचाई, कार्रवाई और सुनवाई वाली सरकार बनाइए।”
महागठबंधन का दावा है कि इस बार वह सत्ता से एनडीए को बेदखल कर देगा।

एनडीए: कार्यकर्ता सम्मेलन

एनडीए ने चुनावी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ी है। गठबंधन के नेता राज्यभर में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं। इन सम्मेलनों का मकसद संगठन की मजबूती दिखाना और कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति से अवगत कराना है।
सम्मेलनों में एनडीए के दिग्गज नेता महागठबंधन और खासकर तेजस्वी यादव व राहुल गांधी पर निशाना साध रहे हैं। एनडीए का दावा है कि जनता उनके विकास कार्यों और स्थिर शासन के आधार पर एक बार फिर से सरकार रिपीट करेगी।

जनसुराज पार्टी: बिहार बदलाव यात्रा

वहीं तीसरे मोर्चे के तौर पर प्रशांत किशोर अपनी जनसुराज पार्टी के साथ सक्रिय हैं। वह “बिहार बदलाव यात्रा” के जरिए गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। किशोर लगातार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को लेकर नीतीश सरकार और विपक्ष दोनों पर हमला बोल रहे हैं। उनका कहना है कि जनता इस बार पारंपरिक राजनीति से हटकर विकल्प तलाशने के मूड में है।

सियासी जमीन पर तिकड़ी का संघर्ष

बिहार की राजनीति फिलहाल त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ती दिख रही है। महागठबंधन जहां युवाओं और पिछड़े वर्ग को साधने की कोशिश कर रहा है, वहीं एनडीए अपने संगठन और केंद्र सरकार की योजनाओं पर भरोसा जता रहा है। दूसरी ओर जनसुराज पार्टी खुद को बदलाव की राजनीति का विकल्प पेश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी समीकरण में छोटे-छोटे वोट शिफ्ट भी नतीजों पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button